Jammu News : जम्मू में रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी वाले इलाकों में प्रशासनिक जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। जमीन मालिकों को नोटिस जारी किए जाने के बाद कई स्थानों पर अस्थायी शेड और दुकानों में रह रहे परिवारों ने अपने ठिकाने खाली करना शुरू कर दिया है। सामने आई तस्वीरों में कुछ लोग कपड़े, घरेलू सामान और रोजमर्रा की जरूरत की अन्य चीजें वाहनों में रखते हुए दिखाई दिए। इससे इलाके में प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
फिलहाल सीधे बुलडोजर कार्रवाई की जानकारी नहीं
इस कार्रवाई की एक महत्वपूर्ण बात यह है कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित स्थानों पर प्रशासन या पुलिस की ओर से फिलहाल सीधे बुलडोजर चलाकर अस्थायी ढांचे गिराने की कार्रवाई नहीं की गई है। नोटिस मिलने के बाद जमीन मालिकों ने वहां रह रहे परिवारों से जगह खाली करने के लिए कहा। इसके बाद कई परिवारों ने अपने सामान को समेटकर वहां से निकलना शुरू किया।
जम्मू के कई इलाकों में मौजूदगी की रिपोर्ट
जम्मू शहर और इसके आसपास के कई क्षेत्रों में रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी की रिपोर्ट समय-समय पर सामने आती रही है। नरवाल, भटिंडी, सुंजवां और बहू फोर्ट जैसे इलाकों का नाम इस संदर्भ में लिया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त लद्दाखी कॉलोनी, अपर ठठेर, पूंछ कॉलोनी, गुड़ा ब्राह्मणा और चिनौर में भी रोहिंग्या परिवारों की मौजूदगी की जानकारी सामने आई है।
नरवाल बस्ती का समिति ने किया था निरीक्षण
नरवाल इलाके में स्थित एक रोहिंग्या बस्ती का अगस्त में केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया था। समिति ने अपने दौरे के दौरान अलग-अलग समुदायों और संगठनों के प्रतिनिधियों से बातचीत की। इस दौरान जम्मू में जनसांख्यिकीय बदलाव और उससे जुड़े विभिन्न मुद्दों के संबंध में जानकारी जुटाई गई।
रोहिंग्या आबादी के सरकारी आंकड़ों में अंतर
रोहिंग्या आबादी को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आते रहे हैं। अगस्त में केंद्र की उच्चस्तरीय समिति को जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 7,656 रोहिंग्या और 504 बांग्लादेशी नागरिक चिन्हित किए गए थे। इन आंकड़ों के अनुसार जम्मू संभाग के 10 जिलों में 6,737 रोहिंग्या और 46 बांग्लादेशी नागरिक दर्ज थे।
जम्मू और सांबा को लेकर पहले अलग आंकड़े
इससे पहले सरकारी सूत्रों पर आधारित कुछ रिपोर्टों में जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या तथा बांग्लादेशी नागरिकों की संयुक्त संख्या 13,700 से अधिक बताई गई थी। अलग-अलग आंकड़ों के सामने आने की वजह से इस मामले में संख्या का उल्लेख करते समय संबंधित सरकारी रिकॉर्ड, सर्वेक्षण और समय अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है। इससे आंकड़ों के बीच अंतर को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
केंद्र की समिति के दायरे में भी मामला
जम्मू में रोहिंग्या बस्तियों से जुड़ा मुद्दा अब केंद्र सरकार की उच्चस्तरीय समिति की जांच के दायरे में भी है। समिति ने अगस्त में जम्मू का तीन दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ बैठकें की गईं। इसके अलावा समिति के सदस्यों ने जगती टाउनशिप और नरवाल स्थित रोहिंग्या बस्ती का भी दौरा किया।
जनसांख्यिकीय बदलाव और आव्रजन की जांच
उच्चस्तरीय समिति का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव, अवैध आव्रजन और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन करना है। ऐसे में प्रशासन की ओर से जारी किए जा रहे नोटिस और संबंधित क्षेत्रों में चल रही सत्यापन प्रक्रिया को इसी व्यापक जांच के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। आने वाले समय में समिति की जांच से जुड़े निष्कर्ष महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
निजी जमीन पर ठिकाने बनने को लेकर सवाल
प्रशासनिक कार्रवाई के बीच अब यह सवाल भी उठ रहा है कि निजी जमीन पर बनाए गए इन अस्थायी ठिकानों में लोगों को रहने की अनुमति किस आधार पर मिली। साथ ही यह भी जांच का विषय हो सकता है कि जमीन मालिकों ने वहां शेड या दुकानों के निर्माण की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी थी। नोटिस और सत्यापन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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