Election Symbol Row : पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा उपचुनाव से पहले चुनाव चिन्ह को लेकर विवाद अदालत पहुंच गया है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी ISF की याचिका पर सुनवाई करते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि पहले ISF को आवंटित किए गए ‘लिफाफा’ चिन्ह को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस (DTC) को देने का आधार क्या था। न्यायमूर्ति कृष्ण राव ने आयोग से इस फैसले के कारण बताने को कहा है।
ISF ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी
ISF नेता नौशाद सिद्दीकी की ओर से दायर याचिका में आयोग के फैसले को चुनौती दी गई है। पार्टी का कहना है कि उसने पहले 2024 लोकसभा चुनाव और 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ‘लिफाफा’ चिन्ह का इस्तेमाल किया था। आगामी उपचुनाव में ISF को ‘अलमारी’ चिन्ह दिए जाने और ‘लिफाफा’ किसी अन्य दल को आवंटित किए जाने पर पार्टी ने आपत्ति जताई है।
अदालत ने आयोग से पूछा फैसले का आधार
सुनवाई के दौरान ISF की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि पार्टी पहले से ‘लिफाफा’ चिन्ह के साथ चुनाव लड़ती रही है और इसी उपचुनाव में भी मैदान में है। ऐसे में उसी चिन्ह को दूसरे दल को देने से मतदाताओं के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके बाद हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से फैसले के पीछे के कारण और परिस्थितियां स्पष्ट करने को कहा।
आयोग ने बताया ‘लिफाफा’ फ्री चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग की ओर से अदालत में दलील दी गई कि ISF एक गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल है और उसे किसी चुनाव चिन्ह पर स्थायी अधिकार प्राप्त नहीं है। आयोग के मुताबिक, ISF को ‘लिफाफा’ चिन्ह पहले सीमित चुनावों के लिए आवंटित किया गया था। आयोग ने यह भी कहा कि गैर-मान्यता प्राप्त दलों को उपचुनाव में उपलब्ध फ्री सिंबल सूची से चिन्ह आवंटित किया जा सकता है।
ISF ने निष्पक्ष तरीके से शक्ति इस्तेमाल करने का मुद्दा उठाया
ISF की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि भले ही पार्टी को ‘लिफाफा’ चिन्ह पर स्थायी अधिकार न हो, लेकिन आयोग को अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उचित तरीके से करना चाहिए। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब वह उसी उपचुनाव में उम्मीदवार उतार चुकी थी और प्रचार सामग्री तैयार हो चुकी थी, तब उसी चिन्ह को किसी अन्य दल को आवंटित करने का निर्णय क्यों लिया गया।
DTC को कैसे मिला ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह
चुनाव आयोग ने हालिया घटनाक्रम के बीच ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह आवंटित किया। यह घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे विवाद के बाद सामने आया। आयोग ने मूल तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले चिन्ह के इस्तेमाल को अंतरिम रूप से रोक दिया था।
ISF को मिला ‘अलमारी’ चुनाव चिन्ह
‘लिफाफा’ चिन्ह DTC को दिए जाने के बाद चुनाव आयोग ने ISF को आगामी उपचुनाव के लिए ‘अलमारी’ चिन्ह आवंटित किया। ISF ने इसी फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया। पार्टी का कहना है कि उसने पहले से ‘लिफाफा’ चिन्ह के साथ प्रचार शुरू कर रखा था और अचानक बदलाव से चुनावी अभियान पर असर पड़ सकता है।
नंदीग्राम और रेजीनगर में होने हैं उपचुनाव
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना निर्धारित है। ऐसे में चुनाव चिन्ह का विवाद उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। ISF ने नंदीग्राम से उम्मीदवार उतारा है और पार्टी के प्रचार में पहले ‘लिफाफा’ चिन्ह का इस्तेमाल किया गया था।
हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा जवाब
मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत से जवाब देने के लिए समय मांगा था। इसके बाद हाईकोर्ट ने मामले को आगे सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। अब आयोग को यह स्पष्ट करना है कि ‘लिफाफा’ चिन्ह DTC को आवंटित करने के पीछे कौन से नियम और परिस्थितियां थीं। अदालत के समक्ष इसी मुद्दे पर आयोग का जवाब महत्वपूर्ण रहेगा।
उपचुनाव से पहले चुनाव चिन्ह विवाद बढ़ा
नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले सामने आया यह मामला चुनाव चिन्ह आवंटन की प्रक्रिया को लेकर कानूनी बहस का विषय बन गया है। एक ओर आयोग का कहना है कि गैर-मान्यता प्राप्त दलों को फ्री सिंबल सूची से चिन्ह आवंटित किए जा सकते हैं, वहीं ISF ने उसी चुनाव में पहले इस्तेमाल किए गए चिन्ह को दूसरे दल को देने के फैसले पर सवाल उठाया है। हाईकोर्ट अब आयोग के जवाब के आधार पर मामले को आगे सुनेगा।
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