BRICS Summit 2026 : भारत की मेजबानी में नई दिल्ली में आयोजित BRICS Summit 2026 के बीच शनिवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और संयुक्त अरब अमीरात के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात हुई। दोनों नेताओं ने शिखर सम्मेलन से इतर आमने-सामने बातचीत की। यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और ईरान-अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी टकराव ने क्षेत्रीय परिस्थितियों को बेहद संवेदनशील बना दिया है।
पश्चिम एशिया में तनाव के बीच हुई दोनों नेताओं की बातचीत
ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर है। ऐसे माहौल में ईरान और यूएई के शीर्ष नेताओं की मुलाकात को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में किन विशेष मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी तत्काल सामने नहीं आई है। इसके बावजूद बहुपक्षीय BRICS मंच के दौरान हुई यह मुलाकात संवाद की संभावनाओं को लेकर महत्वपूर्ण संकेत देती है।
नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया पर जताई गई चिंता
BRICS देशों के नेताओं ने शनिवार को नई दिल्ली घोषणापत्र 2026 को सर्वसम्मति से मंजूरी दी। इसमें पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। घोषणापत्र में सभी संबंधित पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की गई। साथ ही नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर विशेष जोर दिया गया।
बातचीत और कूटनीति से समाधान निकालने पर BRICS का जोर
BRICS घोषणापत्र में पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए बातचीत, परामर्श और कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही गई। ऐसे में ईरान और यूएई के शीर्ष नेताओं की एक ही अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुलाकात को क्षेत्रीय तनाव कम करने के प्रयासों से जोड़कर देखा जा रहा है। भारत भी लगातार विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीतिक रास्ते को महत्वपूर्ण बताता रहा है।
ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच क्षेत्रीय समीकरण अहम
ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष अब छठे महीने में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों के बीच तनाव और गतिरोध लगातार बना हुआ है। इस व्यापक मध्य पूर्व संघर्ष में संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे समय में ईरानी राष्ट्रपति और यूएई के क्राउन प्रिंस की मुलाकात क्षेत्रीय समीकरणों और भविष्य की कूटनीतिक संभावनाओं के लिहाज से खास महत्व रखती है।
ईरान-यूएई संबंधों में कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं
मध्य पूर्व के मौजूदा संघर्ष में संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका को लेकर ईरान के साथ उसके संबंध जटिल रहे हैं। संघर्ष के दौरान यूएई की ओर से ईरान के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के दावे भी सामने आए हैं। अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा के अगले दिन भी ईरान पर हमले की बात कही गई थी। इन घटनाओं के दौरान अमेरिका और इजरायल के साथ समन्वय तथा खुफिया सहयोग की चर्चा भी सामने आई थी।
BRICS मंच पर मुलाकात से खुले संवाद के रास्ते
ईरान और यूएई दोनों ही पश्चिम एशिया की राजनीति में प्रभावशाली देश हैं, लेकिन क्षेत्रीय संघर्षों और सुरक्षा मुद्दों पर दोनों के रुख हमेशा समान नहीं रहे हैं। ऐसे में BRICS Summit 2026 के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की मुलाकात यह संकेत देती है कि तनावपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद बातचीत और कूटनीतिक संपर्क के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं।
भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है ईरान-यूएई कूटनीतिक घटनाक्रम
ईरान और यूएई दोनों के साथ भारत के रणनीतिक और आर्थिक संबंध हैं। ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, कनेक्टिविटी और पश्चिम एशिया में भारतीय हितों के लिहाज से दोनों देश नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण साझेदार हैं। ऐसे में BRICS सम्मेलन के दौरान क्षेत्रीय देशों के बीच संवाद और सहमति बनाने की कोशिश भारत की व्यापक कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत कर सकती है। नई दिल्ली का जोर लगातार बातचीत, सहयोग और शांतिपूर्ण समाधान पर रहा है।
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