Sleep Schedule: हर दिन बदलता सोने का समय दिल के लिए कितना खतरनाक? जानिए हार्ट पर पड़ने वाला असर

अगर आप रोज अलग-अलग समय पर सोते हैं, तो यह आदत सिर्फ आपकी नींद ही नहीं, दिल की सेहत को भी प्रभावित कर सकती है। शोध में अनियमित नींद और हृदय रोग के जोखिम के बीच संबंध सामने आया है। आखिर कितना नुकसान होता है और सोने का सही तरीका क्या है, जानिए।

Sleep Schedule:  बदलती लाइफस्टाइल के बीच सोने और जागने का कोई तय समय न होना अब आम समस्या बनती जा रही है। कई लोग देर रात तक मोबाइल फोन चलाते रहते हैं और रात दो बजे या उसके बाद सोते हैं। इसके बाद सुबह देर से उठने की आदत उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल नींद की अवधि ही नहीं, बल्कि सोने और जागने का नियमित समय भी अच्छी सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक अनियमित नींद का असर हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।

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हर दिन अलग समय पर सोने से प्रभावित होती है बॉडी क्लॉक

हमारे शरीर में एक प्राकृतिक जैविक घड़ी होती है, जिसे सर्केडियन रिदम कहा जाता है। यह शरीर में नींद, जागने, हार्मोन के स्राव और कई अन्य प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाती है। जब कोई व्यक्ति कभी जल्दी और कभी बहुत देर से सोता है, तो उसकी यह प्राकृतिक लय प्रभावित हो सकती है। इससे नींद की गुणवत्ता और शरीर की सामान्य कार्यप्रणाली पर असर पड़ने की आशंका रहती है।

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अनियमित नींद का ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिज्म पर असर

नींद का पैटर्न लगातार बिगड़ा रहने पर शरीर में तनाव, हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। अनियमित नींद को मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसे जोखिम कारकों से जोड़ा गया है। ये सभी स्थितियां लंबे समय में हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए रोजाना पर्याप्त नींद लेने के साथ उसका समय भी नियमित रखना जरूरी माना जाता है।

वीकेंड पर भी बहुत ज्यादा न बदलें सोने का समय

कई लोग सप्ताह के दिनों में कम सोने के बाद छुट्टी वाले दिन देर तक सोकर अपनी नींद पूरी करने की कोशिश करते हैं। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन हर सप्ताह सोने और जागने के समय में बड़ा अंतर शरीर की नींद की लय को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों की सलाह है कि सप्ताहांत और छुट्टियों में भी सोने तथा जागने का समय लगभग समान रखने की कोशिश करनी चाहिए।

रात की शिफ्ट करने वालों को रखना चाहिए विशेष ध्यान

नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों के लिए नियमित नींद बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। इसी तरह देर रात तक काम करने वाले लोगों को भी अपने स्लीप शेड्यूल पर ध्यान देना चाहिए। समस्या एक-दो दिन देर से सोने की नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार अनियमित नींद की आदत बने रहने से हो सकती है। ऐसे लोगों को अपनी दिनचर्या में पर्याप्त आराम और नींद के लिए निश्चित समय निर्धारित करना चाहिए।

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वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद जरूरी

स्वस्थ वयस्कों को आमतौर पर हर रात करीब 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर को आराम और रिकवरी का पर्याप्त समय देती है। इसके लिए कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह भी निश्चित समय के आसपास उठें। यह आदत शरीर की प्राकृतिक नींद-जागने की लय को बनाए रखने में मदद कर सकती है।

सोने से पहले मोबाइल और कैफीन से बनाएं दूरी

बेहतर नींद के लिए रात में सोने से पहले मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे स्क्रीन डिवाइस का इस्तेमाल कम करना उपयोगी हो सकता है। देर शाम चाय, कॉफी या अन्य कैफीन वाले पेय लेने से भी बचना चाहिए, खासकर यदि इनसे नींद प्रभावित होती हो। शांत वातावरण, नियमित दिनचर्या और पर्याप्त नींद हृदय समेत संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

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Chandan Das

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