CIA Bin Laden Report : अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 को हुए भीषण आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था। अलकायदा के सरगना ओसामा बिन लादेन के नेतृत्व में हुए इस हमले में न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर को निशाना बनाया गया था। अब सार्वजनिक किए गए अमेरिकी खुफिया दस्तावेजों से एक अहम जानकारी सामने आई है। दस्तावेजों के मुताबिक, 9/11 हमले से करीब तीन साल पहले ही लादेन भारत को अलकायदा के संभावित निशानों में शामिल कर चुका था।
CIA की फाइलों से सामने आई पुरानी खुफिया चेतावनी
अमेरिका ने हाल ही में केंद्रीय खुफिया एजेंसी यानी CIA से जुड़े 70 से अधिक प्रेसिडेंशियल डेली ब्रीफ सार्वजनिक किए हैं। इन दस्तावेजों को 9/11 हमलों की 25वीं बरसी से पहले जारी किया गया है। इन्हीं दस्तावेजों में 28 अगस्त 1998 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के लिए तैयार की गई एक खुफिया रिपोर्ट भी शामिल है। रिपोर्ट में ओसामा बिन लादेन के आतंकी नेटवर्क को लगातार गंभीर खतरा बताया गया था।
अलकायदा का नेटवर्क कई देशों तक फैल चुका था
खुफिया ब्रीफ में बताया गया था कि बिन लादेन के नेतृत्व वाला अलकायदा उस समय तक एक अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क तैयार कर चुका था। यह नेटवर्क दुनिया के कम से कम 60 देशों में फैला हुआ बताया गया था। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों को आशंका थी कि संगठन अलग-अलग देशों में हमले करने की क्षमता विकसित कर चुका है और आने वाले समय में उसका खतरा और बढ़ सकता है।
भारत समेत कई देशों पर हमले की आशंका
सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक, अलकायदा के संभावित निशानों में भारत का नाम भी शामिल था। खुफिया आकलन में कहा गया था कि बिन लादेन भारत, पाकिस्तान, मिस्र, सऊदी अरब, यमन, कुवैत, युगांडा और नाइजीरिया समेत कई देशों में हमले की योजना बना रहा था। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका पर 9/11 हमले से काफी पहले ही अलकायदा की गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुकी थीं।
1998 में अमेरिकी दूतावासों पर हुए थे बड़े धमाके
यह खुफिया चेतावनी अगस्त 1998 में केन्या और तंजानिया स्थित अमेरिकी दूतावासों पर हुए घातक बम धमाकों के कुछ सप्ताह बाद सामने आई थी। इन हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए थे। इन हमलों ने अलकायदा की बढ़ती आतंकी क्षमता को लेकर अमेरिका की चिंता काफी बढ़ा दी थी।
अमेरिका ने अफगानिस्तान में किया था मिसाइल हमला
अमेरिकी दूतावासों पर हमले के बाद अमेरिका ने अलकायदा के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की थी। अमेरिकी सेना ने अफगानिस्तान में संगठन के प्रशिक्षण शिविरों को मिसाइल हमलों के जरिए निशाना बनाया था। उस समय अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लगातार बिन लादेन और उसके नेटवर्क की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। हालांकि, अलकायदा की गतिविधियां इसके बाद भी जारी रहीं।
9/11 हमले ने बदल दी वैश्विक सुरक्षा नीति
करीब तीन साल बाद 11 सितंबर 2001 को अमेरिका में हुए हमलों ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान का स्वरूप बदल दिया। अलकायदा के आतंकियों ने अपहृत विमानों का इस्तेमाल करते हुए न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और अमेरिका के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया। इस हमले के बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ व्यापक सैन्य और खुफिया अभियान शुरू किया।
दस्तावेजों से सामने आई अलकायदा की पुरानी रणनीति
नए सार्वजनिक दस्तावेज यह दिखाते हैं कि अलकायदा केवल अमेरिका को निशाना बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि उसका नेटवर्क कई देशों में संभावित हमलों की योजना पर काम कर रहा था। भारत का नाम इस खुफिया आकलन में शामिल होना उस दौर में संगठन की वैश्विक गतिविधियों और उसके संभावित लक्ष्यों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण जानकारी माना जा रहा है। हालांकि, दस्तावेजों में बताई गई योजनाओं और उनके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर को लेकर अलग से जांच जरूरी है।
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