Ambikapur News : तालाब की जमीन की प्लाटिंग मामले में FIR के निर्देश, आदिवासी भूमि के कथित फर्जी अंतरण और दस्तावेजों में गड़बड़ी का मामला सामने आया, कई लोगों की भूमिका संदेहास्पद

अंबिकापुर में तालाब की जमीन पर कथित अवैध प्लाटिंग के मामले में कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। तहसीलदार को जांच कर संबंधित लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश जारी किए गए हैं।

Ambikapur News : अंबिकापुर प्रतीक्षा बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित कथित तालाब की जमीन को पाटकर प्लाटिंग किए जाने की शिकायत की जांच के बाद सरगुजा कलेक्टर ने मामले में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। अंबिकापुर स्थित खसरा नंबर 3714 की करीब 0.231 हेक्टेयर भूमि के संबंध में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अंबिकापुर की जांच रिपोर्ट में भूमि के कथित अवैध अंतरण, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और गलत वारिसान बताकर नामांतरण कराने जैसी गंभीर अनियमितताएं सामने आने की बात कही गई है। कलेक्टर ने तहसीलदार अंबिकापुर को संबंधित लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराकर पालन प्रतिवेदन तत्काल प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह पूरी जांच अंबिकापुर के सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश मिश्रा के द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर कराई गई है।

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मास्टर प्लान में तालाब के रूप में दर्ज होने का दावा

कलेक्टर कार्यालय से 23 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बताया था कि प्रतीक्षा बस स्टैंड के पास स्थित खसरा नंबर 3714 की जमीन नगर निगम के मास्टर प्लान-2021 में तालाबों की सूची में शामिल है। शिकायत में इसे करीब 6.25 एकड़ क्षेत्रफल वाले तालाब के रूप में दर्ज होने और आसपास के लोगों द्वारा निस्तारी, नहाने, कपड़े धोने तथा मवेशियों को पानी पिलाने के लिए उपयोग किए जाने का उल्लेख किया गया था। पूर्व में वर्ष 2002 में यहां छठ घाट बनाए जाने और छठ पूजा होने की बात भी शिकायत में कही गई थी।

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तालाब क्षेत्र को पाटकर प्लाटिंग की शिकायत

शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रश्नाधीन भूमि के जल क्षेत्र को पाटकर प्लाटिंग की जा रही है। मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अंबिकापुर से कराई गई। जांच के दौरान भूमि के पुराने राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई, जिसमें भूमि के स्वामित्व और उसके अंतरण को लेकर कई सवाल सामने आए।

आदिवासी भूमि को लेकर जांच में गंभीर अनियमितता

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, भूमि वर्ष 1954-55 से पहले जैलाल पिता बोधन, जाति गोंड़ के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी। रिपोर्ट में जैलाल को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताया गया है। आरोप है कि बाद में जैलाल के स्थान पर दूसरे व्यक्ति से संबंधित जानकारी का इस्तेमाल कर उनके वारिसों के नाम से भूमि का नामांतरण कराया गया और इसके बाद गैर-आदिवासी व्यक्ति के पक्ष में भूमि का पंजीकृत बैनामा कराया गया।

मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम रिकॉर्ड में दर्ज नहीं मिला

जांच में जैलाल पिता बोधन की मृत्यु को लेकर भी दस्तावेजों में विरोधाभास सामने आने की बात कही गई है। अलग-अलग लोगों द्वारा उनकी मृत्यु की तारीख 12 अप्रैल 1963 और 23 अप्रैल 1976 बताई गई। वहीं जांच रिपोर्ट में नगर पालिक निगम अंबिकापुर की ओर से दी गई जानकारी का हवाला देते हुए कहा गया है कि 23 अप्रैल 1976 की मृत्यु से संबंधित प्रमाण पत्र नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है और यह प्रमाण पत्र नगर निगम द्वारा जारी नहीं किया गया था।

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पटवारी की जानकारी का कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति के वारिसान में इस्तेमाल

जांच रिपोर्ट में अमलभिट्ठी के पटवारी के बयान का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, पटवारी ने जयलाल पिता देवराम के वारिसों की जानकारी तैयार कर उपलब्ध कराई थी। आरोप है कि इसी जानकारी का इस्तेमाल जैलाल पिता बोधन के वारिसों के रूप में करते हुए राजस्व अभिलेखों में फौती नामांतरण की कार्रवाई के लिए किया गया।

कई विक्रेताओं की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जांच रिपोर्ट में चन्द्रशेखर यादव और खरीदार आजाद इराकी की भूमिका को प्रमुख बताते हुए अन्य सहखातेदारों और विक्रेताओं की संलिप्तता भी प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताए जाने का उल्लेख है। इनमें नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा, जनकुंवर, चन्द्रभान यादव और मीरा यादव सभी जाति बरगाह सभी निवासी ग्राम अमलभिट्ठी तहसील लखनपुर जिला सरगुजा के नाम शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इन लोगों ने भी कथित तौर पर जैलाल पिता बोधन के वारिस बनकर भूमि का विक्रय किया।

पंचायत पदाधिकारियों की भूमिका पर भी उठे सवाल

जांच रिपोर्ट में ग्राम पंचायत अमलभिट्ठी के सचिव और सरपंच की भूमिका को भी संदेहास्पद बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पंचायत क्षेत्र में जयलाल पिता देवराम की भूमि और उनके वारिस मौजूद होने के बावजूद जयलाल पिता बोधन के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराने के लिए पंचनामा तैयार किया गया।

कलेक्टर ने FIR दर्ज कराने के दिए निर्देश

जांच रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने तहसीलदार अंबिकापुर को संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। आदेश में चन्द्रशेखर यादव, आजाद इराकी समेत अन्य नामित विक्रेताओं के विरुद्ध कथित छलकपट, धोखाधड़ी और फर्जी एवं दोषपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर भूमि अंतरण से संबंधित कार्रवाई कराने को कहा गया है। साथ ही FIR दर्ज कराने के बाद उसका पालन प्रतिवेदन अविलंब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

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