US Iran Conflict : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर बड़ा दावा किया है। ट्रंप का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष आगामी अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के तुरंत बाद समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह दावा ऐसे समय किया है, जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है और क्षेत्र में हमलों का सिलसिला जारी है।
ईरान पर चुनाव प्रभावित करने का आरोप
टेक्सास के डलास में आयोजित होने वाले रिपब्लिकन कन्वेंशन के लिए रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ईरान पर अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान चाहता है कि अमेरिका में कमजोर प्रशासन सत्ता में आए, ताकि उस पर दबाव कम हो और वह अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा सके।
कमजोर प्रशासन से ईरान को फायदा
ट्रंप के अनुसार, ईरान की कोशिश एक ऐसे अमेरिकी प्रशासन के गठन की है, जो उसके खिलाफ सख्त रुख न अपनाए। उन्होंने दावा किया कि तेहरान चाहता है कि भविष्य की अमेरिकी सरकार उसे अकेला छोड़ दे और परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ने की अनुमति दे। हालांकि, ट्रंप के ये दावे उनके राजनीतिक बयान के तौर पर सामने आए हैं।
ईरान के पास विकल्प सीमित होने का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि ईरान के पास अब ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं। उनका दावा है कि तेहरान लंबे समय तक मौजूदा संघर्ष जारी रखने की स्थिति में नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि सैन्य दबाव के कारण ईरान के सामने परिस्थितियां पहले की तुलना में काफी बदल चुकी हैं और आगे उसके लिए फैसले लेना मुश्किल हो सकता है।
फिलहाल बातचीत को लेकर जल्दबाजी नहीं
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ बातचीत शुरू करने को लेकर किसी जल्दबाजी में नहीं है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उनकी प्राथमिकता ईरान के साथ एक समझौता करने की थी, लेकिन अमेरिकी सैन्य अभियानों के बाद परिस्थितियां काफी बदल गई हैं। उनके मुताबिक, भविष्य में बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन फिलहाल अमेरिका इसके लिए सक्रिय प्रयास नहीं कर रहा है।
परमाणु समझौते से आगे होगी बातचीत
ट्रंप ने संभावित भविष्य की वार्ता को केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित रखने से भी इनकार किया। उन्होंने कहा कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत होती है तो कई अन्य मुद्दों को भी वार्ता की मेज पर लाया जा सकता है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका किसी संभावित समझौते में व्यापक सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों को शामिल करना चाहता है।
अमेरिका ने टैंकर हमलों की जिम्मेदारी ली
ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप ने हालिया हमलों की जिम्मेदारी भी स्वीकार की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब नौ जहाजों और टैंकरों को निशाना बनाया है। राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में इस तरह की सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है।
CENTCOM ने पांच ईरानी टैंकरों को बनाया निशाना
अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने मंगलवार को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स से जुड़े पांच ईरानी टैंकरों को निशाना बनाया। इससे पहले 5 सितंबर को भी तीन टैंकरों पर कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके साथ ही कुल नौ जहाजों के नष्ट होने का दावा किया गया है।
अमेरिकी नौसेना पर हमलों के बाद कार्रवाई
अमेरिका की ओर से इन कार्रवाइयों को पिछले 48 घंटों में अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत पर हुए कथित मिसाइल हमलों की प्रतिक्रिया बताया गया है। वहीं, ईरान ने भी अमेरिकी हमलों का जवाब देने की कोशिश की। 9 सितंबर को ईरान ने जॉर्डन स्थित मुवफ्फक साल्टी एयर बेस पर मिसाइलें दागीं। इस एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिकी बलों द्वारा किया जाता है।
संघर्ष के बीच बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ते सैन्य टकराव ने पश्चिम एशिया की स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। एक तरफ ट्रंप युद्ध समाप्त होने की संभावना जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दोनों पक्षों के बीच हमले जारी हैं। ऐसे में मिडटर्म चुनाव के बाद संघर्ष वास्तव में समाप्त होता है या नहीं, यह आने वाले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
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