TMC Symbol Row : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर जारी विवाद के बीच पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का जवाब दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ममता खेमे ने गुरुवार रात करीब 11:36 बजे आयोग को अपनी पसंद के तीन पार्टी नाम और तीन चुनाव चिह्न के विकल्प सौंपे। यह जवाब आयोग के उस निर्देश के बाद आया, जिसमें दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से नए नाम और मुक्त चुनाव चिह्नों के विकल्प मांगे गए थे।
टीएमसी का नाम और जोड़ा फूल चिह्न फिलहाल फ्रीज
चुनाव आयोग ने 17 सितंबर को अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘जोड़ाफूल’ चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया। इसका मतलब है कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव में दोनों गुट इस नाम और आरक्षित चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान के लिए नए नाम और मुक्त चुनाव चिह्न चुनने को कहा है।
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले फैसला
आयोग का यह अंतरिम आदेश नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले आया है। इन दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान प्रस्तावित है। चुनावी प्रक्रिया के लिए समय सीमित होने का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि नाम और चिह्न के अंतिम अधिकार पर विस्तृत फैसला तत्काल संभव नहीं था। इसलिए फिलहाल दोनों गुटों को अलग-अलग नाम और चिह्न के साथ चुनावी प्रक्रिया में आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया है।
दोनों गुटों से मांगे गए तीन-तीन विकल्प
चुनाव आयोग के निर्देश के अनुसार, दोनों पक्षों को अपनी पसंद के तीन पार्टी नाम और तीन मुक्त चुनाव चिह्नों के विकल्प देने थे। आयोग इन विकल्पों में से संबंधित गुटों को अलग पहचान आवंटित करेगा। यह व्यवस्था अंतरिम है और पार्टी के नाम तथा आरक्षित चुनाव चिह्न पर अंतिम निर्णय बाद की प्रक्रिया में लिया जाना है।
आयोग ने दो प्रतिद्वंद्वी गुटों का उल्लेख किया
अपने आदेश में चुनाव आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी संगठन सामने आए हैं। एक पक्ष का नेतृत्व ममता बनर्जी और दूसरे पक्ष का नेतृत्व बागी खेमे के नेता ऋतब्रत बनर्जी कर रहे हैं। दोनों पक्ष खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं।
चुनाव चिह्न पर अंतिम फैसला अभी बाकी
आयोग ने इस विवाद को चुनाव चिह्न (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत विचाराधीन रखा है। इस प्रावधान के तहत किसी पंजीकृत राजनीतिक दल में संगठनात्मक विवाद होने पर आयोग संबंधित दावों और दस्तावेजों की जांच करता है। मौजूदा अंतरिम आदेश अंतिम तौर पर यह तय नहीं करता कि भविष्य में पार्टी का नाम और आरक्षित चिह्न किस गुट को मिलेगा।
दोनों पक्षों ने आयोग के सामने रखे अपने दावे
इस विवाद को लेकर चुनाव आयोग पहले ही दोनों गुटों की सुनवाई कर चुका है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले खेमे की ओर से राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन समेत प्रतिनिधियों ने पक्ष रखा, जबकि ऋतब्रत बनर्जी खुद अपने गुट की ओर से आयोग के सामने पेश हुए। आयोग ने ऋतब्रत खेमे से अतिरिक्त दस्तावेज भी मांगे थे।
विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा आंतरिक विवाद
टीएमसी के भीतर नाम और चिह्न को लेकर विवाद विधानसभा चुनाव के बाद सामने आए संगठनात्मक मतभेदों के बीच तेज हुआ। दोनों पक्षों की ओर से पार्टी के विधायकों और संगठनात्मक समर्थन को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। ममता खेमे ने बागी विधायकों के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अयोग्यता संबंधी याचिकाएं भी दायर की हैं। वहीं, विवाद से जुड़े कानूनी मामले अदालतों में भी विचाराधीन हैं। ऐसे में अब आगामी उपचुनावों के लिए आयोग का अंतरिम आदेश दोनों गुटों की चुनावी पहचान तय करने में तत्काल प्रभावी रहेगा।
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