Sagar News : मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसी क्रम में बंडा के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) यानी SDM और अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (SDOP) को उनके मौजूदा पदों से हटा दिया गया है। दोनों अधिकारियों की जगह नए अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
24 से ज्यादा मौतों के बाद बढ़ा प्रशासनिक दबाव
बंडा में जहरीली शराब त्रासदी ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, हादसे में अब तक 24 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 100 पीड़ित अलग-अलग अस्पतालों में उपचार करा रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने के कारण प्रशासन पर घटना की जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही के खिलाफ कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
आरती यादव का तबादला, संजय कुमार जैन बने नए SDM
मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग और सागर कलेक्टर कार्यालय की ओर से 7 सितंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार बंडा की SDM आरती यादव का तबादला कर दिया गया है। अब उन्हें कलेक्टर कार्यालय सागर में पदस्थ किया गया है। उनकी जगह डिप्टी कलेक्टर संजय कुमार जैन को बंडा का नया SDM नियुक्त किया गया है। जैन को प्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ शाहगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।
रोहित ललकार को मिली बंडा SDOP की जिम्मेदारी
पुलिस विभाग में भी बड़ा बदलाव किया गया है। गृह विभाग के आदेश के तहत भोपाल पुलिस मुख्यालय में पदस्थ उप पुलिस अधीक्षक रोहित ललकार को बंडा का नया SDOP बनाया गया है। वहीं, बंडा में तैनात SDOP प्रदीप वाल्मीकि को उनके मौजूदा पद से हटाकर वापस पुलिस मुख्यालय भोपाल भेज दिया गया है। इस बदलाव को जहरीली शराब कांड के बाद हुई प्रशासनिक कार्रवाई की अहम कड़ी माना जा रहा है।
तीन आबकारी अधिकारियों पर पहले ही गिर चुकी गाज
जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में कार्रवाई का सिलसिला पहले ही शुरू हो चुका था। प्रशासन ने घटना के बाद तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित किया था। इसके अलावा पुलिस विभाग के दो अधिकारियों पर भी निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। अब SDM और SDOP को हटाए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया है।
अस्पतालों में करीब 100 पीड़ितों का इलाज जारी
हादसे में प्रभावित करीब 100 लोगों का अलग-अलग अस्पतालों में उपचार चल रहा है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से पीड़ितों को इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। वहीं, घटना के बाद जहरीली शराब के स्रोत और इसके वितरण से जुड़े लोगों की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई की जा रही है। मामले में दोषियों की पहचान और जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।
लापरवाही पर सख्त कार्रवाई का संदेश
बंडा की घटना के बाद अधिकारियों के तबादले और निलंबन से प्रशासन ने सख्त रुख का संकेत दिया है। लगातार हो रही कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर शिकंजा कसने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों का इलाज, घटना की जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है।
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