SIR Controversy : कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। 24 सितंबर को केरल के वायनाड में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान कोई अवैध या अनुचित कार्रवाई हुई है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई होनी चाहिए।
CEC ज्ञानेश कुमार पर कार्रवाई की मांग
प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि जांच में चुनावी प्रक्रिया या मतदाता सूची से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी नाम लेते हुए आपराधिक मुकदमे की मांग की। यह बयान ऐसे समय आया है, जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया और मतदाता नामों से जुड़े मामलों पर बहस तेज है।
13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने का मुद्दा
SIR को लेकर कांग्रेस लगातार मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मुद्दा उठा रही है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम बाहर हुए। हालांकि, नाम हटने के कारण अलग-अलग रहे हैं और अंतिम सूची से पहले आपत्ति, जांच और पुनरीक्षण की प्रक्रियाएं भी लागू की गईं।
चुनाव आयोग के भीतर 14 बार आपत्तियों का दावा
SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट भी सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाली सहित कई प्रक्रियाओं को लेकर उनके सवालों का उल्लेख है।
Form-6 और ECINet को लेकर भी उठे सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 और मतदाता डेटाबेस से संबंधित व्यवस्थाएं भी शामिल थीं। इसके अलावा ECINet प्रणाली के केंद्रीकरण और राज्य स्तर के अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन आपत्तियों ने चुनावी डेटा और निर्णय प्रक्रिया में तकनीकी व्यवस्था की भूमिका को चर्चा में ला दिया है।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला चर्चा में
SIR विवाद के बीच गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इन मतदाताओं के मामलों की स्थानीय निर्वाचन अधिकारियों ने जांच की थी और उन्हें पात्र पाया गया था। इसके बावजूद 21 फरवरी को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में उनके नाम शामिल नहीं हो सके। गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इस संबंध में चुनाव आयोग को सात दिनों के भीतर आठ ईमेल भेजे थे।
ECINet में नाम बहाल करने की तकनीकी बाधा
रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के सामने समस्या यह थी कि ECINet के जरिए पहले हटाए गए नामों को दोबारा शामिल करने की सुविधा उनके स्तर पर उपलब्ध नहीं थी। गोवा के अधिकारियों ने आयोग को इस बारे में जानकारी दी थी। एक उप चुनाव आयुक्त ने आईटी महानिदेशक को पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की बात कही थी।
SIR पर राजनीतिक बहस हुई तेज
गोवा के 97 मतदाताओं और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों के बाद SIR को लेकर राजनीतिक विवाद और बढ़ गया है। कांग्रेस नेताओं ने इन घटनाओं को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं, सामने आए मामलों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक रिकॉर्ड, संबंधित प्रक्रियाओं और जरूरत पड़ने पर न्यायिक जांच के आधार पर तय होंगे।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर जोर
प्रियंका गांधी ने अपने बयान में चुनावी लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि यदि SIR के दौरान नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। फिलहाल SIR से जुड़े आरोपों, चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और गोवा के मतदाता मामले ने मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पर देशव्यापी चर्चा को तेज कर दिया है।
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