IMEC Corridor : अमेरिका के पूर्व नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जॉन बोल्टन ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे यानी IMEC की आर्थिक संभावनाओं को महत्वपूर्ण बताया है। हालांकि, उन्होंने इसके साथ मध्य पूर्व की मौजूदा सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंता भी जताई। बोल्टन के मुताबिक, क्षेत्र में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की मौजूदा सरकार के रहते इस क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता हासिल करना मुश्किल होगा।
2023 में सामने आया था भारत-मध्य पूर्व-यूरोप कॉरिडोर
भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान सामने आया था। इसका उद्देश्य भारत, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच व्यापार तथा कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। प्रस्तावित ढांचे में समुद्री और रेल संपर्क के साथ ऊर्जा एवं डिजिटल कनेक्टिविटी भी शामिल है। कॉरिडोर को भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क के लिए एक बहु-माध्यमीय नेटवर्क के रूप में देखा जाता है।
ईरान को लेकर सुरक्षा जोखिम की बात
बोल्टन ने कहा कि भारत, पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संपर्क बढ़ना एक स्वाभाविक रणनीतिक विकास है। हालांकि, उनके मुताबिक मध्य पूर्व में जारी सुरक्षा चुनौतियां इस तरह की परियोजनाओं और व्यापारिक आवाजाही के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। उन्होंने विशेष रूप से समुद्री चोकपॉइंट्स का जिक्र करते हुए कहा कि इन मार्गों पर अस्थिरता का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
होर्मुज और बाब-अल-मंदब पर भी चिंता
बोल्टन ने अपने आकलन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और बाब-अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों का उल्लेख किया। हाल के सप्ताहों में होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय तनाव ने समुद्री व्यापार को प्रभावित किया है। रॉयटर्स के अनुसार सितंबर की शुरुआत में होर्मुज से गुजरने वाले कुछ कमोडिटी जहाजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि बाब-अल-मंदब में आवाजाही बढ़ी थी।
ट्रंप प्रशासन की क्षेत्रीय नीति पर बोल्टन की टिप्पणी
बोल्टन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की मध्य पूर्व नीति पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के पास क्षेत्र के लिए पर्याप्त रूप से स्पष्ट रणनीति नहीं है और वह अलग-अलग भू-राजनीतिक मुद्दों को अलग-अलग तरीके से देखता है। यह बोल्टन का राजनीतिक आकलन है, न कि अमेरिकी प्रशासन की आधिकारिक नीति का वर्णन।
ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर बोल्टन का दावा
बोल्टन ने आगे कहा कि उनके आकलन में मध्य पूर्व में स्थायी शांति और सुरक्षित व्यापारिक गलियारों के लिए ईरान की मौजूदा सरकार से जुड़े सुरक्षा जोखिमों का समाधान जरूरी है। उन्होंने सत्ता परिवर्तन को क्षेत्रीय स्थिरता से जोड़ा। हालांकि, यह बोल्टन की राजनीतिक राय है और इसे किसी स्थापित अंतरराष्ट्रीय सहमति या आधिकारिक नीति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
ट्रंप पहले ही IMEC के समर्थन की बात कह चुके हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल में IMEC के प्रति अपने प्रशासन के समर्थन की पुष्टि की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान खाड़ी और अरब नेताओं के साथ बैठक में ट्रंप ने कहा कि मध्य पूर्व की ऊर्जा अवसंरचना को ईरान से जुड़े संवेदनशील मार्गों से दूर करने की जरूरत है। उन्होंने IMEC और तेल के लिए पाइपलाइन जैसे वैकल्पिक रास्तों का समर्थन किया।
IMEC के लिए बदले हालात क्यों अहम हैं
क्षेत्रीय तनाव के बीच IMEC की चर्चा अब केवल व्यापार और कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक परिवहन मार्गों से भी जुड़ रही है। अमेरिका की ओर से भी मध्य पूर्व की ऊर्जा आपूर्ति को अधिक विविध और कम संवेदनशील मार्गों से जोड़ने की कोशिशों पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री मार्गों की स्थिति और भारत-खाड़ी-यूरोप कनेक्टिविटी इस परियोजना की दिशा को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दे रहेंगे।
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