Nandigram Bypoll 2026 : पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं। इसी मुद्दे पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें गिरफ्तारी को विपक्ष को निशाना बनाने और लोकतंत्र की हत्या से जोड़ा गया था।
चार लंबित गिरफ्तारी वारंट के आधार पर हुई कार्रवाई
पश्चिम बंगाल पुलिस के मुताबिक, कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को चार लंबित गिरफ्तारी वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने बताया कि ये वारंट गैर-जमानती मामलों से संबंधित हैं। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मामले वर्ष 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन के दौरान दर्ज किए गए थे। इन मामलों में दंगा, हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और आपराधिक धमकी जैसे गंभीर आरोप शामिल बताए गए हैं।
2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े हैं मामले
नंदीग्राम में वर्ष 2007 में भूमि अधिग्रहण के विरोध में बड़ा आंदोलन हुआ था। उस दौरान हिंसा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई मामले दर्ज किए गए थे। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ लंबित मामलों में इसी दौर की घटनाओं से जुड़े आरोप शामिल हैं। पुलिस ने गिरफ्तारी का आधार अदालतों की ओर से जारी किए गए लंबित वारंट को बताया है।
सरमा ने गिरफ्तारी को बताया पुलिस का कर्तव्य
पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में मधुपुर सत्र के दौरे के दौरान पत्रकारों से बातचीत में हिमंत बिस्वा सरमा ने गिरफ्तारी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर मामलों में अदालत के आदेश से वारंट लंबित हैं, तो पुलिस का दायित्व कार्रवाई करना है। सरमा ने कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों को इसी संदर्भ में खारिज किया।
राहुल गांधी के बयान पर असम सीएम का पलटवार
राहुल गांधी ने मिलन प्रधान की गिरफ्तारी को विपक्ष को निशाना बनाने और लोकतंत्र की हत्या से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे। इसके जवाब में सरमा ने कहा कि यदि किसी उम्मीदवार के खिलाफ हत्या जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई लंबित है, तो पुलिस को कानून के अनुसार कदम उठाना होगा। उन्होंने राहुल गांधी के रुख पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे व्यक्ति को चुनावी प्रक्रिया में उम्मीदवार के तौर पर देखे जाने पर भी सवाल उठना चाहिए।
हत्या के मामलों का हवाला देकर कांग्रेस पर निशाना
सरमा ने दावा किया कि उन्हें समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिली है कि मिलन प्रधान के खिलाफ वर्ष 2007 में हत्या से जुड़े दो या तीन मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा कार्रवाई करना उसके कर्तव्यों का हिस्सा है। हालांकि, इन आरोपों और मामलों का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष क्या है, यह अलग कानूनी प्रक्रिया का विषय है। चुनावी राजनीति में इस गिरफ्तारी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
राहुल गांधी पर सरमा की व्यक्तिगत टिप्पणी
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी के खिलाफ व्यक्तिगत टिप्पणी भी की। उन्होंने राहुल गांधी को लेकर कहा कि उन्हें देखकर हंसी आती है और उनके पहनावे तथा सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर कटाक्ष किया। सरमा ने राहुल गांधी के दाढ़ी रखने और नहीं रखने का जिक्र करते हुए उनकी राजनीतिक शैली पर सवाल उठाया। उनकी इस टिप्पणी ने विवाद को गिरफ्तारी के मुद्दे से आगे बढ़ाकर व्यक्तिगत राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंचा दिया।
नंदीग्राम उपचुनाव में बढ़ी राजनीतिक हलचल
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल और गरमा गया है। एक तरफ कांग्रेस गिरफ्तारी को लेकर सरकार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ सरमा जैसे भाजपा नेताओं का कहना है कि लंबित गैर-जमानती वारंट होने की स्थिति में पुलिस की कार्रवाई कानून के तहत हुई है। ऐसे में उपचुनाव से पहले यह मामला राजनीतिक बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है।
कानून और चुनावी राजनीति के बीच बढ़ा विवाद
नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार की गिरफ्तारी ने कानून और चुनावी राजनीति के बीच संबंध को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पुलिस कार्रवाई का आधार लंबित वारंट बताए जाने के बाद अब राजनीतिक दल अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं। इस पूरे मामले में आरोपों, अदालत के लंबित आदेशों और राजनीतिक बयानों को अलग-अलग संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण होगा। उपचुनाव के दौरान इस मुद्दे पर आगे भी सियासी बयानबाजी जारी रहने की संभावना है।
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