Panna Chita Andolan : मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ क्षेत्र में विस्थापन और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा चिता आंदोलन पांचवें दिन भी जारी रहा। प्रभावित महिला और पुरुष प्रदर्शनकारी पानी और डूब क्षेत्र के बीच प्रतीकात्मक चिताओं पर लेटकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर ‘न्याय दो या मार दो’ का नारा दोहराया और प्रशासन से विस्थापन तथा राहत से जुड़े मामलों में समाधान की मांग की।
कई परियोजनाओं से प्रभावित हुए ग्रामीण
अजयगढ़ क्षेत्र में केन-बेतवा लिंक परियोजना के साथ मझगाय बांध, रुंझ बांध और सिंगरौली-ललितपुर रेलवे लाइन जैसी परियोजनाओं से ग्रामीण परिवार प्रभावित हुए हैं। परियोजनाओं के कारण कुछ क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने और गांवों के डूब क्षेत्र में आने की स्थिति बनी है। प्रभावित लोगों का कहना है कि जमीन, मकान और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों का समाधान उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं हुआ है।
आंदोलनकारियों ने जताई नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से मुआवजा, पुनर्वास और राहत पैकेज से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। उनका आरोप है कि पहले भी प्रशासन की ओर से समाधान का भरोसा दिया गया था, लेकिन कई मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से उन्होंने दोबारा चिता आंदोलन शुरू किया है। आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी दिखाई दे रही है।
‘न्याय दो या मार दो’ बना विरोध का नारा
प्रदर्शनकारियों ने ‘न्याय दो या मार दो’ को अपने आंदोलन का प्रमुख नारा बनाया है। उनके मुताबिक यह नारा उनकी नाराजगी और विस्थापन से जुड़ी पीड़ा को दर्शाता है। इससे पहले भी इसी तरह के प्रतीकात्मक विरोध के जरिए प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी मांगें प्रशासन के सामने रखी थीं। आंदोलन के दौरान जल, मिट्टी और चिता जैसे प्रतीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
प्रशासन ने बताया राहत भुगतान का विवरण
वहीं, अजयगढ़ प्रशासन का कहना है कि पात्र विस्थापित परिवारों को नियमानुसार राहत राशि का भुगतान किया जा चुका है। एसडीएम आलोक मार्को के अनुसार रुंझ सिंचाई परियोजना के तहत विश्रामगंज के 670 विस्थापित परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये दिए जा चुके हैं। प्रशासन के मुताबिक मझगाय मध्यम सिंचाई परियोजना के तहत बालूपुर, कुंवरपुर और बनेहरी के 1,219 पात्र परिवारों को भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान किया गया है।
1889 पात्र परिवारों को भुगतान का दावा
प्रशासन के अनुसार अब तक कुल 1,889 पात्र परिवारों के बैंक खातों में राहत राशि भेजी जा चुकी है। अधिकारियों ने बताया कि जिन विस्थापित परिवारों को पहले पांच लाख रुपये दिए गए थे, उन्हें नए नियमों के तहत अतिरिक्त 7.50 लाख रुपये का अंतर भुगतान किया जा रहा है। इसके लिए कुंवरपुर, झगराहा और विश्रामगंज में विशेष प्रशासनिक कैंप लगाए जाने की जानकारी दी गई है।
मुआवजे और पुनर्वास को लेकर बनी स्थिति
एक तरफ प्रशासन पात्र परिवारों को भुगतान किए जाने का विवरण दे रहा है, वहीं आंदोलनकारी अभी भी पुनर्वास और मुआवजे से जुड़े कई सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में विवाद का मुख्य बिंदु पात्रता, भुगतान की स्थिति, पुनर्वास पैकेज और प्रभावित परिवारों की वास्तविक जरूरतों से जुड़ा हुआ है। आने वाले दिनों में प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
परियोजनाओं के असर पर भी उठे सवाल
केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं को लेकर प्रभावित ग्रामीणों ने विस्थापन के साथ-साथ जमीन, आजीविका और स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का मुद्दा भी उठाया है। इससे पहले भी पन्ना-छतरपुर क्षेत्र में परियोजना प्रभावित ग्रामीणों द्वारा चिता आंदोलन के जरिए अपनी मांगें सामने रखी गई थीं।
आगे भी जारी रह सकता है विरोध
फिलहाल पांचवें दिन भी प्रदर्शन जारी रहने से प्रशासन के सामने प्रभावित परिवारों की मांगों और भुगतान संबंधी दावों के बीच समन्वय बनाने की चुनौती बनी हुई है। प्रदर्शनकारी अपनी मांगों के समाधान पर जोर दे रहे हैं, जबकि प्रशासन पात्र परिवारों को राहत राशि दिए जाने का दावा कर रहा है। अब आगे की कार्रवाई और बातचीत से यह तय होगा कि आंदोलन किस दिशा में बढ़ता है।
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