DUSU Election 2026 : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के हालिया नतीजों को लेकर धनबल और राजनीतिक प्रभाव का मुद्दा उठाया है। छत्रपति संभाजीनगर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दीपके ने आरोप लगाया कि मौजूदा दौर में चुनावों पर पैसे का प्रभाव बढ़ रहा है और उम्मीदवारों के प्रचार में बड़े संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है।
ABVP ने जीते तीन केंद्रीय पद
DUSU चुनाव 2026 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने केंद्रीय पैनल के चार में से तीन पदों पर जीत दर्ज की। यश डबास ने अध्यक्ष, रिया छावड़ी ने सचिव और लक्ष्य राज सिंह ने संयुक्त सचिव पद जीता। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शोकीन विजयी रहे। कांग्रेस समर्थित NSUI इस बार केंद्रीय पैनल में कोई पद हासिल नहीं कर सकी।
लग्जरी कारों से प्रचार का जिक्र
दीपके ने DUSU चुनाव में प्रचार के दौरान कथित तौर पर इस्तेमाल होने वाली महंगी गाड़ियों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनावी राजनीति में धन की भूमिका बढ़ती जा रही है। उन्होंने रोल्स रॉयस, ऑडी और बीएमडब्ल्यू जैसी लग्जरी कारों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इससे चुनाव प्रचार में उपलब्ध आर्थिक संसाधनों का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह टिप्पणी उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में धनबल को लेकर अपने व्यापक आरोपों के संदर्भ में की।
विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दखल पर सवाल
दीपके ने विश्वविद्यालयों में राजनीतिक विचारधारा के प्रभाव का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा की कुलपति कुमुद शर्मा को लेकर आरोप लगाए और दावा किया कि विरोध प्रदर्शनों में शामिल दलित और आदिवासी छात्रों के खिलाफ बड़ी संख्या में FIR दर्ज की गईं। सितंबर में विश्वविद्यालय में विरोध कर रहे कुछ दलित और ओबीसी छात्रों के खिलाफ FIR और परिसर प्रवेश प्रतिबंध को लेकर विवाद की रिपोर्ट सामने आई थी, जबकि विश्वविद्यालय ने इसे प्रशासनिक और अनुशासनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा बताया था।
MPSC अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग
MPSC को लेकर भी अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया। उन्होंने परीक्षार्थियों की पारदर्शिता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि CJP इस मुद्दे पर ऑनलाइन अभियान शुरू करेगी। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक दीपके ने भीमनवार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही है, जबकि भीमनवार ने कहा है कि जिन कथित अनियमितताओं का जिक्र किया जा रहा है, वे उनके कार्यकाल से पहले की हैं।
IIT Bombay छात्र की मौत पर मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा
IIT Bombay के छात्र साहिल वाकोडे की मौत का जिक्र करते हुए दीपके ने कहा कि ऐसी घटनाओं को केवल परीक्षा में कथित अनुचित साधन के इस्तेमाल से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और संस्थागत सहयोग को जरूरी बताया। साहिल की मौत के बाद IIT Bombay में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया और स्वतंत्र जांच, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तथा जवाबदेही सहित कई मांगें उठाईं। मामले में पुलिस जांच भी जारी है।
गडचिरौली आश्रम स्कूलों की सुविधाओं पर सवाल
दीपके ने विदर्भ की आदिवासी आश्रम शालाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने गडचिरौली की एक आश्रम शाला में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत का उल्लेख करते हुए बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप लगाया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए बताया था कि छात्राएं कथित तौर पर खाट उपलब्ध नहीं होने के कारण फर्श पर सो रही थीं। आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी।
चुनाव आयोग पर भी दीपके ने साधा निशाना
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को अस्थायी रूप से फ्रीज किए जाने के निर्वाचन आयोग के फैसले पर भी दीपके ने कटाक्ष किया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी करते हुए विपक्षी दलों के प्रतीकों को फ्रीज करने की बात कही। दरअसल, निर्वाचन आयोग ने सितंबर में TMC के नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह पर अंतरिम रोक लगाकर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों से वैकल्पिक नाम और चिन्ह मांगे थे। इस फैसले को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।
कई मुद्दों को एक साथ उठाने की कोशिश
अभिजीत दीपके के बयान में DUSU चुनाव से लेकर MPSC, IIT Bombay, आदिवासी आश्रम शालाओं और निर्वाचन आयोग तक कई अलग-अलग मुद्दे शामिल रहे। उनके बयानों का मुख्य फोकस चुनावी पारदर्शिता, छात्रों के अधिकार, संस्थागत जवाबदेही और शिक्षा परिसरों में राजनीतिक प्रभाव से जुड़े सवालों पर रहा। इन मुद्दों पर संबंधित संस्थाओं और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है।
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