Mahanadi Water Dispute : छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के विवाद को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रविवार को बड़ा बयान दिया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचे मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अब महानदी जल विवाद पहले जैसी स्थिति में नहीं है और इसका समाधान बहुत जल्द निकलने की उम्मीद है। उन्होंने दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय को इस दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
दोनों राज्यों और केंद्र में बीजेपी की सरकार का जिक्र
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा के साथ-साथ केंद्र में भी भारतीय जनता पार्टी की सरकार होने से आपसी समन्वय बेहतर हुआ है। उनके मुताबिक, राजनीतिक स्तर पर संवाद बढ़ने से वर्षों पुराने मुद्दों को बातचीत के जरिए आगे बढ़ाने का वातावरण बना है। साय ने भरोसा जताया कि इसी समन्वय के जरिए महानदी जल बंटवारे से जुड़ा मामला जल्द समाधान तक पहुंच सकता है।
केंद्रीय जल आयोग के फैसले को मानने पर सहमति
साय ने बताया कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों के बीच पहले भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा ने केंद्रीय जल आयोग यानी CWC के निर्णय को स्वीकार करने पर सहमति जताई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आयोग जो भी निर्णय दोनों राज्यों के हितों को ध्यान में रखते हुए करेगा, दोनों पक्ष उसका सम्मान करेंगे।
नई दिल्ली में दोनों राज्यों के बीच हुई थी बैठक
महानदी विवाद को लेकर 30 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इसमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। केंद्र सरकार ने इस बैठक को संवाद, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से विवाद के सौहार्दपूर्ण समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया था।
तकनीकी स्तर पर भी बातचीत जारी
विवाद के समाधान के लिए दोनों राज्यों की तकनीकी टीमों के बीच भी चर्चा चल रही है। केंद्रीय जल आयोग की देखरेख में दोनों पक्षों के अधिकारियों ने पानी की उपलब्धता, उपयोग और अन्य तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है और आगे भी बैठकें प्रस्तावित हैं।
महानदी जल बंटवारे का विवाद दशकों पुराना
छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच महानदी के पानी के बंटवारे को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। खासतौर पर गैर-मानसूनी अवधि में नदी के प्रवाह और ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराजों को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद रहे हैं। ओडिशा ने कुछ परियोजनाओं से हीराकुंड जलाशय और निचले क्षेत्रों में पानी के प्रवाह पर असर पड़ने की चिंता जताई है, जबकि छत्तीसगढ़ अपने जल उपयोग को राज्य की जरूरतों के अनुरूप बताता रहा है।
महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण में भी मामला लंबित
महानदी जल विवाद से जुड़ा मामला न्यायाधिकरण के समक्ष भी चल रहा है। हालिया घटनाक्रम में दोनों राज्यों के बीच समाधान की बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए न्यायाधिकरण की सुनवाई 28 सितंबर तक टाली गई है। इससे दोनों पक्षों को आपसी सहमति तलाशने के लिए अतिरिक्त समय मिला है। तकनीकी बैठकों और केंद्रीय जल आयोग की भूमिका को इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ओडिशा दौरे में सीएम साय ने मोहन माझी से मुलाकात की
भुवनेश्वर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने ओडिशा समकक्ष मोहन चरण माझी से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ और ओडिशा के आपसी हितों तथा विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। माझी ने मुलाकात को दोनों राज्यों के बीच सहयोग मजबूत करने की दिशा में उपयोगी बताया।
जल्द समाधान की उम्मीद से बढ़ी उम्मीदें
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के ताजा बयान और दोनों राज्यों के बीच जारी बातचीत से महानदी जल विवाद के समाधान को लेकर नई उम्मीद बनी है। हालांकि अंतिम जल बंटवारा व्यवस्था और तकनीकी शर्तों का स्वरूप अभी तय होना बाकी है। CWC की प्रक्रिया, दोनों राज्यों के बीच होने वाली आगामी बैठकों और न्यायाधिकरण की आगे की कार्यवाही के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।
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