UK Breakup : एक समय ब्रिटिश साम्राज्य का दुनिया के बड़े हिस्से पर प्रभाव था। ब्रिटेन ने कई देशों पर शासन किया और लंबे समय तक वैश्विक राजनीति में प्रमुख शक्ति बना रहा। लेकिन अब उसी यूनाइटेड किंगडम के सामने संवैधानिक एकता को लेकर नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में अधिक स्वायत्तता तथा भविष्य को लेकर अलग-अलग विकल्पों पर चर्चा तेज हो गई है। इससे ब्रिटेन के संभावित बंटवारे की अटकलें भी बढ़ी हैं।
तीन क्षेत्रों के नेताओं ने मिलकर किया बड़ा समझौता
मामला तब और चर्चा में आया जब स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेताओं ने सोमवार को वेल्स की राजधानी कार्डिफ में मुलाकात की। बैठक के बाद तीनों क्षेत्रों के नेताओं ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के जरिए संवैधानिक बदलाव और अपने-अपने क्षेत्रों के लिए अधिक अधिकारों की मांग को प्रमुखता से उठाया गया है। नेताओं के इस कदम को ब्रिटेन की मौजूदा संवैधानिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
वेस्टमिंस्टर को दिया गया संवैधानिक बदलाव का संदेश
तीनों क्षेत्रों के नेताओं ने ब्रिटेन की केंद्र सरकार और संसद को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि अब संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। समझौते में ब्रिटिश संसद यानी वेस्टमिंस्टर की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। नेताओं का कहना है कि इन क्षेत्रों के लोगों के भविष्य और उनकी राजनीतिक आकांक्षाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यूरोपीय संघ के साथ भविष्य के रिश्ते को लेकर भी इन क्षेत्रों में अलग-अलग राजनीतिक विचार सामने आते रहे हैं।
स्कॉटलैंड की आजादी पर फिर जनमत संग्रह की चर्चा
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में सांसदों के सामने कहा था कि यदि पर्याप्त राजनीतिक सहमति बनती है तो स्कॉटलैंड की स्वतंत्रता पर एक और जनमत संग्रह की अनुमति देने पर विचार किया जा सकता है। स्कॉटलैंड पहले भी स्वतंत्रता के सवाल पर जनमत संग्रह करा चुका है। ऐसे में दोबारा मतदान की संभावना ब्रिटेन की एकता को लेकर चल रही बहस को और महत्वपूर्ण बना देती है।
उत्तरी आयरलैंड के पास पहले से मौजूद है संवैधानिक अधिकार
उत्तरी आयरलैंड का मामला स्कॉटलैंड से कुछ अलग है। गुड फ्राइडे एग्रीमेंट के तहत उत्तरी आयरलैंड के लोगों को आयरलैंड गणराज्य के साथ एकीकरण के सवाल पर जनमत संग्रह का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि ऐसा मतदान तभी कराया जा सकता है जब परिस्थितियों से यह संकेत मिले कि उत्तरी आयरलैंड की जनता ब्रिटेन से अलग होकर आयरलैंड के साथ जुड़ने के पक्ष में हो सकती है।
पहली बार तीनों क्षेत्रों में आजादी समर्थक दल सत्ता में
इस पूरे घटनाक्रम की खास बात यह है कि वर्तमान समय में स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में स्वतंत्रता या अधिक स्वायत्तता की मांग करने वाली राजनीतिक ताकतें सत्ता में प्रभावशाली भूमिका निभा रही हैं। ये दल अपने-अपने क्षेत्रों के लिए ज्यादा अधिकार और निर्णय लेने की स्वतंत्रता की मांग कर रहे हैं। इससे ब्रिटिश सरकार पर संवैधानिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा है।
ट्रंप के बयान ने बढ़ाई ब्रिटिश सरकार की चिंता
ब्रिटेन की मुश्किलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान भी चर्चा में है। आयरलैंड की यात्रा के दौरान ट्रंप ने कहा था कि वह संयुक्त आयरलैंड को देखना पसंद करेंगे। उन्होंने उत्तरी आयरलैंड के आयरलैंड के साथ एकीकरण को सकारात्मक कदम बताया। ट्रंप के इस रुख को ब्रिटेन के लिए संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे पर बाहरी दबाव के तौर पर देखा जा रहा है।
ब्रिटेन की एकता पर आगे क्या होगा?
स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड में बढ़ती स्वायत्तता की मांग ने ब्रिटेन की संवैधानिक राजनीति को नए मोड़ पर ला दिया है। हालांकि इन क्षेत्रों का अलग होना अभी निश्चित नहीं है, लेकिन जनमत संग्रह, संवैधानिक सुधार और अधिक अधिकारों की मांग ने यूनाइटेड किंगडम की एकता पर बहस जरूर तेज कर दी है। आने वाले समय में ब्रिटिश सरकार का रुख इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।
Read More : Stock Market Today : शेयर बाजार ने तेजी के साथ शुरू किया कारोबार, आईटी स्टॉक्स रॉकेट, सेंसेक्स 400 अंक उछला