Hafiz Saeed: जम्मू की विशेष NIA अदालत ने लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और घोषित आतंकी हाफिज मोहम्मद सईद के खिलाफ एक बार फिर गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। यह मामला कश्मीर घाटी में सक्रिय आतंकियों तक कथित तौर पर हथियार, आर्थिक सहायता और निर्देश पहुंचाने से जुड़ा है। दो महीने से भी कम समय में अदालत की ओर से हाफिज सईद के खिलाफ यह दूसरा गैर-जमानती वारंट बताया जा रहा है।
कश्मीर में आतंकियों को मदद देने का आरोप
राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने अदालत के समक्ष कहा कि जांच के दौरान ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनके मुताबिक पाकिस्तान में मौजूद हाफिज सईद कथित तौर पर कश्मीर में सक्रिय आतंकियों को आर्थिक मदद, हथियार और निर्देश उपलब्ध करा रहा था। एजेंसी का आरोप है कि इस तरह की गतिविधियों के जरिए घाटी में आतंकी नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश की जा रही थी।
UAPA के तहत घोषित आतंकी है हाफिज सईद
जांच एजेंसी के अनुसार हाफिज सईद को गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी UAPA के तहत घोषित आतंकी किया जा चुका है। वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक भी है। NIA ने अदालत को बताया कि सईद वर्तमान में पाकिस्तान में मौजूद है और गिरफ्तारी से बचने के लिए भारतीय कानून की पहुंच से बाहर रह रहा है।
अदालत ने फरार आरोपी मानकर जारी किया वारंट
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी फरार है और जांच एजेंसी सामान्य कानूनी प्रक्रिया के जरिए उसकी अदालत में उपस्थिति सुनिश्चित नहीं कर सकी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने की अनुमति दी। साथ ही वारंट को कानूनी प्रक्रिया के तहत लागू कराने के लिए NIA जम्मू के DIG को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी से खुला मामला
यह पूरा मामला जम्मू-कश्मीर पुलिस की नाका चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी के बाद सामने आया था। गुजर टेंट, पांडाच इलाके में की गई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने संदिग्ध के कब्जे से एक चीनी ग्रेनेड और 15 जिंदा कारतूस बरामद किए थे। शुरुआती पूछताछ में आरोपी की पहचान श्रीनगर निवासी मोहम्मद नकीब भट के रूप में हुई थी।
UAPA और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज
मामले में जकोरा पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। जांच के दौरान आतंकवाद से जुड़े पहलुओं को भी सामने रखा गया है। पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत UAPA, आर्म्स एक्ट और एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट के प्रावधानों में मामला दर्ज किया है। एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।
जुलाई में भी जारी हुआ था गैर-जमानती वारंट
हाफिज सईद के खिलाफ इससे पहले जुलाई में भी जम्मू की विशेष NIA अदालत गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है। वह कार्रवाई पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े मामले में हुई थी। उस मामले में NIA ने हाफिज सईद को कथित तौर पर प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल बताया था। अब एक अन्य मामले में उसके खिलाफ फिर वारंट जारी होने से जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होती दिखाई दे रही है।
आतंकी नेटवर्क की फंडिंग और हथियारों पर जांच
ताजा मामले में जांच का फोकस कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क तक कथित आर्थिक सहायता, हथियार और निर्देश पहुंचाने की व्यवस्था पर है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पाकिस्तान में बैठे कथित संचालकों और घाटी में सक्रिय आतंकियों के बीच किस तरह संपर्क और संसाधनों का आदान-प्रदान किया जा रहा था।
पाकिस्तान में मौजूदगी से गिरफ्तारी की चुनौती
NIA के अनुसार हाफिज सईद के पाकिस्तान में होने के कारण उसकी गिरफ्तारी भारतीय जांच एजेंसी के लिए चुनौती बनी हुई है। अदालत से गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब एजेंसी के पास उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाने का एक और आधार है। इस मामले में आगे की जांच और अदालत की कार्यवाही पर नजर बनी रहेगी।
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