Railway Bonus 2026 : रेलवे कर्मचारियों के प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB) को लेकर अब एक नई मांग सामने आई है। इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर एसोसिएशन (IRTSA) ने केंद्र सरकार से गैर-राजपत्रित लेवल-1 कर्मचारियों के बोनस की गणना के लिए तय वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की है। संगठन चाहता है कि यह सीमा ₹18,000 बेसिक पे के साथ डियरनेस अलाउंस (DA) तक बढ़ाई जाए। लेवल-2 और उससे ऊपर के कर्मचारियों के लिए भी अलग और अधिक सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है।
वित्त और रेल मंत्रालय को भेजा गया पत्र
IRTSA ने 8 सितंबर 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र भेजकर अपनी मांग रखी। संगठन का कहना है कि PLB की मौजूदा ₹7,000 वेतन सीमा वर्ष 2014-15 में निर्धारित की गई थी। इसके बाद सातवां वेतन आयोग लागू हुआ और कर्मचारियों के वेतन के साथ DA में भी काफी बढ़ोतरी हुई। ऐसे में संगठन के अनुसार पुरानी सीमा वर्तमान वेतन ढांचे के अनुरूप नहीं रह गई है।
रेलवे कर्मचारियों को 78 दिनों का PLB मिलता है
रेलवे के गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को मिलने वाला PLB सामान्य केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों से अलग है। रेलवे कर्मचारियों के लिए बोनस की गणना 78 दिनों के वेतन के आधार पर की जाती है। IRTSA के अनुसार वर्तमान व्यवस्था में PLB करीब ₹17,951 बैठता है। वहीं ₹18,000 के न्यूनतम बेसिक पे को 78 दिनों की गणना में शामिल करने पर बोनस लगभग ₹46,184 हो सकता है।
बोनस में करीब ₹28 हजार का संभावित अंतर
संगठन के हिसाब से यदि ₹18,000 की नई सीमा स्वीकार होती है तो न्यूनतम स्तर के पात्र रेलवे कर्मचारियों के PLB में लगभग ₹28,233 का अंतर आ सकता है। हालांकि वास्तविक बोनस राशि कर्मचारी की पात्रता और उस समय लागू सरकारी आदेशों के आधार पर तय होगी। इसलिए प्रस्तावित गणना को फिलहाल संगठन की मांग के तौर पर देखा जाना चाहिए।
DA को शामिल करने की भी मांग
IRTSA ने अपने पत्र में DA को भी बोनस गणना के आधार में शामिल करने पर जोर दिया है। संगठन के मुताबिक 2014-15 में तय ₹7,000 की सीमा को प्रभावी रूप से संशोधित नहीं किया गया। उस समय के आधार और आज के 60 प्रतिशत DA को ध्यान में रखते हुए यह सीमा करीब ₹27,824 होनी चाहिए थी। इसके अलावा सातवें वेतन आयोग के बाद बदली वेतन संरचना को भी ध्यान में रखने की मांग की गई है।
करीब 12 लाख कर्मचारियों को मिल सकता है फायदा
IRTSA के सेक्रेटरी जनरल केवी रमेश के मुताबिक, यदि PLB सीमा बढ़ाने की मांग स्वीकार की जाती है तो लगभग 12 लाख रेलवे कर्मचारियों को इसका लाभ मिल सकता है। यह मांग ऐसे समय आई है, जब नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) भी बोनस सीमा बढ़ाने की मांग कर चुकी है। NC-JCM ने गैर-राजपत्रित कर्मचारियों के लिए सीमा ₹7,000 से बढ़ाकर ₹21,000 करने का प्रस्ताव दिया है।
रेलवे का बोनस अन्य कर्मचारियों से अलग
गैर-राजपत्रित ग्रुप सी और बी कर्मचारियों को आमतौर पर दशहरा के आसपास PLB दिया जाता है। मौजूदा ₹7,000 की सीमा के आधार पर पात्र केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 30 दिनों का बोनस करीब ₹6,908 बैठता है। रेलवे कर्मचारियों के लिए 78 दिनों की गणना होने के कारण उनका PLB पहले से ही अन्य केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में अधिक है।
रेलवे की बढ़ी उत्पादकता को बनाया आधार
IRTSA ने बोनस सीमा बढ़ाने के समर्थन में रेलवे की बढ़ी उत्पादकता का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार 2014-15 से 2024-25 के बीच रेलवे का फ्रेट नेट टन किलोमीटर करीब 42.32 प्रतिशत बढ़ा। यह आंकड़ा 6,82,612 मिलियन से बढ़कर 9,71,460 मिलियन हो गया। वहीं इसी अवधि में कर्मचारियों की संख्या 13.26 लाख से घटकर 12.99 लाख रह गई।
कम कर्मचारियों में ज्यादा आउटपुट का तर्क
संगठन का दावा है कि कर्मचारियों की संख्या घटने के बावजूद माल ढुलाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। IRTSA के अनुसार फ्रेट आउटपुट और गैर-राजपत्रित कर्मचारियों की संख्या के आधार पर आउटपुट-इनपुट अनुपात करीब 53.55 प्रतिशत बढ़ा। संगठन का तर्क है कि रेलवे की इस बढ़ी उत्पादकता का सीधा लाभ कर्मचारियों को PLB के रूप में मिलना चाहिए। अब नजर सरकार के फैसले पर है।
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