RG Kar Case: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर के रेप और हत्या मामले में पीड़ित परिवार ने एक बार फिर गंभीर आरोप सामने रखे हैं। परिवार की ओर से कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष दावा किया गया कि घटना के बाद मामले को दबाने की कोशिश की गई। परिवार ने जांच और घटना के शुरुआती दौर से जुड़े कई सवाल अदालत के सामने रखे हैं।
पिता पर कथित दबाव को लेकर परिवार का दावा
पीड़ित परिवार की ओर से अदालत में आरोप लगाया गया कि अभया के पिता पर बंदूक की नोक पर पैसे लेने और मामला वापस लेने का कथित दबाव बनाया गया था। हालांकि, यह परिवार की ओर से किया गया दावा है और इस आरोप की पुष्टि न्यायिक निष्कर्ष के तौर पर नहीं हुई है। मामले में लगाए गए ऐसे आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियों और अदालत की प्रक्रिया के तहत हो रही है।
पुलिस की शुरुआती कार्रवाई पर भी उठे सवाल
परिवार ने पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी आपत्ति जताई है। उनका आरोप है कि घटना के बाद मामले की गंभीरता को कम करने या उसे दबाने की कोशिश की गई। आरजी कर मामले की जांच पहले स्थानीय पुलिस के पास थी, जिसके बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से जांच CBI को सौंपी गई थी।
CBI जांच को लेकर परिवार ने जताई असंतुष्टि
पीड़ित परिवार ने जांच की गति और उसके कुछ पहलुओं को लेकर भी अपनी असहमति जताई है। सितंबर 2026 में CBI की नई जांच टीम ने मामले में 13वीं स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की थी। एजेंसी ने बताया था कि दस्तावेजों, CCTV फुटेज, मेडिकल और फॉरेंसिक रिपोर्ट सहित विभिन्न सामग्री की जांच की गई है। परिवार की ओर से हालांकि कई अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
हाई कोर्ट ने ‘हश-अप’ आरोपों की जांच के आदेश दिए
मई 2026 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले को दबाने यानी कथित ‘हश-अप’ से जुड़े आरोपों की जांच के लिए CBI की तीन सदस्यीय SIT गठित करने का निर्देश दिया था। अदालत ने घटना की रात से लेकर अगले दिन अंतिम संस्कार तक की परिस्थितियों की जांच करने को कहा था। इसमें सबूतों से छेड़छाड़ और घटना को कमतर दिखाने के परिवार के आरोप भी शामिल थे।
जांच में अंतिम संस्कार से जुड़े पहलुओं पर भी फोकस
अदालत के निर्देशों के बाद जांच टीम ने मामले से जुड़े घटनाक्रम के विभिन्न चरणों की पड़ताल की। CBI की ओर से अदालत में बताया गया कि टीम ने उस स्थान का भी दौरा किया जहां पीड़िता का अंतिम संस्कार हुआ था। इससे जांच का दायरा केवल अस्पताल में हुई घटना तक सीमित नहीं रहने और उसके बाद की परिस्थितियों की भी जांच किए जाने का संकेत मिलता है।
हाई कोर्ट ने CBI को जांच आगे बढ़ाने का समय दिया
अगस्त 2026 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने CBI को जांच पूरी करने के लिए तीन सप्ताह की समयसीमा दी थी। अदालत ने कहा था कि जांच के निष्कर्ष तक पहुंचने की दिशा में आगे बढ़ना जरूरी है। कोर्ट ने कुछ लोगों से हुई पूछताछ को भी पर्याप्त नहीं माना था और संबंधित पहलुओं की गहराई से पड़ताल पर जोर दिया था।
मामले में आगे भी जांच जारी रहने की स्थिति
आरजी कर मामले में मुख्य आरोपी संजय रॉय को ट्रायल कोर्ट ने दोषी ठहराकर उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके बावजूद पीड़ित परिवार ने मामले में अन्य संभावित लोगों की भूमिका और घटना के आसपास की परिस्थितियों की जांच की मांग जारी रखी है। CBI की मौजूदा जांच में परिवार की ओर से उठाए गए कुछ मुद्दों पर पड़ताल जारी होने की जानकारी अदालत में दी गई है।
परिवार के दावों पर अब अदालत की प्रक्रिया महत्वपूर्ण
अभया के परिवार की ओर से लगाए गए कथित दबाव और मामले को दबाने के आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही सामने आएगा। फिलहाल परिवार की शिकायतों, CBI की जांच और कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के बीच मामले की आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। अदालत में पेश होने वाली अगली रिपोर्ट और जांच के निष्कर्ष से इन आरोपों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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