Heart Patients Exercise : नियमित एक्सरसाइज शरीर को फिट रखने और कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है। हालांकि, हार्ट से जुड़ी बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए हर तरह का वर्कआउट सुरक्षित या उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है। ऐसे लोगों को अपनी बीमारी, उम्र, फिटनेस और डॉक्टर की सलाह के आधार पर एक्सरसाइज का चुनाव करना चाहिए। गलत तरीके से या जरूरत से ज्यादा व्यायाम करने से परेशानी बढ़ सकती है।
डॉक्टर ने बताया हार्ट के लिए सही वर्कआउट
साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक और एमबीबीएस, एमडी डॉक्टर बिमल छाजेर ने अपने यूट्यूब वीडियो में हार्ट हेल्थ और एक्सरसाइज से जुड़े सुझाव साझा किए हैं। उनके अनुसार, दिल के मरीजों को ऐसी गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए, जिनसे शरीर एक्टिव रहे और व्यायाम की तीव्रता नियंत्रित तरीके से बढ़े। किसी भी नए वर्कआउट को शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
कार्डियो एक्सरसाइज हो सकती है उपयोगी
वॉकिंग, साइकिलिंग, स्विमिंग और हल्की जॉगिंग जैसी एरोबिक गतिविधियां कार्डियो एक्सरसाइज की श्रेणी में आती हैं। इन गतिविधियों से हृदय गति नियंत्रित तरीके से बढ़ सकती है और नियमित अभ्यास से कार्डियोवैस्कुलर फिटनेस बेहतर हो सकती है। डांसिंग भी एक प्रकार की एरोबिक गतिविधि हो सकती है। हालांकि, हार्ट मरीजों को एक्सरसाइज की गति और अवधि अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तय करनी चाहिए।
वॉकिंग को बनाया जा सकता है रूटीन का हिस्सा
हार्ट से जुड़ी समस्या वाले कई लोगों के लिए हल्की से मध्यम गति की वॉकिंग एक आसान गतिविधि हो सकती है। नियमित पैदल चलने से शरीर सक्रिय रहता है और फिटनेस बनाए रखने में मदद मिल सकती है। शुरुआत हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार करनी चाहिए और धीरे-धीरे समय या गति बढ़ानी चाहिए। अगर चलते समय सीने में दर्द, सांस फूलना या चक्कर जैसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत रुककर चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
साइकिलिंग और स्विमिंग भी हो सकते हैं विकल्प
साइकिलिंग और स्विमिंग जैसी गतिविधियां भी कार्डियो फिटनेस सुधारने में मदद कर सकती हैं। लेकिन हार्ट मरीजों के लिए इनका चुनाव बीमारी की गंभीरता और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है। खासतौर पर जिन लोगों को हाल में हार्ट अटैक, सर्जरी या अन्य गंभीर हृदय संबंधी समस्या हुई हो, उन्हें बिना चिकित्सकीय अनुमति के व्यायाम शुरू नहीं करना चाहिए।
मसल्स स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में रखें सावधानी
वेट लिफ्टिंग, पुश-अप्स और स्क्वाट्स जैसी एक्सरसाइज मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने के लिए उपयोगी मानी जाती हैं। स्वस्थ लोगों के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग फिटनेस का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। हालांकि, हार्ट मरीजों में भारी वजन उठाने या बहुत ज्यादा जोर लगाने वाली एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। एक्सरसाइज के दौरान अचानक ज्यादा मेहनत करना कुछ लोगों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।
योग भी हो सकता है मददगार
योग में सांस लेने की तकनीक, स्ट्रेचिंग और शरीर को नियंत्रित करने वाली कई गतिविधियां शामिल होती हैं। हार्ट मरीजों के लिए हल्के और चिकित्सकीय रूप से उपयुक्त योग अभ्यास तनाव कम करने और शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, कठिन आसन या लंबे समय तक सांस रोकने वाले अभ्यास बिना विशेषज्ञ मार्गदर्शन के नहीं करने चाहिए।
एक्सरसाइज से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी
हार्ट की बीमारी वाले हर व्यक्ति की स्थिति अलग होती है। इसलिए किसी दूसरे व्यक्ति के वर्कआउट को देखकर उसे अपनाना सही नहीं माना जाता। एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेकर यह समझना जरूरी है कि कौन-सी गतिविधि, कितनी अवधि और कितनी तीव्रता तक की जा सकती है। सही निगरानी में किया गया व्यायाम दिल की सेहत और फिटनेस को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है।
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