Sweet Potato Growing : आजकल घर में सब्जियां उगाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है। लोग बालकनी, छत और घर के छोटे-छोटे खाली स्थानों को किचन गार्डन में बदल रहे हैं। आमतौर पर गमलों में टमाटर, मिर्च, धनिया और दूसरी हरी सब्जियां उगाई जाती हैं। लेकिन सही तकनीक अपनाकर शकरकंद को भी गमले या ग्रो बैग में आसानी से उगाया जा सकता है। शकरकंद की बेल तेजी से फैलती है, जबकि इसकी खाने योग्य जड़ मिट्टी के अंदर विकसित होती है। इसलिए इसके लिए सही आकार का कंटेनर और उपयुक्त मिट्टी चुनना बेहद जरूरी है।
शकरकंद के लिए बीज नहीं, बेल की कटिंग उपयोगी
शकरकंद को सामान्य बीजों से उगाने के बजाय इसकी स्वस्थ बेल की कटिंग या अंकुर निकले हुए हिस्से से लगाया जाता है। पौधा लगाना बहुत मुश्किल नहीं है, लेकिन अच्छी पैदावार के लिए मिट्टी, धूप, पानी और गमले की गहराई का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। भारी और लगातार गीली मिट्टी शकरकंद की जड़ों के विकास में बाधा डाल सकती है। पहली बार इसे गमले में लगाने वालों को शुरुआत से ही सही तैयारी करनी चाहिए।
बड़ा गमला चुनें और मिट्टी को भुरभुरा रखें
शकरकंद की जड़ मिट्टी के अंदर फैलकर आकार लेती है। इसलिए इसके लिए कम से कम 18 से 24 इंच चौड़ा और करीब 15 से 18 इंच गहरा गमला लेना बेहतर माना जाता है। कपड़े वाला बड़ा ग्रो बैग भी इसके लिए उपयोगी विकल्प है। कंटेनर के नीचे पर्याप्त ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके।मिट्टी को हल्का और भुरभुरा रखने के लिए करीब 40 प्रतिशत सामान्य मिट्टी, 30 प्रतिशत कम्पोस्ट, 20 प्रतिशत रेत और 10 प्रतिशत कोकोपीट का मिश्रण तैयार किया जा सकता है। यदि गोबर की खाद इस्तेमाल कर रहे हैं तो वह पूरी तरह सड़ी हुई होनी चाहिए। ताजी खाद जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती है। गमले को बिल्कुल ऊपर तक न भरें और कुछ जगह खाली रखें, ताकि बाद में बेल के आसपास मिट्टी चढ़ाई जा सके।
स्वस्थ कटिंग लगाकर पौधे को दें पर्याप्त धूप
शकरकंद लगाने के लिए लगभग 20 से 25 सेंटीमीटर लंबी स्वस्थ बेल की कटिंग लें। इसमें कम से कम तीन से चार गांठें होना बेहतर है। कटिंग के निचले हिस्से के पत्ते हटाकर उसका कुछ भाग मिट्टी में दबा दें। बड़े कंटेनर में दो से तीन कटिंग पर्याप्त रहती हैं। कटिंग लगाने के बाद हल्का पानी दें, जिससे मिट्टी जड़ों के आसपास अच्छी तरह बैठ जाए।
रोजाना छह से आठ घंटे धूप है जरूरी
गमले को ऐसी जगह रखें जहां पौधे को प्रतिदिन करीब छह से आठ घंटे सीधी धूप मिल सके। पर्याप्त रोशनी न मिलने पर बेल तेजी से बढ़ सकती है, लेकिन मिट्टी के अंदर शकरकंद का विकास अपेक्षाकृत कमजोर रह सकता है। बेल फैलने लगे तो उसे जमीन पर फैलने दें या जगह कम होने पर जाली का सहारा देकर ऊपर चढ़ाया जा सकता है।
जरूरत के हिसाब से दें पानी, जलभराव से बचाएं
शकरकंद के पौधे की मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखना जरूरी है, लेकिन पानी जमा नहीं होना चाहिए। सिंचाई से पहले मिट्टी की ऊपरी परत को हाथ से जांच लें। अगर मिट्टी सूखी महसूस हो तभी पानी दें। गर्म मौसम में पानी जल्दी सूख सकता है, जबकि बारिश के दिनों में ड्रेनेज पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पौधा लगाने के 25 से 30 दिन बाद थोड़ी वर्मीकम्पोस्ट दी जा सकती है।
90 से 120 दिनों में तैयार हो सकती है फसल
बेल और पत्तियों पर कीड़े दिखाई देने पर नीम तेल का हल्का स्प्रे किया जा सकता है। समय-समय पर सूखे पत्तों को हटाते रहें। सामान्य परिस्थितियों में शकरकंद लगभग 90 से 120 दिनों में तैयार हो सकता है। जब पत्तियां पीली पड़ने लगें तो मिट्टी को किनारे से सावधानीपूर्वक हटाकर जड़ों का आकार देखा जा सकता है।
खुदाई से पहले पानी कम करना फायदेमंद
फसल निकालने से करीब एक सप्ताह पहले सिंचाई कम कर दें। शकरकंद निकालते समय जल्दबाजी न करें और नुकीले औजार का इस्तेमाल सावधानी से करें। खुदाई के दौरान जड़ों पर चोट लगने या शकरकंद कटने से बचना जरूरी है। सही गमला, भुरभुरी मिट्टी, पर्याप्त धूप और संतुलित पानी का ध्यान रखकर घर की बालकनी या छत पर भी अच्छी शकरकंद उगाई जा सकती है।
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