Dhaka University : बांग्लादेश की राजधानी ढाका स्थित ढाका विश्वविद्यालय में सोमवार को तस्वीरों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। विश्वविद्यालय के नए सिरे से तैयार किए गए DUCSU संग्रहालय में पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना और जमात-ए-इस्लामी के पूर्व प्रमुख गुलाम आजम की तस्वीरें लगाए जाने का आरोप सामने आया। इससे नाराज छात्रों ने दोनों की तस्वीरें फाड़कर वहां से हटा दीं। प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि संग्रहालय में बदलाव के जरिए विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक और राजनीतिक संदर्भ को बदलने की कोशिश की गई है।
छात्र संगठन शिबिर पर तस्वीरें लगाने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि जमात-ए-इस्लामी की छात्र इकाई इस्लामी छात्र शिबिर की अगुवाई में DUCSU संग्रहालय में ये तस्वीरें लगाई गईं। छात्रों के अनुसार, संग्रहालय के पुराने रिकॉर्ड और तस्वीरों में बदलाव किए गए हैं। उनका कहना है कि ढाका विश्वविद्यालय का इतिहास बांग्लादेश के भाषा आंदोलन और स्वतंत्रता संग्राम से गहराई से जुड़ा रहा है, इसलिए प्रदर्शनी में ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को दिखाने को लेकर विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
1971 के इतिहास को लेकर छात्रों में नाराजगी
गुलाम आजम को लेकर भी छात्रों में तीखी नाराजगी देखने को मिली। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से जुड़े युद्ध अपराधों का दोषी बताया। उनका कहना है कि ऐसे व्यक्ति की तस्वीर को विश्वविद्यालय के संग्रहालय में प्रमुखता देना स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और उसके पीड़ितों के प्रति असम्मान के समान है। इसी मुद्दे को लेकर छात्रों ने तस्वीरें हटाने की मांग की।
मोहम्मद अबू तैयब ने फाड़ी तस्वीरें
2025 में DUCSU के उपाध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके मोहम्मद अबू तैयब भी विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। उन्होंने संग्रहालय में लगी जिन्ना और गुलाम आजम की तस्वीरें फाड़ दीं। इसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के छात्र संगठन और वामपंथी छात्र संगठनों के कार्यकर्ता भी विरोध में शामिल हो गए। प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूरे मामले की जांच की मांग की।
‘हम 1971 और भाषा आंदोलन नहीं भूले’
मोहम्मद अबू तैयब ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि छात्र 1971 के मुक्ति संग्राम और भाषा आंदोलन के इतिहास को नहीं भूले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि DUCSU संग्रहालय में ऐसे व्यक्ति की तस्वीरें क्यों लगाई गईं, जिसे छात्र समुदाय ऐतिहासिक रूप से विरोधी भूमिका से जोड़ता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या DUCSU के घोषणापत्र में जिन्ना को नायक के तौर पर प्रस्तुत करने का कोई फैसला लिया गया था।
जिन्ना की तीन तस्वीरें, मुजीब की तस्वीर हटाने का आरोप
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक संग्रहालय में मोहम्मद अली जिन्ना की तीन तस्वीरें लगाई गई थीं। इसके विपरीत, बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान की अलग तस्वीरें वहां से हटा दी गई थीं। छात्रों ने इसे संग्रहालय के ऐतिहासिक स्वरूप में जानबूझकर किया गया बदलाव बताया और प्रशासन से जवाब मांगा।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्रवाई का दिया भरोसा
ढाका विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी के उप निदेशक फर्रुख महमूद ने कहा कि परिसर में ऐसे व्यक्तियों की तस्वीरें प्रदर्शित करना स्वीकार्य नहीं है, जिनकी गतिविधियों का संबंध भाषा आंदोलन और बांग्लादेश की स्वतंत्रता के इतिहास से मेल नहीं खाता। उन्होंने कहा कि मामले के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होने पर उनके खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
रिनोवेशन के बाद दोबारा खुला था DUCSU संग्रहालय
DUCSU संग्रहालय को मरम्मत और नवीनीकरण के बाद रविवार को दोबारा खोला गया था। इसके बाद वहां प्रदर्शित सामग्री में कई बदलाव दिखाई दिए। सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर हुई कि बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन के नायक शेख मुजीबुर रहमान की अलग तस्वीरें कथित तौर पर हटा दी गईं और उनकी जगह जिन्ना की तीन तस्वीरें दिखाई दीं। इसी बदलाव ने सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में राजनीतिक और छात्र विरोध को जन्म दिया।
तस्वीरों का विवाद बना विश्वविद्यालय में बड़ा राजनीतिक मुद्दा
इस घटनाक्रम के बाद ढाका विश्वविद्यालय में इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम और छात्र राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है। छात्र संगठनों ने संग्रहालय में किए गए बदलावों की समीक्षा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई का संकेत दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि संग्रहालय की प्रदर्शनी को लेकर प्रशासन आगे क्या फैसला करता है।
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