Asaram Bapu News : नाबालिग से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में जेल की सजा काट रहे स्वयंभू धर्मगुरु आसुमल उर्फ आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी ओर से दाखिल अंतरिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। आसाराम ने यह अर्जी राजस्थान के जोधपुर हाईकोर्ट से मिली 20 दिनों की पैरोल के आधार पर दायर की थी। उनका उद्देश्य गुजरात में दर्ज यौन शोषण के मामले के चलते जेल से रिहाई में आ रही कानूनी बाधा को दूर कराना था।
पैरोल मिलने के बाद भी नहीं हो पाई रिहाई
हाल ही में जोधपुर हाईकोर्ट ने आसाराम को स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए 20 दिनों की पैरोल प्रदान की थी। हालांकि, पैरोल आदेश मिलने के बावजूद जेल प्रशासन ने उनकी रिहाई रोक दी। प्रशासन की ओर से गुजरात में दर्ज सूरत यौन शोषण मामले को इसकी वजह बताया गया। इस कानूनी अड़चन के चलते आसाराम पैरोल का लाभ उठाकर जेल से बाहर नहीं आ सके।
गुजरात मामले में हाईकोर्ट का रुख
जेल से बाहर आने का रास्ता साफ कराने के लिए आसाराम के वकीलों ने गुजरात हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की मांग की। सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार किया। इसके बाद कोर्ट ने आसाराम को फिलहाल राहत देने से इनकार करते हुए उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी। फैसले के बाद उनकी जेल से बाहर आने की उम्मीदों को एक और झटका लगा है।
कौन हैं आसाराम?
आसाराम का पूरा नाम आसुमल सिरुमलानी हरपलानी है। उनका जन्म 17 अप्रैल 1941 को हुआ था। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों में भी आश्रमों का नेटवर्क खड़ा किया था। धार्मिक प्रवचनों और आध्यात्मिक गतिविधियों के चलते उनके बड़ी संख्या में अनुयायी बने। हालांकि, समय के साथ उनके और उनके परिवार से जुड़े कई आपराधिक मामलों के सामने आने के बाद उनकी सार्वजनिक छवि पूरी तरह बदल गई।
2013 में हुई थी गिरफ्तारी
आसाराम को अगस्त 2013 में राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। मामला जोधपुर के पास स्थित उनके आश्रम से जुड़ा था, जहां एक नाबालिग लड़की ने उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, पीड़िता आश्रम में पढ़ाई कर रही थी और आरोप था कि आध्यात्मिक उपचार के बहाने उसे आसाराम के कमरे में ले जाया गया, जहां उसका यौन उत्पीड़न किया गया।
POCSO मामले में मिली उम्रकैद
शिकायत सामने आने के बाद राजस्थान पुलिस ने 31 अगस्त 2013 को आसाराम को गिरफ्तार कर लिया था। अप्रैल 2018 में जोधपुर की विशेष POCSO अदालत ने उन्हें नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी करार दिया। अदालत ने भारतीय दंड संहिता और POCSO कानून के तहत उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसी मामले में तीन अन्य आरोपियों को भी दोषी ठहराया गया था।
गुजरात में भी रेप मामले में दोषी
जोधपुर का मामला ही आसाराम के खिलाफ एकमात्र दुष्कर्म का मामला नहीं है। जनवरी 2023 में गुजरात के गांधीनगर की एक सेशंस कोर्ट ने उन्हें एक महिला अनुयायी से जुड़े दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया था। अभियोजन के अनुसार, महिला ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2001 में अहमदाबाद स्थित आश्रम में आसाराम ने उसके साथ दुष्कर्म किया और उसे गलत तरीके से बंधक बनाकर रखा।
गुजरात केस में भी सुनाई गई उम्रकैद
गांधीनगर की अदालत ने इस मामले में आसाराम को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उस समय वह राजस्थान के मामले में पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे, इसलिए गुजरात मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद भी उनकी हिरासत जारी रही। आसाराम के बेटे नारायण साईं को भी एक अलग दुष्कर्म मामले में दोषी ठहराया जा चुका है।
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