SEBI Action : भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने रिन्यूअल फीस का भुगतान नहीं करने पर Religare Capital Markets समेत 12 रिसर्च एनालिस्ट इकाइयों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द कर दिए हैं। बाजार नियामक की ओर से 23 सितंबर 2026 को जारी आदेश में कहा गया कि संबंधित संस्थाओं को अपने रजिस्ट्रेशन को वैध बनाए रखने के लिए जरूरी फीस जमा करने के पर्याप्त अवसर दिए गए थे। इसके बावजूद निर्धारित शुल्क का भुगतान नहीं किया गया।
पांच साल के लिए देनी होती है रिन्यूअल फीस
SEBI के Research Analysts Regulations के तहत रजिस्टर्ड रिसर्च एनालिस्ट को अपना रजिस्ट्रेशन जारी रखने के लिए निर्धारित अवधि पर रिन्यूअल फीस जमा करनी होती है। संबंधित 12 संस्थाओं के लिए यह फीस मई 2024 से नवंबर 2025 के बीच देय थी। तय समयसीमा गुजरने के बाद भी फीस जमा नहीं होने पर नियामक ने इस मामले में समरी प्रोसीडिंग शुरू की।
नोटिस मिलने के बाद भी नहीं मिला भुगतान का सबूत
SEBI ने मामले में संबंधित संस्थाओं को अलग-अलग समय पर कारण बताओ नोटिस जारी किए। रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी 2025, मई 2026 और अगस्त 2026 में नोटिस भेजे गए। संस्थाओं की तरफ से जवाब जरूर दाखिल किए गए, लेकिन नियामक के अनुसार वे यह साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं कि रिन्यूअल फीस का भुगतान किया गया था। इसके बाद SEBI ने रजिस्ट्रेशन रद्द करने की कार्रवाई की।
इन 12 रिसर्च एनालिस्ट का रजिस्ट्रेशन हुआ रद्द
रजिस्ट्रेशन रद्द होने वाली संस्थाओं में Religare Capital Markets, Indeed Research, WSA Equity and Financial Research, IndiaNivesh Securities और Espirito Santo Securities India शामिल हैं। इसके अलावा Sunil Kumar Dhavala, Magnum Capital Advisors और Ravi Kiran Kulkarni समेत अन्य रिसर्च एनालिस्ट भी इस सूची में हैं। SEBI के आदेश के अनुसार संबंधित रजिस्ट्रेशन अब प्रभावी नहीं रहेंगे।
एक्सपायर रजिस्ट्रेशन के इस्तेमाल पर रोक
नियामक ने रजिस्ट्रेशन रद्द करने के पीछे एक अहम वजह भी बताई है। SEBI के मुताबिक, ऐसे सर्टिफिकेट जिनकी वैधता समाप्त हो चुकी है, उनका इस्तेमाल करके निवेशकों को किसी तरह की गलतफहमी या भ्रम की स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए। कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना भी है कि निवेशकों के सामने केवल वैध रूप से पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट ही अपनी सेवाएं प्रस्तुत करें। SEBI की आधिकारिक सूची में रद्द या एक्सपायर इंटरमीडियरीज के लिए अलग रिकॉर्ड भी उपलब्ध हैं।
रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद भी पुरानी जिम्मेदारी कायम
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित संस्थाओं की पिछली गतिविधियों से जुड़ी जिम्मेदारियां समाप्त हो जाएंगी। जिन कार्यों को उन्होंने रिसर्च एनालिस्ट के तौर पर किया या नहीं किया, उनके संबंध में लागू जिम्मेदारियां बनी रहेंगी। यानी रजिस्ट्रेशन समाप्त होने के बाद भी पहले की गतिविधियों से जुड़े नियामकीय दायित्व खत्म नहीं होंगे।
निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आदेश
रिसर्च एनालिस्ट शेयर बाजार में कंपनियों और प्रतिभूतियों से संबंधित शोध एवं विश्लेषण उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। SEBI के रिकॉर्ड के अनुसार 23 सितंबर 2026 तक 2,220 रिसर्च एनालिस्ट पंजीकृत थे। ऐसे में रजिस्ट्रेशन की वैधता निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होती है। नियामक की कार्रवाई यह सुनिश्चित करने की दिशा में है कि बाजार में रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम करने वाली इकाइयां निर्धारित पंजीकरण और शुल्क संबंधी नियमों का पालन करें।
SEBI ने नियमों के पालन का दिया संकेत
इस कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि SEBI रजिस्टर्ड मार्केट इंटरमीडियरीज के लिए निर्धारित अनुपालन नियमों को लेकर कार्रवाई कर रहा है। रिन्यूअल फीस जमा नहीं करने के मामले में संबंधित संस्थाओं को नोटिस और जवाब का अवसर देने के बाद रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया। नियामक के आदेश का उद्देश्य वैध पंजीकरण व्यवस्था बनाए रखना और निवेशकों के हितों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
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