UP Shocking News : उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने परिवार के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोनौली कोतवाली क्षेत्र के कैथवलिया उर्फ बरगदही गांव की रहने वाली इसरावती नाम की महिला पांच साल पहले लापता हो गई थी। परिवार ने उसकी काफी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
परिवार ने जिस शव का किया अंतिम संस्कार
लापता होने के कुछ समय बाद कोल्हुई थाना क्षेत्र के एक खेत में एक अज्ञात महिला का क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ था। पुलिस ने शव की पहचान कराने के लिए इसरावती के परिजनों को बुलाया। बताया गया कि परिजनों ने शव की पहचान कपड़ों के आधार पर इसरावती के रूप में की थी। इसके बाद पुलिस ने शव परिवार को सौंप दिया और परिजनों ने उसे इसरावती का शव मानकर विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया।
पांच साल तक परिवार ने मान लिया था मृत
इसरावती के परिवार को विश्वास हो गया था कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है। समय बीतने के साथ परिवार ने भी उसकी यादों के साथ जीना सीख लिया था। लेकिन पांच साल बाद अचानक एक दिन इसरावती के सकुशल घर लौटने की खबर ने पूरे परिवार को स्तब्ध कर दिया। जिस महिला को परिवार मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर चुका था, वह अब उनके सामने जिंदा खड़ी थी।
मुंबई की संस्था के लोग महिला को लेकर पहुंचे घर
जानकारी के मुताबिक, इसरावती को मुंबई की एक संस्था के कुछ लोग लेकर उसके पैतृक गांव पहुंचे। महिला को अचानक घर पर देखकर परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार ने उसकी पहचान इसरावती के तौर पर की। महिला के वापस लौटने के बाद पांच साल पुरानी उस घटना को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिनका जवाब अब पुलिस जांच से ही मिल सकेगा।
पुलिस की पहचान प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि पांच साल पहले जिस अज्ञात महिला के शव को इसरावती का बताया गया था, आखिर वह कौन थी? यदि परिवार ने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान की थी तो पुलिस ने पहचान की पुष्टि के लिए अन्य जरूरी प्रक्रियाएं क्यों नहीं अपनाईं? अब यह भी जांच का विषय है कि उस समय शव की पहचान को लेकर पुलिस ने किस स्तर पर जांच की थी।
क्या किसी अपराध की शिकार थी मृत महिला?
इसरावती के जिंदा मिलने के बाद उस अज्ञात महिला की मौत भी रहस्य बन गई है। सवाल उठ रहा है कि खेत में मिला वह क्षत-विक्षत शव आखिर किस महिला का था। क्या वह किसी अपराध का शिकार हुई थी या उसकी मौत किसी अन्य परिस्थिति में हुई? यदि महिला की पहचान गलत तरीके से की गई थी तो उस समय उसके वास्तविक परिजनों तक शव क्यों नहीं पहुंच पाया, यह भी जांच का अहम बिंदु हो सकता है।
उच्चाधिकारियों की जांच पर टिकी निगाहें
फिलहाल इसरावती के घर लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है, लेकिन पुलिस विभाग के सामने कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना होगा कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर क्या कार्रवाई करते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि पांच साल पहले जिस महिला के शव का अंतिम संस्कार किया गया था, उसकी वास्तविक पहचान क्या थी और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई थी। मामले की निष्पक्ष जांच से ही इन सवालों के जवाब सामने आ पाएंगे।
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