Satya Niketan Case : दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत ढहने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया है। गैर-कानूनी निर्माण और डिमोलिशन से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त अमिसकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने एक आवेदन दाखिल किया है। इसमें मामले की गंभीरता को देखते हुए आज दोपहर 2 बजे तत्काल सुनवाई किए जाने की मांग की गई है।

हादसे को केवल एक इमारत गिरने की घटना नहीं मानने की अपील
अमिसकस क्यूरी ने अदालत के सामने कहा है कि सत्य निकेतन की घटना को महज एक अलग हादसे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। आवेदन में दिल्ली के प्रमुख कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास बड़ी संख्या में संचालित हो रहे पेइंग गेस्ट (PG) आवासों और निजी छात्रावासों का मुद्दा उठाया गया है। इन इमारतों में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर व्यापक स्तर पर जांच की जरूरत बताई गई है।

आवासीय इमारतों में बदलाव को लेकर उठे गंभीर सवाल
आवेदन के मुताबिक, कई PG और निजी हॉस्टल ऐसी संपत्तियों में संचालित हो रहे हैं, जिन्हें मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए मंजूरी मिली थी। इनमें स्वीकृत भवन नक्शे में कथित तौर पर बदलाव, अतिरिक्त निर्माण और उपयोग में परिवर्तन किए जाने की आशंका जताई गई है। ऐसे में यह जांच जरूरी है कि संबंधित इमारतें निर्धारित बिल्डिंग बाय-लॉज, ढांचागत सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन कर रही हैं या नहीं।
दिल्लीभर में PG और छात्र आवासों के सेफ्टी ऑडिट की मांग
वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली के कॉलेज और विश्वविद्यालय परिसरों के आसपास संचालित सभी छात्र आवासों और PG की समयबद्ध जांच कराने का अनुरोध किया है। इसके साथ ही उन्होंने व्यापक ‘सेफ्टी ऑडिट’ कराने की मांग की है, ताकि संभावित जोखिम वाली इमारतों की पहचान समय रहते की जा सके और किसी बड़े हादसे को रोका जा सके।
स्वीकृत नक्शे और वास्तविक निर्माण की हो जांच
प्रस्तावित सुरक्षा ऑडिट में सबसे पहले यह जांचने की मांग की गई है कि संबंधित इमारत का निर्माण स्वीकृत भवन योजना के अनुरूप हुआ है या नहीं। इसके अलावा यह भी देखा जाए कि स्वीकृत सीमा से अधिक मंजिलों का निर्माण तो नहीं किया गया है। बेसमेंट में किसी तरह का अवैध निर्माण या स्वीकृत योजना से अलग बदलाव किए जाने की स्थिति की भी जांच करने की बात कही गई है।

भूमि उपयोग और ढांचागत मजबूती पर भी नजर
ऑडिट के दौरान यह जांच भी जरूरी बताई गई है कि भवन का वास्तविक इस्तेमाल स्वीकृत भूमि उपयोग के नियमों के अनुरूप है या नहीं। इसके साथ ही इमारत की संरचनात्मक मजबूती और सुरक्षा स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन किया जाना चाहिए। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि कहीं भवन का कोई हिस्सा कमजोर या दुर्घटना की आशंका वाला तो नहीं है।
फायर सेफ्टी और आपातकालीन रास्तों की जांच जरूरी
अमिसकस क्यूरी ने आग से बचाव के इंतजामों को भी सुरक्षा ऑडिट का अहम हिस्सा बनाने की मांग की है। इसमें फायर सेफ्टी उपकरणों की उपलब्धता और मानकों के पालन की जांच शामिल होगी। इसके साथ ही आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के रास्ते पर्याप्त और बाधामुक्त हैं या नहीं, यह भी देखा जाना चाहिए।
जर्जर इमारतों की पहचान कर कार्रवाई की अपील
प्रस्तावित जांच में इमारत के किसी भी जर्जर, कमजोर या खतरनाक हिस्से की पहचान करने पर भी जोर दिया गया है। अमिसकस क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेते हुए उचित दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है। आवेदन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में छात्रों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करना और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

