Abu Salem Release: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए गैंगस्टर अबू सलेम को लेकर बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने उसकी समय से पहले रिहाई की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। अबू सलेम ने अपनी सजा में मिलने वाली छूट यानी रिमिशन को आधार बनाते हुए रिहाई की मांग की थी। अदालत ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया है।
जुलाई में सुरक्षित रखा गया था फैसला
अबू सलेम की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद बीते 27 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखा गया था। सलेम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी समयपूर्व रिहाई की मांग को समय से पहले दाखिल की गई याचिका माना गया था। अब शीर्ष अदालत ने भी हाई कोर्ट के रुख पर अपनी मुहर लगा दी है।
25 साल की सजा पूरी होने का दिया था तर्क
अबू सलेम की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि सजा में मिलने वाली रिमिशन को जोड़ने के बाद वह 25 साल की सजा पूरी कर चुका है। इसी आधार पर उसने जेल से रिहा किए जाने की मांग की थी। उसके वकीलों का तर्क था कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उसे जेल में रखने का कोई आधार नहीं होना चाहिए।
हाई कोर्ट ने 2030 का बताया था समय
बॉम्बे हाई कोर्ट ने अबू सलेम की दलील को स्वीकार नहीं किया था। हाई कोर्ट के अनुसार उसकी 25 साल की सजा की अवधि वर्ष 2030 में पूरी होगी। इसी वजह से अदालत ने उसकी रिहाई की याचिका को समय से पहले दाखिल माना था। हाई कोर्ट के इसी फैसले के खिलाफ अबू सलेम सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी उसके पक्ष में फैसला नहीं दिया।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी कर चुका है याचिका खारिज
अबू सलेम को सुप्रीम कोर्ट से पहले भी राहत नहीं मिली है। इससे पहले अप्रैल महीने में भी शीर्ष अदालत ने उसकी एक याचिका खारिज कर दी थी। अब गुरुवार के फैसले के बाद उसकी समयपूर्व रिहाई की मौजूदा मांग पर भी न्यायिक स्तर पर उसे राहत नहीं मिली है। अदालत ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
1993 में मुंबई को दहलाने वाले थे धमाके
अबू सलेम 12 मार्च 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में दोषी है। उस दिन देश की आर्थिक राजधानी में एक के बाद एक 12 बड़े धमाके हुए थे। इन हमलों ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस भयावह आतंकी घटना में 250 से अधिक लोगों की जान चली गई थी, जबकि करीब 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
पुर्तगाल से भारत लाया गया था सलेम
मुंबई ब्लास्ट मामले में अबू सलेम को वर्ष 2005 में पुर्तगाल से भारत प्रत्यर्पित किया गया था। इसके बाद उसके खिलाफ मुंबई धमाकों से जुड़े मामले में कानूनी कार्रवाई चली। अदालत ने उसे इस मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद से वह जेल में सजा काट रहा है।
2030 तक जेल में रहने का रास्ता साफ
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मांग फिलहाल खारिज हो गई है। अदालत ने हाई कोर्ट के उस निष्कर्ष को सही माना है कि उसकी 25 साल की अवधि 2030 में पूरी होगी। ऐसे में रिमिशन को लेकर दी गई उसकी दलील के आधार पर तत्काल रिहाई का रास्ता नहीं बन पाया है। शीर्ष अदालत के फैसले से इस मामले में फिलहाल उसकी जेल से बाहर आने की उम्मीदों को झटका लगा है।
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