Iran US Deal: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया कूटनीतिक प्रस्ताव रखा है। ईरान का कहना है कि यदि अमेरिका उसकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, ईरानी तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में राहत देने और लेबनान को शामिल करते हुए व्यापक युद्धविराम लागू करने पर सहमत होता है, तो तेहरान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सात दिनों के भीतर वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोल सकता है। इसके साथ ही ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर रुकी हुई बातचीत भी दोबारा शुरू करने के लिए तैयार है।
विदेश मंत्री अराघची ने बताया सात दिन का रोडमैप
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाहर पत्रकारों से बातचीत में प्रस्ताव की रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा योजना स्वीकार किए जाने के साथ ही सात दिनों की समयसीमा शुरू हो जाएगी। उनके मुताबिक शुरुआती चार से पांच दिनों में प्रस्ताव से जुड़ी जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा किया जाएगा। इसके बाद छठे दिन होर्मुज जलडमरूमध्य को वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन के लिए खोलने की प्रक्रिया पूरी होगी।
सातवें दिन फिर शुरू होगी परमाणु वार्ता
अराघची के अनुसार, रोडमैप के सातवें दिन अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक बातचीत दोबारा शुरू हो सकती है। इसमें परमाणु कार्यक्रम के अलावा दोनों देशों के बीच पहले से सहमति वाले अन्य मुद्दों को भी शामिल किया जा सकता है। ईरान का यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ा हुआ है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय चिंता लगातार बनी हुई है।
होर्मुज स्ट्रेट से गुजरता है वैश्विक ऊर्जा कारोबार
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की बाधा का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ सकता है। तनाव बढ़ने के साथ तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे ऊर्जा लागत और महंगाई को लेकर कई देशों की चिंताएं बढ़ी हैं।
ट्रंप प्रशासन के सामने आर्थिक चुनौती
होर्मुज में लंबे समय तक व्यवधान अमेरिकी प्रशासन के लिए आर्थिक और राजनीतिक चुनौती बन सकता है। अमेरिका में आगामी नवंबर के मिडटर्म चुनावों से पहले ऊर्जा कीमतों और महंगाई का मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया है कि अमेरिकी अधिकारी मध्यस्थों के साथ सकारात्मक बातचीत कर रहे हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी संकेत दिया है कि बातचीत का अवसर मिलने पर अमेरिका उसे आगे बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा।
कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचा प्रस्ताव
ईरान का नया प्रस्ताव कतर के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया है। यह प्रस्ताव जून में हुए एक अस्थायी समझौते से मिलता-जुलता बताया जा रहा है, जो लागू होने के कुछ समय बाद ही समाप्त हो गया था। दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे अविश्वास के कारण किसी समझौते को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले भी हुए हैं, जिनके बीच परमाणु वार्ता का दौर चल रहा था।
खाड़ी देशों की चिंताएं भी बढ़ीं
ईरान के प्रस्ताव को लेकर सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों की चिंताएं बनी हुई हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों की गतिविधियों का भी असर पड़ा है। लाल सागर में बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास जहाजों पर हमलों और सऊदी अरब की ऊर्जा अवसंरचना को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने खाड़ी देशों की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ाया है।
ईरान के भीतर भी मतभेद सामने आए
कूटनीतिक पहल के बीच ईरान के अंदर भी इस रणनीति को लेकर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। देश का कट्टरपंथी धड़ा राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के कूटनीतिक प्रयासों की आलोचना कर रहा है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने भी माना कि देश में एक वर्ग केवल युद्ध की भाषा पर जोर दे रहा है, जबकि दूसरा वर्ग राष्ट्रीय क्षमताओं के आकलन में गलतियां कर रहा है।
प्रस्ताव पर अब अमेरिका की प्रतिक्रिया अहम
ईरान के इस सात दिवसीय रोडमैप का अगला चरण अमेरिका की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। यदि दोनों पक्ष शर्तों पर सहमति बनाने में सफल होते हैं, तो इससे होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और परमाणु वार्ता दोनों को लेकर नई स्थिति बन सकती है। फिलहाल क्षेत्रीय तनाव, आपसी अविश्वास और सुरक्षा चिंताओं के बीच इस प्रस्ताव पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
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