West Bengal SIR : पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अपीलों के तेजी से निपटारे के लिए ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। आयोग ने अदालत को बताया कि मौजूदा 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों की संख्या बढ़ाकर 42 की जा सकती है। प्रस्ताव के तहत राज्य की प्रत्येक लोकसभा सीट के लिए एक ट्रिब्यूनल बनाया जा सकता है।
38 लाख से ज्यादा अपीलें, बड़ी संख्या में मामले लंबित
चुनाव आयोग के मुताबिक SIR से जुड़े मामलों में कुल 38.31 लाख के आसपास अपीलें दाखिल हुई हैं। 16 सितंबर को दाखिल हलफनामे में आयोग ने 1,26,194 अपीलों के निपटारे की जानकारी दी। इस हिसाब से करीब 37.05 लाख अपीलें लंबित थीं। इससे पहले आयोग ने 38,20,683 अपीलों में से 1,02,231 मामलों के निपटारे और 37,18,452 मामलों के लंबित होने का आंकड़ा अदालत के सामने रखा था।
हटाए गए मतदाताओं की 22 लाख से ज्यादा अपीलें
ECI के ताजा आंकड़ों के अनुसार कुल अपीलों में 22.21 लाख अपीलें ऐसे मतदाताओं ने दाखिल की हैं, जिनके नाम SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए थे। आयोग के मुताबिक SIR के दौरान करीब 27.16 लाख नाम हटाए गए थे। यानी हटाए गए मतदाताओं में लगभग 82 प्रतिशत ने अपने नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए अपील की है।
16.10 लाख अपीलें नाम शामिल किए जाने के खिलाफ
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि करीब 16.10 लाख अपीलें मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने से संबंधित हैं। यानी इन मामलों में किसी व्यक्ति के नाम को वोटर लिस्ट में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई है। हालांकि आयोग के आंकड़ों में इन अपीलों के आवेदकों की विस्तृत श्रेणी स्पष्ट नहीं की गई है।
1.26 लाख मामलों का हुआ निपटारा
ट्रिब्यूनलों द्वारा अब तक तय किए गए 1,26,194 मामलों में 1,13,943 लोगों के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने का फैसला हुआ। वहीं 8,649 मामलों में अपील खारिज कर दी गई। आयोग से जुड़े पक्षों ने यह भी संकेत दिया है कि अब तक निपटाए गए मामलों को सभी लंबित अपीलों का प्रतिनिधि नमूना नहीं माना जा सकता, क्योंकि दस्तावेजी प्रमाण वाले मामले पहले निपटाए गए हो सकते हैं।
ECI ने डिलीशन के आंकड़ों पर दी सफाई
चुनाव आयोग ने SIR के दौरान हटाए गए नामों के आंकड़ों को लेकर उठ रहे सवालों पर भी सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। आयोग के अनुसार केवल deleted voters की संख्या के आधार पर पूरी प्रक्रिया का आकलन नहीं किया जा सकता। SIR में अनुपस्थित, स्थान बदल चुके, मृत और डुप्लीकेट मतदाता प्रविष्टियों की भी जांच की गई थी।
चुनाव परिणाम प्रभावित होने के दावे पर आयोग की आपत्ति
ECI ने उन दावों का भी विरोध किया है जिनमें कहा गया कि SIR के दौरान हुई deletions का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों पर असर पड़ा। आयोग ने TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन द्वारा जीत के अंतर और हटाए गए मतदाताओं की संख्या की तुलना वाले तर्क को भी चुनौती दी। आयोग का कहना है कि केवल इन दो आंकड़ों की तुलना करके चुनाव परिणाम पर SIR के प्रभाव का निष्कर्ष निकालना उचित आधार नहीं है।
42 ट्रिब्यूनल से तेज हो सकता है अपील निपटारा
बड़ी संख्या में लंबित मामलों को देखते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के सामने 42 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव रखा है। आयोग के अनुसार प्रत्येक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के लिए एक ट्रिब्यूनल होने से मामलों के निपटारे की क्षमता बढ़ाई जा सकती है। मौजूदा व्यवस्था में 19 ट्रिब्यूनल अपीलों की सुनवाई कर रहे हैं।
SIR मामले में लंबित अपीलें बनीं अहम मुद्दा
पश्चिम बंगाल SIR की सुनवाई में अब अपीलों के बड़े बैकलॉग और उनके तेजी से निपटारे का मुद्दा प्रमुख है। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक लाखों मतदाताओं से जुड़े मामले ट्रिब्यूनलों के सामने लंबित हैं। ऐसे में 42 ट्रिब्यूनल बनाने का प्रस्ताव सुप्रीम कोर्ट के सामने लंबित अपीलों के निपटारे की गति बढ़ाने के उपाय के रूप में रखा गया है।
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