Ram Mandir Chargesheet : अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम से कथित चोरी के मामले में पुलिस ने एंटी करप्शन कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इसकी जांच और विवेचना को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अयोध्या बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद तिवारी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक पैनल ने चार्जशीट की समीक्षा की और इसमें कई खामियां होने का दावा किया।
अधिवक्ताओं ने करीब 70 मिनट तक की चर्चा
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष की अगुवाई में हुई बैठक में अधिवक्ताओं ने मामले की विवेचना और पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यह चर्चा करीब 70 मिनट तक चली। वकीलों का दावा है कि जांच के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने चार्जशीट की प्रक्रिया और उसमें शामिल तथ्यों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज की हैं।
जिन पर जांच की मांग थी, उन्हें बनाया गवाह
अधिवक्ताओं का मुख्य आरोप है कि जिन लोगों के खिलाफ पहले जांच की मांग की गई थी, उन्हें चार्जशीट में आरोपी बनाने के बजाय गवाह बना दिया गया है। वकीलों के मुताबिक, तत्कालीन राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, गोपाल राव और कृष्ण मोहन सहित कुछ लोगों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी।
चार लोगों की भूमिका पर उठाए सवाल
बार एसोसिएशन के अनुसार, अधिवक्ताओं को पहले यह आश्वासन दिया गया था कि शिकायत में जिन लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, उन्हें जांच के दायरे में शामिल किया जाएगा। हालांकि, चार्जशीट सामने आने के बाद वकीलों का कहना है कि संबंधित लोगों को आरोपी बनाने के बजाय गवाह के तौर पर शामिल किया गया है। इसी बिंदु को लेकर अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई है।
बरामदगी और केस प्रॉपर्टी को लेकर सवाल
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद तिवारी ने कथित चोरी की रकम की बरामदगी और केस प्रॉपर्टी से जुड़े पहलुओं पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि चोरी की रकम का स्पष्ट हिसाब और उससे जुड़ी जानकारी जांच में पूरी तरह सामने नहीं आई है। इसके अलावा जिन लोगों से कथित बरामदगी का दावा किया गया है, उनकी भूमिका को लेकर भी अधिवक्ताओं ने सवाल उठाए हैं।
करीब 40 हजार पन्नों की चार्जशीट का दावा
अधिवक्ताओं की ओर से दावा किया गया कि पुलिस की चार्जशीट करीब 40 हजार पन्नों की है। हालांकि, वकीलों ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने चार्जशीट के सभी पन्नों का स्वयं पूरी तरह अध्ययन नहीं किया है। इसके बावजूद बैठक में उपलब्ध जानकारी और मामले से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर जांच की प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल
वकीलों ने मामले की जांच में शामिल एजेंसियों की मौजूदगी और उनकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जांच को निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ाने के बजाय कुछ आरोपियों को बचाने का प्रयास किया गया। हालांकि, ये आरोप अधिवक्ताओं की ओर से लगाए गए हैं और इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित अदालत और जांच प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
कानूनी विशेषज्ञों की टीम ने रखे तर्क
कालिका प्रसाद तिवारी ने दावा किया कि बार एसोसिएशन की लीगल एक्सपर्ट टीम में आपराधिक मामलों के अनुभवी अधिवक्ता शामिल हैं। उनके अनुसार, टीम के सदस्यों ने चार्जशीट में मौजूद बिंदुओं पर अपने तर्क रखे, लेकिन बैठक में मौजूद सरकारी पक्ष की ओर से उन तर्कों का संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अब मामले की निष्पक्ष समीक्षा जरूरी है।
दोबारा समीक्षा और निष्पक्ष जांच की मांग
अधिवक्ताओं ने मांग की है कि पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट की दोबारा समीक्षा की जाए। साथ ही जिन लोगों के खिलाफ पहले शिकायत या जांच की मांग की गई थी, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष तरीके से जांच हो। अब इस मामले में अदालत और संबंधित जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
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