Russia Election 2026: रूस में संसद के निचले सदन स्टेट ड्यूमा के लिए 18 सितंबर से तीन दिवसीय मतदान शुरू हो गया है। मतदान 20 सितंबर तक चलेगा। यह फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव है। 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा के सभी सदस्यों के लिए मतदान हो रहा है।
यूनाइटेड रशिया के सामने विपक्ष सीमित
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के समर्थन वाली यूनाइटेड रशिया पार्टी वर्तमान में ड्यूमा में प्रभावी स्थिति रखती है। Reuters के मुताबिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर कड़े नियंत्रण और सीमित वास्तविक विपक्ष के बीच पार्टी के अपना प्रभुत्व बनाए रखने की व्यापक अपेक्षा है। चुनाव में 225 सीटों के लिए पार्टी सूची और 225 सीटों के लिए एकल-सदस्यीय क्षेत्रों में मतदान होगा।
युद्ध का असर घरेलू राजनीति पर भी
इस चुनाव के दौरान रूस में यूक्रेन युद्ध का असर घरेलू राजनीति और अर्थव्यवस्था पर प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। यूक्रेनी ड्रोन हमलों ने रूस के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा क्षेत्र को प्रभावित किया है। AP के अनुसार तेल रिफाइनरियों पर हमलों के कारण ईंधन आपूर्ति से जुड़ी परेशानियां बढ़ीं और आर्थिक दबाव भी सामने आया।
अर्थव्यवस्था और महंगाई पर बढ़ा दबाव
युद्ध पर बढ़ते सरकारी खर्च, पश्चिमी प्रतिबंधों और घरेलू आर्थिक दबावों के बीच रूसी अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। विश्लेषणों में आर्थिक सुस्ती, बजटीय दबाव और बढ़ते सरकारी खर्च को चुनाव से पहले महत्वपूर्ण परिस्थितियों के रूप में रेखांकित किया गया है। इसके साथ ही यूक्रेन की ओर से रूस के भीतर किए जा रहे हमलों का असर नागरिक जीवन और कारोबारी गतिविधियों पर भी पड़ा है।
पुतिन की लोकप्रियता में गिरावट का दावा
राष्ट्रपति पुतिन के समर्थन को लेकर भी नए आंकड़े चर्चा में हैं। AP की रिपोर्ट के अनुसार लेवाडा सेंटर के सर्वेक्षण में पुतिन की अप्रूवल रेटिंग 2025 में दर्ज 87 प्रतिशत से घटकर अगस्त 2026 में 76 प्रतिशत हुई। हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी ऊंचा है और सर्वेक्षण की पद्धति तथा राजनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर इसकी व्याख्या की जानी चाहिए।
याब्लोको पार्टी चुनावी दौड़ से बाहर
चुनाव से पहले विपक्षी राजनीति पर भी कार्रवाई हुई है। रूस की याब्लोको पार्टी ने खुद को शांति और युद्ध-विरोधी राजनीति के पक्ष में बताया है। उसकी संघीय सूची को चुनाव से बाहर कर दिया गया। जर्मन प्रसारक DW के अनुसार रूस की सर्वोच्च अदालत ने पार्टी को सितंबर के संसदीय चुनाव में भाग लेने से रोकने वाले फैसले को बरकरार रखा।
विरोधी नेताओं पर कार्रवाई का आरोप
युद्ध की आलोचना करने वाले कई रूसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हुई है, जबकि कुछ देश छोड़ चुके हैं। याब्लोको ने भी अपने उम्मीदवारों और क्षेत्रीय नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी है। पार्टी की वेबसाइट के अनुसार सितंबर में उसके कई उम्मीदवारों को प्रशासनिक कार्रवाई और चुनावी पंजीकरण रद्द होने का सामना करना पड़ा।
कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में भी मतदान
2026 का चुनाव इस लिहाज से भी अलग है कि रूस द्वारा नियंत्रित यूक्रेन के कुछ क्षेत्रों में भी रूसी संसदीय चुनाव की प्रक्रिया कराई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन क्षेत्रों की स्थिति विवादित है। यूक्रेन ने ऐसे मतदान को अवैध बताया है, जबकि रूस इन क्षेत्रों को अपने प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा मानता है।
पुतिन ने चुनाव को बताया एकता का संदेश
मतदान से पहले राष्ट्रपति पुतिन ने रूस के नागरिकों से चुनाव में हिस्सा लेने की अपील की। Reuters के अनुसार उन्होंने मतदान को देश की एकता और यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में रूस के समर्थन को प्रदर्शित करने वाली प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत किया। उनके संदेश में साझा मूल्यों, देशभक्ति और राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर दिया गया।
चुनाव के नतीजों पर दुनिया की नजर
रूस का यह संसदीय चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन युद्ध पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है और देश आर्थिक तथा सुरक्षा संबंधी दबावों का सामना कर रहा है। मतदान 20 सितंबर को समाप्त होगा और 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा की नई संरचना सामने आएगी। इस प्रक्रिया पर रूस के भीतर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनावी प्रतिस्पर्धा, राजनीतिक भागीदारी और यूक्रेन युद्ध के प्रभाव के संदर्भ में नजर रखी जा रही है।
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