Vitamin D Deficiency : विटामिन D शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों में शामिल है। यह कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों की सेहत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में भी इसका योगदान होता है। शरीर में इसकी पर्याप्त मात्रा बनाए रखना इसलिए जरूरी माना जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति में विटामिन D की जरूरत और उसका स्तर अलग हो सकता है।
धूप कम लेने से बढ़ सकता है कमी का जोखिम
आजकल बदलती लाइफस्टाइल के कारण कई लोग पर्याप्त समय धूप में नहीं बिताते। घर या ऑफिस में लंबे समय तक रहना, सीमित आउटडोर गतिविधियां और कुछ अन्य कारणों की वजह से विटामिन D का स्तर कम हो सकता है। 19 सितंबर को एनेस्थिसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन डॉक्टर कुणाल सूद ने सोशल मीडिया पर विटामिन D की कमी से जुड़े कुछ संकेत साझा किए।
हड्डियों में दर्द हो सकता है संकेत
विटामिन D की गंभीर कमी हड्डियों के मिनरलाइजेशन को प्रभावित कर सकती है। इससे कुछ लोगों में ऑस्टियोमलेशिया जैसी स्थिति विकसित हो सकती है। ऐसी स्थिति में पीठ के निचले हिस्से, पेल्विस, कूल्हों और पैरों में दर्द या संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। हालांकि, शरीर में दर्द के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए केवल दर्द के आधार पर विटामिन D की कमी मान लेना सही नहीं है।
लगातार हड्डियों में दर्द हो तो जांच जरूरी
यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के लंबे समय तक हड्डियों में दर्द बना रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। चिकित्सक लक्षणों और जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट या अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं। इससे विटामिन D के स्तर और हड्डियों से जुड़ी दूसरी संभावित समस्याओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है।
मांसपेशियों में कमजोरी को न करें नजरअंदाज
विटामिन D की कमी से कुछ लोगों में मांसपेशियों की कमजोरी भी देखी जा सकती है। यह समस्या खासतौर पर कूल्हों और जांघों के आसपास महसूस हो सकती है। इसके कारण सीढ़ियां चढ़ने, लंबे समय तक चलने या नीची कुर्सी से उठने जैसे सामान्य काम मुश्किल लग सकते हैं। हालांकि, कमजोरी के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।
सिर्फ सप्लीमेंट लेने से ताकत नहीं बढ़ती
यदि शरीर में वास्तव में विटामिन D की कमी है, तो उसे ठीक करने से संबंधित लक्षणों में सुधार हो सकता है। लेकिन बिना चिकित्सकीय सलाह के अधिक मात्रा में विटामिन D लेना जरूरी नहीं कि मांसपेशियों की ताकत बढ़ाए। सप्लीमेंट की जरूरत और उसकी मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करना बेहतर है।
थकान भी हो सकती है एक संभावित संकेत
हर समय थकान महसूस होना कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। कुछ शोधों में कम विटामिन D स्तर और डिप्रेशन जैसे लक्षणों के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि विटामिन D की कमी सीधे तौर पर डिप्रेशन का कारण बनती है। इसलिए लगातार थकान या मूड से जुड़ी परेशानी होने पर अन्य कारणों की भी जांच जरूरी है।
मामूली चोट में फ्रैक्चर हो तो सावधान
लंबे समय तक गंभीर विटामिन D की कमी रहने पर ऑस्टियोमलेशिया के कारण हड्डियां कमजोर हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में सामान्य दबाव सहने की हड्डियों की क्षमता प्रभावित हो सकती है और चोट लगने पर फ्रैक्चर का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि, फ्रैक्चर केवल विटामिन D की कमी की वजह से नहीं होते। ऑस्टियोपोरोसिस, कुछ दवाएं और हड्डियों से जुड़ी अन्य बीमारियां भी इसके कारण हो सकती हैं।
विटामिन D की कमी की पुष्टि कैसे करें?
शरीर में विटामिन D की कमी के लक्षण कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी मिल सकते हैं। इसलिए केवल लक्षण देखकर खुद से विटामिन D की दवा या सप्लीमेंट शुरू करना उचित नहीं है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर रक्त जांच के माध्यम से विटामिन D का स्तर जांच सकते हैं और उसी के अनुसार उपचार या सप्लीमेंट की सलाह दे सकते हैं।
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