CG Land Rules : छत्तीसगढ़ में बदलेंगे 1984 के भूमि उपयोग नियम, सरकार ने तैयार किया नया प्रस्ताव

छत्तीसगढ़ में करीब चार दशक पुराने भूमि उपयोग नियमों में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार ने 1984 में बने नियमों को बदलने के लिए नया प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव लागू होने के बाद जमीन के उपयोग और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं में बदलाव संभव है। जानिए सरकार की पूरी योजना क्या है।

CG Land Rules :  छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में विकास गतिविधियों को गति देने और भूमि उपयोग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आवास एवं पर्यावरण विभाग ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य भूमि उपयोग से संबंधित नियमों को अधिक स्पष्ट, सरल और व्यावहारिक बनाना है, ताकि नागरिकों, कारोबारियों और निवेशकों को अनावश्यक प्रक्रियात्मक बाधाओं का सामना न करना पड़े।

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नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था का प्रस्ताव

प्रस्तावित संशोधन में विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों के लिए ‘नेगेटिव लिस्ट’ आधारित व्यवस्था लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत उन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से चिन्हित किया जाएगा, जिन पर प्रतिबंध रहेगा। इसके अलावा अन्य गतिविधियों के लिए नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल करने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे भूमि उपयोग व्यवस्था अधिक व्यावहारिक और विकास के अनुकूल बन सकेगी।

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केंद्र के डीरिगुलेशन सुधारों से जुड़ा कदम

राज्य सरकार का प्रस्ताव केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन बोझ कम करने से जुड़े व्यापक सुधारों के अनुरूप बताया जा रहा है। इसका उद्देश्य नियमों को समाप्त करना नहीं, बल्कि उन्हें जरूरत के अनुसार अधिक प्रभावी और परिणामोन्मुख बनाना है। सरकार चाहती है कि विकास परियोजनाओं से जुड़े लोगों को स्पष्ट नियम मिलें और जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया में अनावश्यक जटिलता कम हो।

मुख्यमंत्री ने विकास अनुकूल माहौल पर दिया जोर

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार लगातार ऐसी नीतियों और व्यवस्थाओं पर काम कर रही है, जिससे नागरिकों, उद्यमियों और निवेशकों के लिए प्रक्रियाएं सरल हो सकें। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। भूमि उपयोग नियमों में प्रस्तावित संशोधन इसी सोच का हिस्सा है।

निवेश और रोजगार को मिल सकती है गति

मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रस्तावित बदलावों से बदलती जरूरतों के अनुरूप विकास गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सुविधा होगी। सरल और स्पष्ट भूमि उपयोग व्यवस्था से प्रदेश में निवेश के नए अवसर बनने की उम्मीद है। इसके साथ ही अधोसंरचना विकास और रोजगार सृजन को भी गति मिल सकती है। सरकार का मानना है कि बेहतर नियामकीय व्यवस्था राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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प्रतिबंधित गतिविधियों की सूची होगी स्पष्ट

आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि सरकार नियमन को पूरी तरह समाप्त करने के पक्ष में नहीं है। इसके बजाय नियमन को अधिक स्पष्ट, सरल, लचीला और परिणामोन्मुख बनाने का प्रयास किया जा रहा है। नेगेटिव लिस्ट व्यवस्था में प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा, जिससे लोगों को पहले से पता रहेगा कि किन कार्यों की अनुमति नहीं होगी।

अन्य गतिविधियों में कम होंगी नियामकीय बाधाएं

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रतिबंधित गतिविधियों के अलावा अन्य कार्यों के लिए अनावश्यक नियामकीय बाधाओं को कम करने की कोशिश की जाएगी। इससे भूमि के उपयोग को लेकर निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक हो सकती है। सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें विकास और नियमन के बीच संतुलन कायम रहे तथा जरूरी सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा सके।

मास्टर प्लान के भूमि उपयोग में बढ़ेगा लचीलापन

संशोधन के जरिए मास्टर प्लान में निर्धारित विभिन्न भूमि उपयोग श्रेणियों को भी अधिक लचीला और समयानुकूल बनाने का प्रयास किया जाएगा। सरकार का मानना है कि शहरों और विकास क्षेत्रों की जरूरतें समय के साथ बदलती रहती हैं। ऐसे में भूमि उपयोग नियमों को भी बदलती परिस्थितियों के अनुरूप व्यावहारिक बनाया जाना जरूरी है। नई व्यवस्था में प्रतिबंधित गतिविधियों की स्पष्टता के साथ अन्य उपयोगों को आसान बनाने पर जोर रहेगा।

15 दिनों में आपत्ति और सुझाव मांगे गए

प्रस्तावित संशोधन को लेकर सरकार ने नागरिकों और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए हैं। इसके लिए 15 दिनों की अवधि निर्धारित की गई है। इस दौरान प्राप्त सुझावों और आपत्तियों का परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद सरकार आवश्यक पहलुओं पर विचार करते हुए संशोधन प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।

विकास और भूमि उपयोग व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद

छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में प्रस्तावित संशोधन को राज्य में विकास गतिविधियों को सुगम बनाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य भूमि उपयोग से जुड़ी व्यवस्था को स्पष्ट और व्यावहारिक बनाते हुए बदलती जरूरतों के लिए आवश्यक लचीलापन उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद निवेश, अधोसंरचना और विकास परियोजनाओं के लिए प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत आसान होने की उम्मीद है।

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Chandan Das

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