Manipur Violence : मणिपुर में हिंसा की ताजा घटनाओं के बाद एक बार फिर तनाव का माहौल बन गया है। तामेंगलॉन्ग और नोनी जिलों में संदिग्ध उग्रवादियों के हमलों में दो महिलाओं समेत चार लोगों की मौत हो गई। इन घटनाओं के एक दिन बाद सोमवार को राज्य के गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी हिंसक घटना को मणिपुर में शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशों को पटरी से उतारने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा पर सरकार सख्त
गृह मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना को लेकर दुख जताया। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाकर की गई हिंसा पूरी तरह अस्वीकार्य है और ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को घटनाओं के पीछे के तथ्यों का पता लगाने, आरोपियों की पहचान करने और बिना किसी भय या पक्षपात के कानून लागू करने के निर्देश दिए हैं।
टॉलेन कुकी गांव में घर में घुसकर फायरिंग
पहली घटना इम्फाल को जिरीबाम से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-37 के पास स्थित टॉलेन कुकी गांव में हुई। जानकारी के अनुसार, संदिग्ध उग्रवादियों ने एक घर में घुसकर गोलीबारी की। हमले में ल्हिंगजांगई सिंगसित की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, उनके पति सेइनेह सिंगसित और नवजात बच्चे को गंभीर चोटें आईं।
अस्पताल ले जाते समय पति ने तोड़ा दम
हमले में घायल सेइनेह सिंगसित की हालत गंभीर बताई गई। उन्हें इलाज के लिए असम के सिलचर अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। इस घटना ने इलाके में दहशत और तनाव बढ़ा दिया। सुरक्षा एजेंसियां हमले के पीछे शामिल संदिग्धों की तलाश में जुटी हैं।
लोंगपी गांव में भी हुई अंधाधुंध गोलीबारी
दूसरी वारदात नोनी जिले के नुंगबा थाना क्षेत्र के लोंगपी गांव में सामने आई। बताया गया कि रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सशस्त्र हमलावरों ने कथित तौर पर अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में एक महिला और एक पुरुष की गोली लगने से मौत हो गई। लगातार हुई इन घटनाओं के बाद संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
दोषियों को कानून के तहत जवाबदेह बनाने का संदेश
गृह मंत्री गोविंददास कोंथौजम ने कहा कि शांति भंग करने वाले अपराधियों का कानून के तहत पीछा किया जाएगा और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार न्याय और शांति की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में हालिया हिंसा के कारण सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिशों को चुनौती मिल रही है।
13 सितंबर को मनाया जाता है कुकी ब्लैक डे
रविवार को हुई हिंसा इसलिए भी संवेदनशील मानी जा रही है क्योंकि 13 सितंबर को कुकी समुदाय ‘साहनिट नी’ यानी ब्लैक डे के रूप में मनाता है। यह दिन 1990 के दशक में हुए कुकी-नागा जातीय संघर्ष के दौरान मारे गए लोगों की याद में मनाया जाता है। इस दिन को लेकर हर साल समुदाय की ओर से स्मरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
1993 की हिंसा से जुड़ा है ब्लैक डे
कुकी समुदाय के अनुसार, 13 सितंबर 1993 को जातीय संघर्ष के दौरान एक ही दिन बड़ी संख्या में कुकी ग्रामीणों की हत्या हुई थी। इस घटना को जौपी नरसंहार के नाम से भी जाना जाता है। इसी त्रासदी की याद में 13 सितंबर को ‘साहनिट नी’ मनाया जाता है। इस कारण इस अवधि में संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जाती है।
मई 2023 से जारी है जातीय संघर्ष
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय संघर्ष जारी है। मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग और कुकी समुदाय के विरोध के बीच हिंसा भड़की थी। इसके बाद से अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अपने घरों से विस्थापित हुए हैं।
सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद चुनौतियां बरकरार
राज्य और केंद्र सरकार ने संवेदनशील पहाड़ी तथा घाटी क्षेत्रों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और भारतीय सेना की तैनाती की है। इसके बावजूद सीमावर्ती इलाकों में छिटपुट गोलीबारी, ड्रोन हमले और नागरिकों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। ताजा हत्याओं के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने शांति बहाली की चुनौती एक बार फिर बढ़ गई है।
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