MP OBC Reservation : दिशा सालियान की मौत से जुड़े मामले में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने उनके पिता सतीश सालियान की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस का जवाब दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमन सिन्हा के माध्यम से भेजे गए जवाब में ठाकरे ने अपने पहले के रुख को दोहराया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने दिशा सालियान को कभी नहीं देखा और न ही वह उन्हें जानते थे।
अपने बयान पर कायम रहने की बात कही
आदित्य ठाकरे की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि वह अपने पहले दिए गए बयान पर पूरी तरह कायम हैं। उन्होंने दिशा सालियान से किसी तरह के व्यक्तिगत संबंध या मुलाकात से इनकार किया है। साथ ही ठाकरे पक्ष ने कहा कि वह मामले की निष्पक्ष और आधिकारिक जांच का समर्थन करते हैं तथा किसी भी कानूनी प्रक्रिया से बचने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।
500 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा खारिज
सतीश सालियान की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस में कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये के मुआवजे और सार्वजनिक माफी की मांग की गई थी। ठाकरे के जवाब में इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया गया है। उनके वकील ने 500 करोड़ रुपये की मांग को मनमाना, आधारहीन और कानूनी रूप से अमान्य बताया है। साथ ही सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग को भी स्वीकार नहीं किया गया।
16 सितंबर की पोस्ट को लेकर सफाई
कानूनी जवाब में आदित्य ठाकरे की 16 सितंबर 2026 को ‘X’ पर की गई पोस्ट का भी उल्लेख किया गया है। उनके वकील ने कहा कि उस पोस्ट में सतीश सालियान का नाम नहीं लिया गया था और न ही उनकी ओर कोई व्यक्तिगत संकेत किया गया था। जवाब के मुताबिक, यह पोस्ट उन राजनीतिक विरोधियों और मीडिया के एक वर्ग के संदर्भ में थी, जो लंबे समय से आदित्य ठाकरे का नाम दिशा सालियान मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
अदालतों के आदेशों का दिया हवाला
ठाकरे की कानूनी टीम ने अपने जवाब में बॉम्बे हाईकोर्ट और सेशन कोर्ट के पूर्व आदेशों का भी हवाला दिया। जवाब में कहा गया कि दिशा सालियान की मौत के तत्काल बाद उनके परिवार या माता-पिता की ओर से दर्ज शिकायतों और दिए गए बयानों तथा बाद के बयानों के बीच अंतर का उल्लेख अदालतों में हुआ है। ठाकरे पक्ष ने कहा कि अदालतों ने किसी व्यक्ति को दोषी या आरोपी नहीं ठहराया है।
जांच एजेंसियों की भूमिका पर जोर
जवाब में कहा गया कि किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोपों को ठोस सबूतों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। ठाकरे के वकील ने जांच एजेंसियों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि CBI या SIT की जांच में यदि कोई ठोस प्रमाण सामने आता है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत देखा जाना चाहिए। ठाकरे पक्ष ने न्यायिक प्रक्रिया में विश्वास जताया है।
निष्पक्ष जांच से पीछे हटने से इनकार
आदित्य ठाकरे की ओर से स्पष्ट किया गया कि वह आधिकारिक कानूनी जांच और निष्पक्ष जांच का समर्थन करते हैं। उनके पक्ष के अनुसार, वह जांच से भाग नहीं रहे हैं और न ही किसी वैधानिक प्रक्रिया से बचने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने बिना प्रमाण लगाए जा रहे आरोपों और मीडिया ट्रायल का विरोध करने के अपने अधिकार की बात कही है।
कानूनी विवाद में आगे क्या होगा
सतीश सालियान के नोटिस के जवाब के बाद अब यह मामला कानूनी और सार्वजनिक बहस में आगे बढ़ सकता है। ठाकरे पक्ष ने मुआवजे, माफी और पोस्ट हटाने की मांग को अस्वीकार करते हुए अपने पुराने रुख को दोहराया है। वहीं मामले से जुड़े आरोपों और जांच की स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों और अदालतों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
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