BRICS Summit : भारत की राजधानी नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के लिए दुनिया के कई प्रमुख देशों के नेता जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत विभिन्न राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि इस दो दिवसीय सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग, वैश्विक व्यवस्था और विकासशील देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। इसी बीच पाकिस्तान की BRICS सदस्यता का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में है।
2023 में पाकिस्तान ने किया था BRICS सदस्यता के लिए आवेदन
पाकिस्तान ने अगस्त 2023 में BRICS की पूर्ण सदस्यता के लिए आवेदन किया था। इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि संगठन के प्रभावशाली सदस्य चीन और रूस उसके प्रयास का समर्थन करेंगे। रूस ने बाद में सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान की सदस्यता की दावेदारी का समर्थन भी किया। चीन के साथ पाकिस्तान के पहले से मजबूत संबंध हैं और उसे बीजिंग का भी समर्थन हासिल रहा है। इसके बावजूद पाकिस्तान अभी तक BRICS का पूर्ण सदस्य नहीं बन सका है।
BRICS की शुरुआत आर्थिक सहयोग के विचार से हुई
पीआईबी के अनुसार, BRICS की अवधारणा पहली बार 2001 में सामने आई थी। उस समय गोल्डमैन सैक्स की रिपोर्ट The World Needs Better Economic BRICs में BRIC शब्द का इस्तेमाल किया गया था। बाद में 2009 में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने मिलकर औपचारिक समूह बनाया। इसका उद्देश्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना था।
दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने से BRIC बना BRICS
साल 2011 में दक्षिण अफ्रीका के समूह में शामिल होने के बाद BRIC का नाम बदलकर BRICS कर दिया गया। इसके बाद संगठन का लगातार विस्तार हुआ। 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात को नए पूर्ण सदस्यों के तौर पर शामिल किया गया। इसके बाद 2025 में इंडोनेशिया भी औपचारिक रूप से BRICS का सदस्य बना। विस्तार के साथ संगठन का आर्थिक और भौगोलिक प्रभाव काफी बढ़ा है।
पार्टनर कंट्री की नई श्रेणी से बढ़ा दायरा
BRICS के विस्तार के साथ पार्टनर कंट्री यानी साझेदार देशों की एक नई श्रेणी भी बनाई गई। वर्ष 2025 के दौरान बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाकिस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज्बेकिस्तान और वियतनाम समेत 10 देश इस व्यवस्था में शामिल हुए। ऐसे में पाकिस्तान के लिए भी इस समूह से जुड़ने की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन पूर्ण सदस्यता के रास्ते में महत्वपूर्ण अड़चन मौजूद है।
सर्वसम्मति का नियम पाकिस्तान के लिए बना बड़ी बाधा
BRICS में किसी नए देश को पूर्ण सदस्य बनाने के लिए मौजूदा सदस्यों की सर्वसम्मति जरूरी होती है। यानी किसी भी नए सदस्य को शामिल करने के लिए सभी वर्तमान सदस्यों की सहमति चाहिए। यही नियम पाकिस्तान की सदस्यता के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। चीन और रूस का समर्थन होने के बावजूद भारत की सहमति भी इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण है।
भारत-पाक तनाव के बीच सदस्यता पर सवाल
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाता रहा है। अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के संबंध और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। इसके बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया। ऐसे माहौल में पाकिस्तान की BRICS सदस्यता का मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया है।
BRICS सदस्यता से पाकिस्तान को मिल सकते हैं बड़े फायदे
यदि पाकिस्तान को BRICS की पूर्ण सदस्यता मिलती है तो उसे आर्थिक, कूटनीतिक और रणनीतिक स्तर पर लाभ मिलने की संभावना होगी। उसे इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, परिवहन और विकास परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक वित्तीय अवसर मिल सकते हैं। चीन और रूस के साथ उसके आर्थिक संबंध भी मजबूत हो सकते हैं। हालांकि, BRICS की सदस्यता अकेले पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर सकती।
ग्लोबल साउथ में बढ़ सकता है पाकिस्तान का प्रभाव
BRICS खुद को ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच के रूप में पेश करता है। ऐसे में पाकिस्तान को पूर्ण सदस्यता मिलने पर वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी स्थिति रखने के लिए बड़ा मंच मिल सकता है। हालांकि, मौजूदा भारत-पाक संबंधों और सर्वसम्मति के नियम को देखते हुए पाकिस्तान की पूर्ण सदस्यता का रास्ता फिलहाल आसान नजर नहीं आता।
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