Nandigram Bypoll: पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर उपचुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी हसीरानी रथ के चुनावी हलफनामे को लेकर विवाद सामने आया है। कांग्रेस ने हसीरानी रथ के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनावी हलफनामे में उनकी उम्र और शैक्षणिक योग्यता से संबंधित जानकारी में विसंगतियां हैं। पार्टी ने इस मामले में अदालत से दस्तावेजों की जांच कराने और तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की मांग की है।
जन्म वर्ष और 10वीं की जानकारी पर सवाल
कांग्रेस नेता और अधिवक्ता रित्जू घोषाल ने अदालत के समक्ष हलफनामे में दर्ज जानकारियों का हवाला देते हुए सवाल उठाया। कांग्रेस के मुताबिक, हसीरानी रथ ने हलफनामे में अपना जन्म वर्ष 1966 बताया है, जबकि उसमें 1965 में माध्यमिक यानी 10वीं परीक्षा पास करने की जानकारी दर्ज है। कांग्रेस का कहना है कि दोनों जानकारियों के बीच स्पष्ट विसंगति दिखाई देती है और इसी वजह से मूल दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
स्कूल के रिकॉर्ड को लेकर भी दावा
कांग्रेस ने हसीरानी रथ द्वारा हलफनामे में बताए गए स्कूल की शैक्षणिक मान्यता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी के अनुसार, चौखाली गंगा पद्म मिलन कन्या विद्यापीठ की शुरुआत 1963 में हुई थी। कांग्रेस का दावा है कि शुरुआती दौर में इस विद्यालय में केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई होती थी। पार्टी के मुताबिक, स्कूल को दसवीं कक्षा तक पढ़ाने की सरकारी मंजूरी बाद में 1973 में मिली थी।
चुनाव आयोग की भूमिका पर कांग्रेस का सवाल
कांग्रेस नेता रित्जू घोषाल ने यह भी सवाल उठाया कि चुनावी हलफनामे की जांच चुनाव आयोग द्वारा की गई थी, लेकिन कथित विसंगति को लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस ने अदालत से मांग की है कि यदि हसीरानी रथ की शैक्षणिक योग्यता या अन्य जानकारी गलत साबित होती है, तो उनकी उम्मीदवारी पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार विचार किया जाए। याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई प्रस्तावित है।
BJP ने आरोपों को बताया टाइपिंग की गलती
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया है। BJP की ओर से कहा गया कि हसीरानी रथ की उम्र को लेकर कोई वास्तविक विवाद नहीं है। पार्टी के मुताबिक, चुनावी हलफनामे में दर्ज वर्ष संबंधी जानकारी केवल टाइपिंग की गलती के कारण गलत हो गई। BJP ने कहा कि हसीरानी ने वर्ष 1980 में दसवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की थी और उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर लगाए गए आरोप सही नहीं हैं।
हसीरानी के कार्यालय ने दी अलग जानकारी
हसीरानी रथ के नंदीग्राम स्थित कार्यालय की ओर से भी इस मामले में सफाई दी गई है। कार्यालय के मुताबिक, उनका जन्म वर्ष 1965 है और उन्होंने वर्ष 1980 में दसवीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की थी। कार्यालय ने कहा कि उन्होंने उस समय पश्चिम बंगाल में लागू माध्यमिक परीक्षा व्यवस्था के तहत मैट्रिक की परीक्षा पास की थी। अब अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर इन दावों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मूल दस्तावेजों की जांच हो सकती है
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत हसीरानी रथ की ओर से जवाब मांग सकती है। इसके लिए जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल रिकॉर्ड, परीक्षा प्रमाणपत्र और नामांकन से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण हो सकते हैं। खासतौर पर यह जांच का विषय रहेगा कि हलफनामे में 1965 का उल्लेख वास्तव में दसवीं परीक्षा पास करने के वर्ष के तौर पर हुआ है या यह किसी प्रकार की लिखित अथवा टाइपिंग संबंधी त्रुटि है।
चुनाव आयोग से भी मांगा जा सकता है जवाब
कांग्रेस ने चुनाव आयोग की ओर से हलफनामे की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया है। ऐसे में अदालत जरूरत पड़ने पर आयोग से भी इस मामले में जवाब मांग सकती है। हालांकि, किसी दस्तावेज में विसंगति सामने आना और उसके आधार पर किसी उम्मीदवार की उम्मीदवारी कानूनी रूप से रद्द होना अलग-अलग विषय हैं। अदालत को मामले के तथ्यों और लागू चुनावी कानूनों के आधार पर इसका परीक्षण करना होगा।
6 अक्टूबर को होना है नंदीग्राम उपचुनाव
नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव प्रस्तावित है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। हसीरानी रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के पूर्व निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं। चंद्रनाथ रथ की 4 मई को बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने के दो दिन बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अब उपचुनाव से पहले प्रत्याशी के हलफनामे को लेकर उठे सवालों पर अदालत की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी।
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