Punjab Politics 2026 : पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के एक बयान ने राज्य की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। लंबे समय बाद उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के साथ अपने राजनीतिक अनुभव और पंजाब से जुड़े फैसलों को लेकर खुलकर बात की। अमरिंदर सिंह ने दावा किया कि सितंबर 2022 में पंजाब लोक कांग्रेस का भाजपा में विलय करने और पार्टी में शामिल होने के बाद भी पंजाब से जुड़े अहम मामलों में उनसे सलाह नहीं ली जाती।
छह दशक के राजनीतिक अनुभव का दिया हवाला
पंजाब की राजनीति में करीब छह दशक का अनुभव रखने वाले अमरिंदर सिंह ने कहा कि उन्होंने राज्य में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखे हैं और लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। उनके मुताबिक इसके बावजूद भाजपा के केंद्रीय या राज्य नेतृत्व ने पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों, रणनीति और नीतिगत फैसलों को लेकर उनसे नियमित चर्चा नहीं की। उन्होंने कहा कि पंजाब के जमीनी हालात और लोगों की प्राथमिकताओं को समझने के लिए स्थानीय अनुभव महत्वपूर्ण है।
भाजपा को अकाली दल से गठबंधन की सलाह
अमरिंदर सिंह ने पंजाब में भाजपा की चुनावी रणनीति को लेकर अपनी राय भी रखी। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करना चाहती है और सरकार बनाने की दौड़ में प्रभावी भूमिका निभाना चाहती है, तो उसे शिरोमणि अकाली दल के साथ दोबारा गठबंधन पर विचार करना चाहिए। उनके अनुसार पंजाब में क्षेत्रीय राजनीतिक समीकरणों और पुराने सहयोगियों को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
कांग्रेस में वापसी की अटकलों पर लगाया विराम
भाजपा नेतृत्व को लेकर अमरिंदर सिंह की नाराजगी सामने आने के बाद उनके कांग्रेस में लौटने की अटकलें भी शुरू हो गईं। हालांकि, पूर्व मुख्यमंत्री ने इन चर्चाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल कांग्रेस में वापस जाने की उनकी कोई योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वह सक्रिय चुनावी राजनीति और मुख्यमंत्री पद की दौड़ से आगे निकल चुके हैं।
भाजपा छोड़ने की बात से किया इनकार
अमरिंदर सिंह ने अपने बयान में यह अंतर भी स्पष्ट किया कि किसी राजनीतिक मुद्दे पर अपनी राय रखना भाजपा छोड़ने का संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि पंजाब के हित में अपनी सलाह और अनुभव साझा करना उनका अधिकार और जिम्मेदारी है। उनके मुताबिक पार्टी के भीतर रहते हुए किसी विषय पर असहमति या सुझाव देना राजनीतिक संबंध समाप्त करने के समान नहीं माना जाना चाहिए।
भगवंत मान सरकार पर भी निशाना
पंजाब के मौजूदा हालात पर टिप्पणी करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में शासन व्यवस्था कमजोर हुई है। अमरिंदर सिंह ने नशे के बढ़ते कारोबार, सीमा पार से ड्रोन के जरिए हथियार और ड्रग्स पहुंचने, किसानों की नाराजगी और बेरोजगारी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। ये सभी दावे उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों पर टिप्पणी करते हुए किए।
2021 में कांग्रेस से अलग हुए थे अमरिंदर
अमरिंदर सिंह ने 2021 में कांग्रेस से अलग होने के बाद पंजाब लोक कांग्रेस का गठन किया था। इसके बाद सितंबर 2022 में उनकी पार्टी का भाजपा में विलय हो गया और वह भाजपा में शामिल हुए। तब से वह भाजपा के साथ राजनीतिक रूप से जुड़े रहे हैं। अब विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब भाजपा के कामकाज को लेकर उनका खुला बयान राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है।
पंजाब चुनाव से पहले बयान के राजनीतिक मायने
अमरिंदर सिंह के बयान में भाजपा की पंजाब रणनीति, अकाली दल के साथ संभावित रिश्ते और राज्य सरकार के प्रदर्शन जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल हैं। खास तौर पर भाजपा से संवाद नहीं होने और अकाली दल के साथ गठबंधन की उनकी सलाह ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ाई है। हालांकि, उनके कांग्रेस में लौटने से इनकार के बाद फिलहाल उनका राजनीतिक रुख भाजपा के भीतर अपनी राय रखने वाले वरिष्ठ नेता के तौर पर सामने आता है।
Read More : UNGA 2026 : UNGA में पेटल गहलोत का शहबाज शरीफ को जवाब, लादेन से पाकिस्तान के आर्मी रूल तक गिनाए मुद्दे