UN on Pakistan Ahmadiyya : संयुक्त राष्ट्र (UN) में एक बार फिर पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिम समुदाय के साथ कथित भेदभाव और उत्पीड़न का मुद्दा उठाया गया है। सोमवार, 7 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने अहमदियों के खिलाफ लगातार सामने आ रही हिंसा, भेदभाव और कानूनी पाबंदियों की खबरों पर गंभीर चिंता जताई। विशेषज्ञों ने पाकिस्तानी सरकार से समुदाय के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करने की अपील की।
धार्मिक पहचान के कारण उत्पीड़न और मुकदमों का आरोप
UN विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी लगातार रिपोर्टें सामने आ रही हैं जिनमें अहमदिया समुदाय के लोगों को उनकी धार्मिक पहचान के कारण प्रताड़ित किए जाने, उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज होने और हिंसा किए जाने की बात कही गई है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक व्यक्ति को विचार, धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता का अधिकार है। किसी भी व्यक्ति को उसकी धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव या हिंसा का सामना नहीं करना चाहिए।
मस्जिदों और कब्रिस्तानों को बनाया जा रहा निशाना
विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय से जुड़े धार्मिक स्थलों और कब्रिस्तानों को लेकर भी चिंता जताई। रिपोर्टों में अहमदिया मस्जिदों पर हमले, कब्रों की बेअदबी और धार्मिक पहचान से जुड़े मामलों में कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा के दौरान समुदाय के धार्मिक रीति-रिवाजों में कथित हस्तक्षेप और गिरफ्तारियों के मामलों को भी गंभीर मानवाधिकार चिंता के तौर पर देखा गया है।
धार्मिक त्योहार मनाने पर कार्रवाई पर सवाल
UN विशेषज्ञों ने कहा कि किसी व्यक्ति को केवल अपने धार्मिक त्योहार मनाने या धार्मिक परंपराओं का पालन करने के कारण गिरफ्तारी, हिरासत, निगरानी या आपराधिक मुकदमे का सामना नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक हालिया ईद से जुड़ी घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि अहमदिया समुदाय को सार्वजनिक जीवन के साथ-साथ निजी स्तर पर भी भेदभावपूर्ण व्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारियों की भूमिका और मिलीभगत के आरोप
विशेषज्ञों ने पाकिस्तान में ऐसे हमलों और नफरत फैलाने वाली गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत बताई। उनके अनुसार, कुछ मामलों में अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप भी सामने आए हैं। ऐसे माहौल में डर और असुरक्षा के कारण लोग तथा संस्थाएं अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने से पीछे हट सकती हैं। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान से इस तरह की कथित दंडहीनता को खत्म करने की अपील की।
दोषियों पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
UN विशेषज्ञों ने कहा कि मानवाधिकार उल्लंघनों को रोकना राज्य की जिम्मेदारी है। इसके लिए आरोपों की तत्काल, निष्पक्ष और प्रभावी जांच होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए और पीड़ितों को प्रभावी राहत उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
भेदभावपूर्ण कानूनों की समीक्षा की अपील
संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा कि धर्म या विश्वास चाहे जो भी हो, सभी लोगों को कानून के तहत समान सुरक्षा मिले। उन्होंने उन कानूनों और प्रशासनिक उपायों की समीक्षा करने की भी अपील की, जो अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत पाकिस्तान की जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों की गारंटी के लिए प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
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