Bilaspur JDA Protest : बिलासपुर के छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (सिम्स) में जूनियर डॉक्टरों ने प्रस्तावित कामबंद हड़ताल को फिलहाल तीन दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (JDA) ने स्टाइपेंड बढ़ाने समेत कुल 17 मांगों को लेकर आंदोलन की तैयारी की थी। मंगलवार को डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर सांकेतिक प्रदर्शन किया। इसके बाद स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से हुई बातचीत और सरकार की ओर से मिले आश्वासन के बाद संगठन ने तत्काल हड़ताल शुरू नहीं करने का फैसला किया।
काली पट्टी बांधकर डॉक्टरों ने जताया विरोध
आंदोलन के पहले चरण में सिम्स सहित छत्तीसगढ़ के कई मेडिकल कॉलेजों में पीजी और इंटर्न डॉक्टरों ने काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह सांकेतिक प्रदर्शन किया गया है। सिम्स जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. नागेंद्र कुमार साहू ने बताया कि अगले तीन दिनों तक डॉक्टर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जारी रखेंगे।
रैली और कैंडल मार्च से रखेंगे अपनी मांगें
JDA के अनुसार, तीन दिनों के दौरान डॉक्टर अलग-अलग शांतिपूर्ण कार्यक्रमों के जरिए अपनी मांगों को सामने रखेंगे। इनमें रैली, कैंडल मार्च और अन्य सांकेतिक विरोध कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं। संगठन का कहना है कि फिलहाल मरीजों को होने वाली परेशानी को ध्यान में रखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल पूर्ण कामबंद आंदोलन शुरू नहीं किया है। सरकार के आश्वासन के बाद बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है।
24 सितंबर से OPD बंद करने की चेतावनी
जूनियर डॉक्टरों ने सरकार को अपनी मांगों पर निर्णय लेने के लिए समय दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि तय अवधि में मांगों को लेकर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया तो 24 सितंबर से ओपीडी सेवाएं बंद कर कामबंद आंदोलन शुरू किया जा सकता है। JDA के मुताबिक, सिम्स में 300 से अधिक जूनियर डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि पूरे छत्तीसगढ़ में जूनियर डॉक्टरों की संख्या 2,000 से ज्यादा बताई गई है।
स्टाइपेंड बढ़ोतरी समेत 17 सूत्रीय मांगें
जूनियर डॉक्टरों की प्रमुख मांगों में स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा शामिल है। इसके अलावा संगठन ने कुल 17 सूत्रीय मांगें सरकार के सामने रखी हैं। JDA का कहना है कि डॉक्टर लंबे समय से इन मुद्दों पर सरकार से चर्चा और समाधान की मांग कर रहे हैं। संगठन चाहता है कि स्टाइपेंड सहित अन्य लंबित मांगों पर भी जल्द स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि आंदोलन की स्थिति पैदा न हो।
मरीजों को परेशान करना उद्देश्य नहीं: JDA
जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन ने कहा है कि आंदोलन का उद्देश्य मरीजों को परेशान करना नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि वे अपनी समस्याओं और मांगों का समाधान चाहते हैं और इसके लिए सरकार के साथ बातचीत का रास्ता खुला रखना चाहते हैं। स्वास्थ्य मंत्री से हुई बातचीत के बाद फिलहाल आंदोलन को सीमित अवधि के लिए रोकने का फैसला इसी उद्देश्य से लिया गया है।
फिलहाल OPD और इमरजेंसी सेवाएं जारी
प्रदेश महासचिव डॉ. योगेश्वर जायसवाल के अनुसार, वर्तमान में जूनियर डॉक्टर ओपीडी और इमरजेंसी जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में काम कर रहे हैं। डॉक्टरों का विरोध फिलहाल सांकेतिक स्तर पर जारी रहेगा। संगठन ने स्पष्ट किया है कि अगले कुछ दिनों में सरकार की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर रखी जाएगी और उसी के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी।
मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन बढ़ाने की तैयारी
JDA ने संकेत दिया है कि यदि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। संगठन के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक चरणबद्ध आंदोलन ले जाने पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल जूनियर डॉक्टरों का अगला कदम सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा।
सरकार के आश्वासन पर डॉक्टरों की नजर
फिलहाल तीन दिनों के लिए कामबंद हड़ताल टलने के बाद सरकार और जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के बीच बातचीत के अगले दौर पर सबकी नजर है। यदि इस अवधि में 17 सूत्रीय मांगों पर कोई ठोस प्रगति होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की स्थिति टल सकती है। वहीं, मांगों पर समाधान नहीं निकलने की स्थिति में 24 सितंबर से प्रस्तावित आंदोलन को लेकर JDA आगे का फैसला लेगा।
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