BRICS Summit 2026 : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक राष्ट्रीय भवन में हुई, जहां ईरानी राष्ट्रपति के साथ उनका उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहा। मुलाकात के दौरान भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को और मजबूत बनाने तथा द्विपक्षीय सहयोग को नई दिशा देने पर चर्चा हुई। सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई इस बैठक को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
BRICS Summit में हिस्सा लेने भारत पहुंचे ईरानी राष्ट्रपति
मसूद पेजेश्कियान भारत में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे हैं। राष्ट्रपति के तौर पर यह उनकी पहली भारत यात्रा है। इससे पहले शुक्रवार को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी अहम बैठक की थी। ऐसे समय में उनका भारत दौरा हो रहा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव और ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव के कारण क्षेत्रीय परिस्थितियां लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई हैं।
भारत-ईरान संबंधों के कई पहलुओं पर हुई बातचीत
राष्ट्रपति मुर्मू और पेजेश्कियान की बैठक में भारत-ईरान संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, क्षेत्रीय सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय जैसे विषय महत्वपूर्ण हैं। खास बात यह है कि दो सप्ताह से भी कम समय के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात बताई जा रही है, जो दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क को दर्शाती है।
पश्चिम एशिया की स्थिति पर भारत ने रखा अपना रुख
विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और ईरान के नेताओं ने पश्चिम एशिया में हालिया घटनाक्रम पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के उस रुख को दोहराया कि क्षेत्रीय विवादों और समस्याओं का समाधान बातचीत तथा कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता कायम करने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता पर भारत का जोर
बातचीत के दौरान भारत ने समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताया। भारतीय पक्ष ने नाविकों की सुरक्षा और उनके कल्याण पर भी जोर दिया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए खास महत्व रखती है, क्योंकि इन मार्गों का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
BRICS में ईरान की भागीदारी की मोदी ने सराहना की
प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद BRICS से संबंधित बैठकों में ईरान की नियमित उच्चस्तरीय भागीदारी के लिए आभार जताया। दोनों पक्षों ने माना कि BRICS ग्लोबल साउथ के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत का मानना है कि यह मंच लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
बिश्केक में भी हुई थी मोदी-पेजेश्कियान की मुलाकात
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और मसूद पेजेश्कियान इससे पहले 31 अगस्त को बिश्केक में भी मिले थे। उस बातचीत में मोदी ने कहा था कि भारत संघर्ष समाप्त करने की दिशा में किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन करता है। पेजेश्कियान ने भी भारत से आग्रह किया था कि वह विभिन्न पक्षों के साथ अपने व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करके उन्हें युद्ध और हिंसा के बजाय बातचीत तथा समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करे।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता
भारत और ईरान के बीच शुक्रवार को हुई बातचीत में भी जहाजों की निर्बाध आवाजाही के महत्व पर जोर दिया गया था। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य की कथित नाकेबंदी के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की चिंता बढ़ी है। यह मार्ग दुनिया के प्रमुख ऊर्जा परिवहन रास्तों में शामिल है। ऐसे में भारत की नजर क्षेत्रीय स्थिरता के साथ-साथ व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा पर भी बनी हुई है।
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