PM Modi Deepfake Case : दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Meta को कथित आपत्तिजनक और मॉर्फ की गई तस्वीरों को हटाने का निर्देश दिया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि महिला की तस्वीर को कथित तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से मॉर्फ कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जोड़कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया। महिला ने इस सामग्री को हटाने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अदालत का रुख किया था।
CJP के चार लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोप
याचिका में CJP से जुड़े सौरव दास, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह को प्रतिवादी बनाया गया है। महिला की ओर से आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने कथित तौर पर उसकी तस्वीर को मॉर्फ कर आपत्तिजनक सामग्री के रूप में प्रसारित किया। हालांकि, ये आरोप याचिका में लगाए गए हैं और मामले में अदालत की अंतिम सुनवाई या निर्णय अभी बाकी है। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए मामले में उनका पक्ष जानने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
Meta को 24 घंटे में कंटेंट हटाने का निर्देश
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने Meta को संबंधित आपत्तिजनक तस्वीरों और सामग्री को 24 घंटे के भीतर अपने प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया। मामला सोशल मीडिया पर कथित डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट के इस्तेमाल से जुड़ा है। याचिका में महिला ने ऐसी सामग्री को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से हटाने की मांग की थी, जिसके बारे में उनका कहना है कि इससे उनकी निजता और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही है।
महिला को पुलिस सुरक्षा देने का भी आदेश
अदालत ने मामले में महिला की सुरक्षा को लेकर भी निर्देश जारी किया। रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने अपनी याचिका में धमकियां मिलने की बात कही थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को उन्हें पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने का आदेश दिया। इसके अलावा पुलिस को मामले की जांच से संबंधित स्टेटस रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर अदालत के सामने पेश करने को कहा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर से जुड़ा मामला
याचिका में जिस कथित डीपफेक सामग्री का उल्लेख किया गया है, उसमें महिला की तस्वीर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जोड़कर प्रस्तुत किए जाने का आरोप है। अदालत के समक्ष इस सामग्री को हटाने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में शामिल पक्षों को नोटिस जारी किया है। हालांकि, किसी पक्ष की जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष अभी अदालत के सामने तय होना बाकी है।
अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी
महिला की ओर से अधिवक्ता उमेश चंद्र शर्मा ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका में सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से कथित आपत्तिजनक तथा डीपफेक सामग्री हटाने की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने Meta के साथ-साथ याचिका में नामित CJP से जुड़े लोगों को भी नोटिस जारी किया है। अब मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को प्रस्तावित है। तब तक संबंधित पक्षों से जवाब और पुलिस की स्टेटस रिपोर्ट अदालत के सामने आने की उम्मीद है।
डीपफेक कंटेंट को लेकर बढ़ी कानूनी सक्रियता
सोशल मीडिया पर AI से तैयार या मॉर्फ की गई तस्वीरों को लेकर हाल के वर्षों में अदालतों में कई मामले सामने आए हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले भी डीपफेक और बिना अनुमति किसी व्यक्ति की तस्वीर या पहचान के इस्तेमाल से जुड़े मामलों में निजता और प्रतिष्ठा की सुरक्षा पर आदेश दिए हैं। ऐसे मामलों में अदालतें संबंधित सामग्री, उसके प्रसार और पक्षकारों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करती हैं।
अब कोर्ट के सामने रहेगा अगला कदम
फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट का आदेश कथित आपत्तिजनक सामग्री को हटाने, महिला की सुरक्षा और पुलिस से रिपोर्ट लेने से संबंधित है। याचिका में लगाए गए आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। अगली सुनवाई में अदालत पुलिस की रिपोर्ट और संबंधित पक्षों के जवाब पर विचार कर सकती है।
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