CG News : रायपुर में राज्यपाल रमेन डेका ने डिजिटल एडिक्शन को मौजूदा दौर की सबसे खतरनाक लत बताया है। उन्होंने कहा कि तकनीक और डिजिटल माध्यमों का बढ़ता प्रभाव मानव जीवन और समाज दोनों को प्रभावित कर रहा है। आधुनिक विकास के लिए तकनीक जरूरी है, लेकिन इसका इस्तेमाल मानव हित को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से डिजिटल संसाधनों का संतुलित और सकारात्मक उपयोग करने की अपील की।
आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचे राज्यपाल
राज्यपाल रमेन डेका आईसीएफएआई विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समारोह में उन्होंने वर्ष 2025 और 2026 शैक्षणिक सत्र के विद्यार्थियों को संबोधित किया। राज्यपाल ने विद्यार्थियों को नई तकनीक के दौर की चुनौतियों और अवसरों के बारे में समझाया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी इंटरनेट युग में शिक्षा प्राप्त कर रही है, जबकि उनके समय में चॉक, पेंसिल, किताबों और गुरु के माध्यम से पढ़ाई होती थी।
AI के इस्तेमाल में मानव हित का ध्यान जरूरी
राज्यपाल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की बढ़ती उपयोगिता पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज AI विकास और नवाचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण तकनीक बन चुका है। हालांकि, इसका इस्तेमाल उतना ही किया जाना चाहिए, जितना मानव समाज के हित में आवश्यक हो। तकनीक का अत्यधिक या गलत इस्तेमाल मानव जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए AI के उपयोग के साथ जिम्मेदारी और संतुलन जरूरी है।
डिजिटल लत से विद्यार्थियों को सावधान रहने की सलाह
रमेन डेका ने विद्यार्थियों से डिजिटल एडिक्शन के दुष्प्रभावों से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों की लत कई दूसरी लतों की तुलना में अधिक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विद्यार्थियों को मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई, ज्ञान और कौशल विकास के लिए करना चाहिए। तकनीक को जीवन का साधन बनाया जाना चाहिए, जीवन का नियंत्रक नहीं।
सतत विकास के साथ चुनौतियों पर भी ध्यान जरूरी
राज्यपाल ने 21वीं सदी में विकास के साथ पर्यावरण और मानव जीवन से जुड़ी चुनौतियों को समझने पर जोर दिया। उन्होंने न्यूक्लियर एनर्जी, क्लाइमेट चेंज और माइक्रोप्लास्टिक को दुनिया के सामने मौजूद बड़ी चुनौतियों में शामिल बताया। उनका कहना था कि केवल आर्थिक और तकनीकी विकास पर्याप्त नहीं है। विकास ऐसा होना चाहिए, जिसमें पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को भी प्राथमिकता मिले।
भगवद्गीता के कर्मयोग का विद्यार्थियों को दिया संदेश
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भगवद्गीता के कर्मयोग का उदाहरण देते हुए जीवन में अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को इस बात की चिंता नहीं करनी चाहिए कि दूसरे उसके बारे में क्या सोचते हैं। विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई, लक्ष्य और जिम्मेदारियों पर ध्यान देकर निरंतर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्जित ज्ञान और डिग्री का वास्तविक उद्देश्य समाज के हित में योगदान देना है।
विज्ञान और तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन बेहतर बनाना
रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का ज्ञान समाज के लिए उपयोगी होना चाहिए। विज्ञान, तकनीक और इनोवेशन का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनने और सही दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि ज्ञान ऐसी पूंजी है, जिसे कोई व्यक्ति विद्यार्थियों से छीन नहीं सकता।
छत्तीसगढ़ को एजुकेशन हब बनाने की जरूरत
राज्यपाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाकर एक प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत, आत्मनिर्भर भारत और 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में समाज के हर वर्ग की भूमिका महत्वपूर्ण है।
नशे से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में योगदान की अपील
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से नशे से पूरी तरह दूर रहने और मानसिक एवं शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने जीवन का स्पष्ट रोडमैप तैयार करना चाहिए और योजनाबद्ध तरीके से अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ना चाहिए। स्वस्थ, शिक्षित और जिम्मेदार युवा ही देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
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