Pakistan Economy : पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई को लेकर राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद में प्रस्तावित मार्च का आह्वान किया है। मार्च से पहले प्रशासन और पीटीआई के बीच टकराव तेज हो गया है। इसी बीच लाहौर पुलिस ने इमरान खान की बहन अलीमा खान को उनके आवास से हिरासत में लिया है।
अलीमा खान की गिरफ्तारी से बढ़ी सियासी हलचल
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार को पुलिस बल ने लाहौर स्थित अलीमा खान के घर पर कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में लिया। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब पीटीआई समर्थक राजधानी में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। पीटीआई ने आरोप लगाया है कि सरकार गिरफ्तारियों और प्रतिबंधों के जरिए उसके राजनीतिक आंदोलन को रोकना चाहती है। वहीं प्रशासन कानून-व्यवस्था और नागरिकों की आवाजाही बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपायों को जरूरी बता रहा है।
विरोध प्रदर्शनों से रोजाना 120 अरब रुपये नुकसान का दावा
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने विरोध प्रदर्शनों के संभावित आर्थिक प्रभाव को लेकर चेतावनी दी है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, उन्होंने कहा कि लंबे समय तक धरना या प्रदर्शन जारी रहने पर देश की अर्थव्यवस्था को प्रतिदिन करीब 120 अरब पाकिस्तानी रुपये का नुकसान हो सकता है। उनके अनुसार यह अनुमान सरकार की आर्थिक टीम और योजना आयोग के आकलन पर आधारित है।
सर्विस सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर का अनुमान
वित्त मंत्री द्वारा बताए गए अनुमान के अनुसार, संभावित आर्थिक नुकसान में सबसे बड़ा हिस्सा सेवा क्षेत्र का हो सकता है। वित्तीय सेवाओं, दूरसंचार, खुदरा कारोबार, परिवहन, थोक बाजार और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े क्षेत्रों को प्रतिदिन करीब 86 अरब रुपये के नुकसान का अनुमान है। औद्योगिक क्षेत्र में करीब 25 अरब और कृषि क्षेत्र में लगभग 9 अरब रुपये प्रतिदिन के नुकसान की बात कही गई है।
सरकार को राजस्व में भी नुकसान की आशंका
विरोध और संभावित सड़क बंदी से आर्थिक गतिविधियों के प्रभावित होने के साथ सरकारी राजस्व पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई है। वित्त मंत्री के मुताबिक, प्रदर्शन होने की स्थिति में सरकार को करीब 17 अरब रुपये के अतिरिक्त राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने इस स्थिति को देश के लिए आर्थिक रूप से नुकसानदेह बताया।
वित्त मंत्री ने बातचीत से समाधान की अपील की
मुहम्मद औरंगजेब ने संभावित आर्थिक व्यवधान को ‘self-inflicted pain’ यानी खुद को पहुंचाया जाने वाला नुकसान बताया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान पहले से ही क्षेत्रीय संघर्षों के कारण बढ़ते माल भाड़े, बीमा लागत और सप्लाई चेन में व्यवधान जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने राजनीतिक दलों से बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने की अपील की।
27 सितंबर को इस्लामाबाद मार्च की तैयारी
पीटीआई ने सरकार की चेतावनियों के बावजूद 27 सितंबर को राष्ट्रव्यापी लामबंदी का आह्वान किया है। पार्टी की प्रमुख मांगों में इमरान खान की रिहाई, संविधान की सर्वोच्चता और राजनीतिक एवं संवैधानिक सुधार शामिल हैं। पार्टी समर्थकों के जरिए राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंचने और सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने की योजना बताई गई है।
सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की
सरकार ने संकेत दिया है कि कानून का उल्लंघन करने वाले प्रदर्शनकारियों को इस्लामाबाद में प्रवेश करने से रोका जाएगा। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में सुरक्षा बढ़ाई गई है। सड़कों पर कंटेनर लगाए जा रहे हैं और अतिरिक्त सुरक्षा बलों के साथ दंगा-रोधी उपकरण तैनात किए जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक रास्तों और सरकारी प्रतिष्ठानों की सुरक्षा प्राथमिकता है।
जमात-ए-इस्लामी ने भी खोला मोर्चा
पीटीआई के आंदोलन के बीच जमात-ए-इस्लामी (JI) ने भी पेट्रोलियम लेवी के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन शुरू किया है। पार्टी के अमीर हाफिज नसीम-उर-रहमान ने ईंधन पर लगाए गए टैक्स को कम करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
पाकिस्तान में राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ा
इमरान खान की रिहाई को लेकर पीटीआई के प्रस्तावित मार्च, अलीमा खान की गिरफ्तारी और जमात-ए-इस्लामी के आंदोलन ने पाकिस्तान सरकार के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। एक ओर प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकार आर्थिक गतिविधियों पर संभावित असर को लेकर चिंता जता रही है। 27 सितंबर का प्रस्तावित मार्च अब देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है।
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