Ambikapur Ring Bandh Land Fraud: अंबिकापुर के प्रतीक्षा बस स्टैंड और रिंग रोड के पास स्थित रिंगबांध की जमीन को लेकर कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि आदिवासी वर्ग के नाम दर्ज जमीन का फर्जी दस्तावेजों के जरिए नामांतरण कराया गया और बाद में उसकी रजिस्ट्री गैर-आदिवासी व्यक्ति के नाम कर दी गई। मामले की शिकायत मिलने के बाद सरगुजा कलेक्टर ने प्रशासनिक जांच के निर्देश दिए थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर के आदेश के बाद पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
प्रशासनिक जांच में दस्तावेजों और जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल की गई। जांच के बाद कलेक्टर ने तहसीलदार को संबंधित लोगों के खिलाफ थाने में FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए। मामले में जमीन के खरीदार आजाद इराकी और विक्रेता चंद्रशेखर यादव समेत अन्य लोगों की भूमिका जांच के दायरे में बताई गई है। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए मुख्य आरोपी आजाद इराकी को रायपुर से गिरफ्तार किया है।
1954-55 से आदिवासी व्यक्ति के नाम दर्ज थी जमीन
जांच रिपोर्ट के अनुसार, खसरा नंबर 3714 की जमीन वर्ष 1954-55 से पहले से जैलाल पिता बोधन, जाति गोंड के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज थी। जांच में इस भूमि को अनुसूचित जनजाति वर्ग से संबंधित बताया गया है। प्रशासनिक रिपोर्ट में आरोप है कि बाद में दस्तावेजों में हेरफेर कर जमीन के वारिसों से संबंधित रिकॉर्ड तैयार किया गया और इसी आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया पूरी कराई गई।
फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र को लेकर भी उठे सवाल
पूरे मामले में कथित फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक है। जांच के दौरान जैलाल की मृत्यु को लेकर अलग-अलग तारीखों का उल्लेख सामने आया। नगर निगम के रिकॉर्ड की जांच में संबंधित मृत्यु प्रमाण पत्र के निगम में दर्ज नहीं होने और उसके निगम द्वारा जारी किए जाने पर भी सवाल सामने आए। प्रशासनिक जांच में इस दस्तावेज के इस्तेमाल को नामांतरण की प्रक्रिया से जोड़कर देखा गया है।
गलत वारिस की जानकारी इस्तेमाल करने का आरोप
जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्राम अमलभिट्ठी के पटवारी द्वारा तैयार की गई एक वारिस संबंधी जानकारी का इस्तेमाल कथित तौर पर दूसरे व्यक्ति के नाम से जुड़ी जमीन के फौती नामांतरण में किया गया। इसके बाद जमीन को आजाद इराकी के नाम रजिस्टर्ड कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ी। प्रशासन ने दस्तावेजों में इस तरह की गड़बड़ियों को गंभीर माना है।
रिंगबांध तालाब की जमीन पर प्लाटिंग का आरोप
यह जमीन केवल राजस्व रिकॉर्ड को लेकर ही चर्चा में नहीं है, बल्कि यहां मिट्टी डालकर जलक्षेत्र को पाटने और प्लाटिंग करने के आरोप भी लगे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, रिंगबांध तालाब का कुल क्षेत्रफल करीब 6.25 एकड़ बताया गया है और यह क्षेत्र स्थानीय लोगों के लिए निस्तारी समेत अन्य उपयोगों से जुड़ा रहा है। मास्टर प्लान में भी इसे तालाबों की सूची में शामिल बताया गया है।
कई लोगों की भूमिका जांच के घेरे में
प्रशासनिक जांच में जमीन के खरीदार और विक्रेता के अलावा अन्य सहखातेदारों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों में नोहरसाय, रामकुमार, श्रीलाल, पूर्णिमा, जनकुंवर, चंद्रभान यादव और मीरा यादव समेत कई नामों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा ग्राम पंचायत के तत्कालीन सरपंच और सचिव की भूमिका को लेकर भी जांच में संदेह जताया गया है।
पुलिस जांच में सामने आएंगे फर्जीवाड़े के अन्य पहलू
कलेक्टर के निर्देश के बाद दर्ज FIR के आधार पर अब पुलिस पूरे मामले की जांच करेगी। जांच में जमीन के पुराने रिकॉर्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिसान दस्तावेज, नामांतरण और रजिस्ट्री से जुड़े कागजातों की पड़ताल की जाएगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किस स्तर पर तैयार हुए और जमीन के हस्तांतरण में किन-किन लोगों की भूमिका रही। मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है।
Read More : Asian Games 2026: गुलवीर सिंह ने 10000 मीटर में जीता सिल्वर, भारत को मिला एथलेटिक्स में बड़ा पदक