NASA Rescue Mission : अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA के पुराने स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी (Swift Observatory) को बचाने के लिए भेजा गया निजी रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट अपना मिशन पूरा नहीं कर सका। शुक्रवार को यह अंतरिक्ष यान पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय नष्ट हो गया। इसके साथ ही स्विफ्ट टेलीस्कोप को लंबी अवधि तक सक्रिय रखने के लिए चलाया गया करीब 3 करोड़ डॉलर का NASA प्रायोजित मिशन भी समाप्त हो गया।
Katalyst Space Technologies ने तैयार किया था Link
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी AP की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिशन के लिए भेजे गए रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट का नाम ‘लिंक’ (Link) था। इसे अमेरिकी कंपनी Katalyst Space Technologies ने तैयार किया था। कंपनी के अनुसार, तीन रोबोटिक हाथों से लैस यह अंतरिक्ष यान रातों-रात पृथ्वी के वातावरण में वापस आ गया और वायुमंडलीय घर्षण के कारण नष्ट हो गया।
22 साल पुराने टेलीस्कोप को बचाने की थी योजना
लिंक मिशन का मुख्य उद्देश्य करीब 22 साल पुराने स्विफ्ट स्पेस टेलीस्कोप को पकड़ना था। इसके बाद रोबोटिक यान को टेलीस्कोप को उसकी मौजूदा कक्षा से उठाकर ज्यादा ऊंची और लंबे समय तक टिकने वाली कक्षा में पहुंचाना था। वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि मिशन सफल रहने पर स्विफ्ट आने वाले वर्षों में भी ब्रह्मांड की महत्वपूर्ण घटनाओं का अध्ययन करता रहेगा।
Swift Observatory की कक्षा तेजी से हो रही नीचे
स्विफ्ट टेलीस्कोप की कक्षा लगातार नीचे की ओर खिसक रही है। इसके चलते इसके नवंबर की शुरुआत के आसपास पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने की आशंका जताई जा रही है। टेलीस्कोप की कक्षा में यह गिरावट सामान्य वायुमंडलीय घर्षण के साथ-साथ सूर्य की बढ़ी हुई गतिविधियों से भी प्रभावित हुई है।
सूर्य की गतिविधियों ने बढ़ाई NASA की चिंता
NASA के मुताबिक, सूर्य की तीव्र गतिविधियों के कारण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में बदलाव आया। इससे वातावरण का घनत्व बढ़ा और स्विफ्ट टेलीस्कोप पर वायुमंडलीय खिंचाव पहले की अपेक्षा अधिक प्रभावी हो गया। परिणामस्वरूप टेलीस्कोप की कक्षा उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से नीचे आने लगी। इसी वजह से NASA को स्विफ्ट के भविष्य को लेकर तत्काल कदम उठाने पड़े।
NASA ने वैज्ञानिक अवलोकन पहले ही रोके
स्थिति बिगड़ने के बाद NASA ने इस साल की शुरुआत में स्विफ्ट के वैज्ञानिक अवलोकनों को रोक दिया था। टेलीस्कोप को ऐसी स्थिति में रखने की कोशिश की गई, जिससे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल के साथ होने वाले घर्षण का प्रभाव कम किया जा सके। इसके बावजूद टेलीस्कोप को लंबे समय तक बचाए रखने की चुनौती बनी रही।
3 जुलाई को लॉन्च हुआ था Link
स्विफ्ट को बचाने के लिए तैयार किया गया लिंक स्पेसक्राफ्ट 3 जुलाई को लॉन्च किया गया था। इसे एक साल से भी कम समय में डिजाइन और तैयार किया गया था। हालांकि लॉन्च के तुरंत बाद ही मिशन के सामने तकनीकी समस्याएं आने लगीं, जिससे टेलीस्कोप तक पहुंचने और उसे नियंत्रित करने की योजना पर असर पड़ा।
दो Reaction Wheels हुए खराब
लिंक स्पेसक्राफ्ट को अंतरिक्ष में अपनी दिशा और रोटेशन नियंत्रित करने के लिए तीन रिएक्शन व्हील की जरूरत थी। इनमें से दो रिएक्शन व्हील खराब हो गए। इसके कारण स्पेसक्राफ्ट की दिशा और स्थिति को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। तकनीकी समस्या ने मिशन की सफलता की संभावनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
Swift ने ब्रह्मांडीय रहस्यों को समझने में दी मदद
स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी लंबे समय से ब्रह्मांड में होने वाले शक्तिशाली विस्फोटों और अन्य खगोलीय घटनाओं का अध्ययन कर रही थी। इस टेलीस्कोप ने वैज्ञानिकों को खास तौर पर गामा-रे बर्स्ट जैसी अत्यंत ऊर्जावान घटनाओं को समझने में मदद की। इसे बचाने की योजना इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसकी मदद से वैज्ञानिक ब्रह्मांड के कई रहस्यमय घटनाक्रमों पर लगातार नजर रख सकते थे।
Rescue Mission की असफलता से खत्म हुई उम्मीद
लिंक के वायुमंडल में नष्ट होने के बाद स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को नई कक्षा में पहुंचाने की यह कोशिश विफल हो गई है। अब टेलीस्कोप के भविष्य पर नजरें टिकी हैं। यदि इसकी कक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो नवंबर की शुरुआत में इसके पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने की संभावना बनी हुई है। इस घटना के साथ 22 साल पुराने इस वैज्ञानिक मिशन का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी समाप्त हो सकता है।
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