Samastipur Crime : बिहार के समस्तीपुर जिले में लड़की से कथित छेड़खानी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। प्रशासन की टीम ने सरकारी जमीन पर बने कथित अवैध और अस्थायी निर्माणों को बुलडोजर की मदद से हटाया। कार्रवाई के दौरान इलाके में प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी रही। अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाना इस अभियान का मुख्य उद्देश्य था।
तीन आरोपियों के निर्माणों पर हुई कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, इस कार्रवाई का असर मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों राहुल, रामबाबू सहनी और अवधेश पासवान से जुड़े कथित अतिक्रमणों पर पड़ा। प्रशासन ने सरकारी जमीन पर बने अलग-अलग निर्माणों की जांच के बाद उन्हें हटाने की कार्रवाई की। अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई जमीन के स्वामित्व और अतिक्रमण से जुड़े नियमों के तहत की गई है।
राहुल की झोपड़ी को प्रशासन ने ढहाया
प्रशासन के मुताबिक, मामले में आरोपी राहुल ने सरकारी जमीन पर कथित तौर पर झोपड़ी बना रखी थी। जांच के बाद प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और बुलडोजर की सहायता से इस अस्थायी निर्माण को पूरी तरह हटा दिया। कार्रवाई के दौरान सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने पर जोर दिया गया। स्थानीय स्तर पर इस कार्रवाई की चर्चा इलाके में बनी हुई है।
रामबाबू सहनी का ढाबा भी हटाया गया
दूसरे आरोपी रामबाबू सहनी के खिलाफ भी प्रशासन ने कार्रवाई की। जानकारी के अनुसार, उसने सरकारी जमीन पर झोपड़ीनुमा ढाबा बना रखा था, जहां लिट्टी और अन्य खाद्य सामग्री बेचने का काम किया जाता था। प्रशासन की टीम ने मौके पर पहुंचकर इस अस्थायी ढांचे को भी हटा दिया। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण सरकारी भूमि पर होने के कारण अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।
अवधेश पासवान की डीलरशिप निलंबित
मामले के तीसरे आरोपी अवधेश पासवान के खिलाफ प्रशासन ने अलग तरह की कार्रवाई की है। वह सरकारी जन वितरण प्रणाली यानी पीडीएस का डीलर बताया जा रहा है। प्रशासन ने उसकी डीलरशिप को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इसके अलावा सरकारी जमीन पर बनी उसकी कथित बाउंड्री वॉल को भी बुलडोजर की मदद से तोड़ा गया।
चौथे आरोपी विकास को भी जारी हुआ नोटिस
मामले में बताए गए चौथे आरोपी विकास के खिलाफ भी सरकारी जमीन पर निर्माण का आरोप है। जानकारी के अनुसार, उसने सरकारी भूमि पर पक्की बाउंड्री वॉल बना रखी है। चूंकि यह निर्माण अस्थायी नहीं बल्कि पक्का बताया गया है, इसलिए प्रशासन ने तत्काल बुलडोजर कार्रवाई करने के बजाय कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे नोटिस जारी किया है।
24 घंटे में अतिक्रमण हटाने का निर्देश
प्रशासन की ओर से विकास को कथित अतिक्रमण हटाने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि के भीतर यदि निर्माण स्वयं नहीं हटाया गया, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के मुताबिक, आवश्यकता पड़ने पर संबंधित निर्माण को बुलडोजर की सहायता से हटाया जा सकता है।
प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई बताया
इस पूरी कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ स्थानीय लोग इसे छेड़खानी के मामले में आरोपियों के खिलाफ की गई सख्ती से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि बुलडोजर कार्रवाई का आधार सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण है। अधिकारियों के अनुसार, सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराना प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा है।
कानून व्यवस्था के बीच कार्रवाई पर नजर
छेड़खानी के मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन की ओर से की गई इस कार्रवाई ने स्थानीय स्तर पर ध्यान खींचा है। फिलहाल मामले में पुलिस की कानूनी प्रक्रिया और अतिक्रमण हटाने से संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई अलग-अलग स्तर पर जारी है। आरोपियों के खिलाफ दर्ज मूल मामले में आगे की कार्रवाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार होगी।
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