Nandankanan Zoo : भुवनेश्वर के नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए दुखद खबर सामने आई है। शेरनी माया के दूसरे शावक की भी मौत हो गई है। यह नर शावक जन्म के महज तीन दिन बाद मृत पाया गया। इसके साथ ही माया से जन्मे दोनों शावकों की मौत हो चुकी है। घटना के बाद जू प्रबंधन और वन्यजीव प्रेमियों में निराशा का माहौल है।
7 सितंबर को माया ने दिया था दो शावकों को जन्म
जानकारी के मुताबिक, शेरनी माया ने पहली बार मां बनते हुए 7 सितंबर को दो शावकों को जन्म दिया था। दोनों शावकों के जन्म से जू प्रबंधन को उम्मीद थी कि नंदनकानन में शेरों की संख्या बढ़ेगी। हालांकि, जन्म के कुछ ही समय बाद मुश्किलें शुरू हो गईं। पहले शावक की जन्म के दिन ही मौत हो गई थी, जबकि दूसरा शावक तीन दिन तक ही जीवित रह सका।
दूसरे शावक को दूध पीने में हो रही थी परेशानी
दूसरे नर शावक की हालत जन्म के बाद से ही चिंताजनक बताई जा रही थी। वह अपनी मां का दूध सामान्य तरीके से नहीं पी पा रहा था। जब वह दूध पीने की कोशिश करता, तो दूध उसके मुंह से पेट में जाने के बजाय नाक के रास्ते बाहर निकल जाता था। इस समस्या के कारण उसे पर्याप्त मात्रा में पोषण नहीं मिल पा रहा था।
लगातार बिगड़ती गई शावक की हालत
दूध ठीक से नहीं पी पाने के कारण शावक को आवश्यक पोषण नहीं मिल सका। धीरे-धीरे उसकी स्थिति खराब होती चली गई। जू प्रबंधन की ओर से उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही थी, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। जन्म के तीसरे दिन शावक ने दम तोड़ दिया। इसके साथ ही माया के दोनों नवजात बच्चों की मौत हो गई।
पोस्टमार्टम में सामने आई जन्मजात बीमारी
शावक की मौत के बाद किए गए पोस्टमार्टम में उसकी मौत की एक प्रमुख वजह जन्मजात क्लेफ्ट पैलेट बताई गई। क्लेफ्ट पैलेट ऐसी जन्मजात स्थिति है, जिसमें मुंह के ऊपरी हिस्से का विकास सामान्य तरीके से नहीं हो पाता। इस स्थिति में नवजात के लिए दूध को ठीक से निगलना मुश्किल हो सकता है और दूध नाक के रास्ते बाहर निकलने की समस्या भी हो सकती है।
दूध नाक से निकलने की समस्या से जुड़ा था मामला
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई स्थिति शावक में देखी गई समस्या से मेल खाती है। वह मां का दूध पीने की कोशिश तो कर रहा था, लेकिन दूध सही तरीके से निगल नहीं पा रहा था। इसके चलते शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिल सका। विशेषज्ञों के अनुसार, नवजात शावकों के लिए शुरुआती दिनों में पर्याप्त दूध मिलना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
पहली बार मां बनी थी शेरनी माया
माया के लिए यह पहली बार था जब उसने शावकों को जन्म दिया था। पहली डिलीवरी होने के कारण नवजातों की देखभाल उसके लिए नया अनुभव था। शावकों के जन्म के बाद मां और बच्चों के बीच प्राकृतिक मातृत्व व्यवहार विकसित होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, दोनों शावकों की शुरुआती मौत के कारण माया उन्हें लंबे समय तक पाल नहीं सकी।
दोनों बच्चों को खो चुकी है माया
7 सितंबर को दो शावकों को जन्म देने वाली माया अब अपने दोनों बच्चों को खो चुकी है। पहले शावक की जन्म के दिन मौत हुई और दूसरे ने तीन दिन बाद दम तोड़ दिया। यह घटना माया के लिए भी एक दुखद अनुभव है। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में इस घटना के बाद शावकों की मौत के कारणों और उनकी देखभाल से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
कानपुर जू से भी सामने आया था शेरनी-हिप्पो बदलाव
इससे पहले उत्तर प्रदेश के कानपुर जू से भी वन्यजीवों से जुड़ी खबर सामने आई थी। जानकारी के अनुसार, कानपुर जू का हिप्पो सतीश इंदौर भेजे जाने की योजना है और इसके बदले शेरनी वीरा को कानपुर लाए जाने की बात सामने आई थी। ऐसे वन्यजीव आदान-प्रदान का उद्देश्य चिड़ियाघरों में प्रजातियों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों को मजबूत करना होता है।
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