Chhattisgarh Swine Flu : छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राजधानी रायपुर समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों में नए संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। पिछले दो दिनों के दौरान रायपुर में 38 और पूरे प्रदेश में 85 नए मरीज मिले हैं। इसके बाद स्वाइन फ्लू के एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 122 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
122 एक्टिव मरीजों का चल रहा इलाज
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस समय स्वाइन फ्लू के 122 एक्टिव मरीज हैं। इनमें से 32 मरीजों का उपचार होम आइसोलेशन में चल रहा है, जबकि 90 मरीज अस्पतालों में भर्ती हैं। अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ी है। हालांकि, फिलहाल स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और संक्रमित मरीजों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
आठ महीने में स्वाइन फ्लू से नहीं हुई मौत
प्रदेश के लिए राहत की बात यह है कि पिछले आठ महीनों में स्वाइन फ्लू से किसी मरीज की मौत दर्ज नहीं हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि संक्रमण का समय पर पता चलने और उचित उपचार मिलने पर मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना बेहतर रहती है। हालांकि, उपचार में देरी या लापरवाही की स्थिति में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डायबिटीज और कैंसर मरीजों को ज्यादा सावधानी
चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू का खतरा सभी लोगों को हो सकता है, लेकिन कुछ मरीजों के लिए इसका जोखिम अपेक्षाकृत अधिक रहता है। खासतौर पर डायबिटीज, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। बुजुर्गों को भी संक्रमण से बचाव के लिए भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी रखने और आवश्यक होने पर ही बाहर निकलने की सलाह दी जा रही है।
बाहर निकलते समय मास्क लगाने की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि जरूरी काम होने पर ही अस्पताल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाएं। बाहर निकलते समय मास्क लगाने और संक्रमण से बचाव के सामान्य उपाय अपनाने की सलाह दी गई है। यदि किसी व्यक्ति में बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे दूसरों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। समय पर जांच कराने से संक्रमण की पहचान और उपचार जल्दी शुरू किया जा सकता है।
सर्दी-खांसी और सांस की परेशानी पर जांच जरूरी
डॉक्टरों के मुताबिक वायरल फीवर के साथ लगातार सर्दी, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में परेशानी हो तो स्वाइन फ्लू की जांच करवानी चाहिए। राजधानी के आंबेडकर अस्पताल सहित कई निजी अस्पतालों में स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
मौसम बदलने पर मामलों में कमी की उम्मीद
चिकित्सकों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में मौसम में बदलाव होने और बारिश कम होने के बाद स्वाइन फ्लू के मामलों में कमी आ सकती है। फिलहाल अस्पतालों के आइसोलेशन वार्ड में मरीजों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग निगरानी व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। संक्रमित मरीजों की स्थिति पर नजर रखने के साथ लोगों को लगातार सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।
सावधानी और समय पर इलाज सबसे जरूरी
स्वास्थ्य अधिकारियों और डॉक्टरों के अनुसार स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए सतर्कता बेहद जरूरी है। लक्षण दिखाई देने पर समय पर जांच और चिकित्सकीय उपचार लेने से बीमारी को गंभीर होने से रोका जा सकता है। खास जोखिम वाले लोगों को संक्रमण के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। फिलहाल प्रदेश में मौत का आंकड़ा शून्य होना राहत की बात है, लेकिन बढ़ते नए मामलों को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है।
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