Russia-Ukraine Peace Talk : रूस और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स द्वारा रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को मंजूरी दिए जाने के बाद क्रेमलिन ने इसे ‘अनफ्रेंडली एक्शन’ बताया है। रूस ने चेतावनी दी है कि अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले नए प्रतिबंध यूक्रेन में युद्ध समाप्त करने और शांति समझौते तक पहुंचने की कोशिशों को और कठिन बना सकते हैं।
हाउस ने 262-159 मतों से बिल किया पास
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट 2026’ को 262-159 मतों से मंजूरी दी। यह विधेयक अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा। प्रस्ताव में रूस के खिलाफ अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ रूसी तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान शामिल है।
क्रेमलिन ने अमेरिकी कदम पर दी प्रतिक्रिया
रॉयटर्स के मुताबिक, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि रूस अमेरिकी कानून की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। उन्होंने इस कदम को रूस के प्रति ‘अनफ्रेंडली एक्शन’ की श्रेणी में बताया। पेसकोव के अनुसार, अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले अतिरिक्त प्रतिबंध यूक्रेन में शांति समझौते के लिए चल रही कोशिशों को मुश्किल बना सकते हैं।
रूसी अधिकारियों और ऊर्जा क्षेत्र पर भी निशाना
प्रस्तावित कानून के तहत रूसी अधिकारियों, बैंकों और ऊर्जा परियोजनाओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाने का अधिकार दिया जा सकता है। इसके अलावा रूसी ऊर्जा की ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले टैंकरों के कथित ‘शैडो फ्लीट’ को भी निशाना बनाया जा सकता है। कानून का नाम दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने इस प्रस्ताव पर एक साल से अधिक समय तक काम किया था।
भारत और चीन पर पड़ सकता है असर
इस विधेयक में शामिल टैरिफ प्रावधान का असर रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चीन और भारत रूसी क्रूड के प्रमुख खरीदारों में शामिल हैं। कांग्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले शीर्ष पांच देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान का नाम शामिल है। ऐसे में प्रस्तावित व्यवस्था का असर इन देशों के साथ व्यापार पर पड़ सकता है।
सीनेट में पहले ही मिल चुकी है मंजूरी
अमेरिकी सीनेट पिछले महीने इस उपाय को 86-11 मतों से पारित कर चुकी है। अब प्रतिनिधि सभा की मंजूरी के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। इसके बाद इसके भविष्य को लेकर राष्ट्रपति प्रशासन का निर्णय महत्वपूर्ण होगा।
यूक्रेन में शांति प्रयासों पर चिंता
यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका की मध्यस्थता वाली कोशिशें लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बातचीत की प्रक्रिया कई महीनों से ठहरी हुई थी। ट्रंप प्रशासन ने इस महीने मॉस्को और कीव के लिए दूत भेजकर प्रक्रिया को फिर से सक्रिय करने की कोशिश की है। ऐसे में रूस पर नए प्रतिबंधों का प्रस्ताव कूटनीतिक प्रयासों के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
बिल को लेकर अमेरिका में भी अलग-अलग राय
विधेयक को अमेरिकी संसद में दोनों दलों के सांसदों का समर्थन मिला, लेकिन इसके प्रावधानों को लेकर आलोचना भी सामने आई। समर्थकों का कहना है कि टैरिफ का उद्देश्य रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर दबाव बनाना है। वहीं आलोचकों ने आशंका जताई कि इसका असर अमेरिका के सहयोगी देशों पर पड़ सकता है और अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए ऊर्जा सहित अन्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ट्रंप प्रशासन के फैसले पर टिकी नजरें
डेमोक्रेटिक सांसदों के एक वर्ग ने राष्ट्रपति को मिलने वाली अतिरिक्त शक्तियों को लेकर चिंता जताई है। वहीं विधेयक के समर्थक उम्मीद कर रहे हैं कि नए प्रतिबंध रूस पर बातचीत के लिए दबाव बढ़ा सकते हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी सांसदों से कानून को मंजूरी देने की अपील की थी। अब सबकी नजर राष्ट्रपति ट्रंप के अगले कदम और रूस-यूक्रेन शांति प्रयासों पर इसके संभावित प्रभाव पर है।
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